Mutual Fund Investment March: शेयर बाजार में इस समय भारी उठापटक देखने को मिल रही है। मार्च के महीने में निफ्टी में 11 फीसदी की भारी गिरावट आई, जो 2020 की कोविड महामारी के बाद सबसे बड़ी गिरावट है। इस डर के माहौल में विदेशी निवेशकों (FPI) ने 1.23 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। लेकिन इस मुश्किल वक्त में भारत के घरेलू म्युचुअल फंड्स शेयर बाजार के लिए ढाल बनकर सामने आए हैं। म्युचुअल फंड्स ने बाजार की इस गिरावट का पूरा फायदा उठाते हुए 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रिकॉर्ड निवेश किया है। इस बड़ी खरीदारी ने बाजार को क्रैश होने से काफी हद तक बचा लिया है। यह दिखाता है कि अब भारतीय रिटेल निवेशक घबराने के बजाय 'गिरावट में खरीदारी' (Buy on Dips) की रणनीति अपना रहे हैं। वित्तीय जागरूकता और एसआईपी (SIP) के बढ़ते चलन ने म्युचुअल फंड्स को शेयर बाजार की सबसे बड़ी ताकत बना दिया है।
![]() |
| FY26 Mutual Fund Data |
मुंबई, 4 अप्रैलः शेयर बाजार एक ऐसा मंच है जहाँ कभी खुशी होती है तो कभी गम। बीते मार्च महीने में बाजार का कुछ ऐसा ही हाल रहा। बाजार में भारी गिरावट (क्रैश) देखने को मिली। हर तरफ लाल निशान छाए हुए थे। इस गिरावट को देखकर विदेशी निवेशकों ने अपना पैसा तेजी से निकालना शुरू कर दिया। लेकिन क्या आपको पता है कि इस मुश्किल वक्त में भारतीय शेयर बाजार को किसने संभाला? जी हाँ, हमारे अपने देसी म्युचुअल फंड्स (Mutual Funds) ने।
मार्च महीने में जहाँ विदेशी निवेशक शेयर बेचकर भाग रहे थे, वहीं घरेलू म्युचुअल फंड्स ने इस गिरावट को एक शानदार मौके की तरह देखा। उन्होंने बाजार में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का रिकॉर्ड निवेश कर डाला और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के असर को काफी हद तक कम कर दिया। आइए इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
निफ्टी में आई 11 फीसदी की भारी गिरावट
मार्च का महीना शेयर बाजार के लिए काफी भारी रहा। इस महीने निफ्टी इंडेक्स में 11 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अगर हम इतिहास के पन्ने पलटें, तो मार्च 2020 में जब दुनिया भर में कोविड-19 महामारी फैली थी, तब बाजार में ऐसा भयानक क्रैश देखने को मिला था। 2020 के बाद यह सूचकांक (इंडेक्स) की सबसे बड़ी मासिक गिरावट है। जब भी बाजार इस तरह से गिरता है, तो आम तौर पर निवेशकों में घबराहट (पैनिक) फैल जाती है। लेकिन इस बार कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट था।
विदेशी निवेशकों (FPI) ने तोड़े बिकवाली के सारे रिकॉर्ड
बाजार गिरते ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अपने शेयर अंधाधुंध बेचने शुरू कर दिए। आँकड़ों की मानें तो मार्च महीने में विदेशी निवेशकों ने 1.23 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। यह आज तक की सबसे बड़ी मासिक बिकवाली है।
इससे पहले विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर 2024 में 92,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी, जिसने बाजार में हड़कंप मचा दिया था। लेकिन मार्च की इस 1.23 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली ने तो अक्टूबर 2024 के उस डरावने रिकॉर्ड को भी काफी पीछे छोड़ दिया है।
देसी म्युचुअल फंड्स बने बाजार की सबसे बड़ी ढाल
एक तरफ विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे थे, तो दूसरी तरफ हमारे घरेलू म्युचुअल फंड्स पूरी ताकत से पैसा लगा रहे थे। 30 मार्च तक के अंतरिम आँकड़ों के अनुसार, एमएफ (MF) ने शेयरों में अपना कुल निवेश बढ़ाकर 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा दिया।
आखिर इतना पैसा आया कहाँ से और फंड मैनेजरों ने इतना बड़ा दांव क्यों खेला? इसके मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
गिरावट में खरीदारी (Buy on Dips): शेयर बाजार का एक पुराना नियम है- सस्ते में खरीदो। म्युचुअल फंड्स ने देखा कि अच्छी कंपनियों के शेयर काफी कम भाव पर मिल रहे हैं, इसलिए उन्होंने जमकर खरीदारी की।
एकमुश्त निवेश (Lumpsum Investment): बाजार गिरता देख निवेशकों ने अपना रुका हुआ पैसा भी म्युचुअल फंड्स में डालना शुरू कर दिया।
निकासी में कमी: इस बार निवेशकों ने घबराकर अपना पैसा नहीं निकाला। पैसे निकालने की रफ्तार बहुत धीमी रही, जिससे फंड हाउस के पास निवेश करने के लिए भरपूर कैश मौजूद था।
मोतीलाल ओसवाल के एक्सपर्ट का क्या कहना है?
इस पूरे ट्रेंड पर बात करते हुए मोतीलाल ओसवाल ऐसेट मैनेजमेंट के कार्यकारी निदेशक और मुख्य बिज़नेस अधिकारी अखिल चतुर्वेदी ने एक बहुत ही अहम जानकारी दी।
उन्होंने कहा, "अगर हम पिछली दो तिमाहियों को देखें, तो मार्च का महीना सबसे मजबूत महीनों में से एक रहा है। इस महीने इक्विटी योजनाओं (शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले फंड्स) में सकल (Gross) और शुद्ध (Net), दोनों तरह के निवेश में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है।" अखिल चतुर्वेदी के मुताबिक, बाजार गिरने पर निवेशकों ने समझदारी दिखाई और अपने पास रखे एक्स्ट्रा पैसों को एकमुश्त निवेश के जरिए बाजार में झोंक दिया।
5 लाख करोड़ के पार पहुँचा कुल निवेश का आँकड़ा
म्युचुअल फंड्स की इस तूफानी खरीदारी ने कई नए रिकॉर्ड बना दिए हैं। मार्च महीने की इस बंपर खरीदारी के बाद, वित्त वर्ष 2026 में म्युचुअल फंडों का शेयरों में कुल निवेश 5 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।
अगर हम इसकी तुलना पिछले साल से करें, तो यह एक बहुत बड़ी छलांग है। वित्त वर्ष 2025 में म्युचुअल फंड्स का कुल निवेश 4.7 लाख करोड़ रुपये के उच्चतम स्तर पर था। यानी इस बार हमने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
हालाँकि, दिलचस्प बात यह है कि वित्त वर्ष 2026 में निवेश की शुरुआत थोड़ी धीमी थी। फरवरी महीने तक म्युचुअल फंड्स का शेयर बाजार में कुल निवेश लगभग 3 लाख करोड़ रुपये ही था, जो वित्त वर्ष 2025 के कुल आंकड़े से करीब 27 फीसदी कम था। लेकिन फिर मार्च में इक्विटी, कमोडिटी और हाइब्रिड फंड्स में आए पैसों की बाढ़ ने सारी सुस्ती को खत्म कर दिया।
हाइब्रिड और नकद होल्डिंग का भी मिला फायदा
सिर्फ नए निवेश ने ही कमाल नहीं किया है। हाइब्रिड फंड्स (जो शेयर और डेब्ट दोनों में पैसा लगाते हैं) ने भी अपनी रणनीति में बदलाव किया। पिछले एक साल से हाइब्रिड फंड्स शेयर बाजार में अपना हिस्सा लगातार बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, म्युचुअल फंड्स के पास जो खाली कैश (नकद होल्डिंग) पड़ा था, उसे भी इस गिरावट के दौरान शेयर खरीदने में इस्तेमाल किया गया। मार्च में भी हाइब्रिड फंड्स की तरफ से बाजार में तेजी के पूरे आसार बने हुए हैं।
भारतीय निवेशकों की बदलती सोच: यूनियन एमएफ के सीईओ की राय
आखिर भारत में म्युचुअल फंड्स का इतना क्रेज क्यों बढ़ रहा है? इसका बहुत ही सटीक जवाब यूनियन एमएफ के सीईओ मधु नायर ने दिया है।
उन्होंने कहा, "आज के समय में वित्तीय जागरूकता (Financial Literacy) और डिजिटलीकरण बहुत तेजी से बढ़ा है। इसके साथ ही लोगों की प्रति व्यक्ति आय में भी इजाफा हुआ है। पहले लोग अपनी बचत को सिर्फ बैंक एफडी या सोने में लगाते थे, लेकिन अब भारतीय परिवार अपनी बचत को शेयर बाजार जैसी वित्तीय संपत्तियों में निवेश कर रहे हैं।"
मधु नायर ने यह भी बताया कि पिछले कुछ सालों में शेयर बाजार ने लगातार अच्छा रिटर्न दिया है। इस अच्छे प्रदर्शन ने बदलाव की इस गति को और तेज कर दिया है। आज के समय में म्युचुअल फंड्स शेयर बाजार में एक बड़ी ताकत के रूप में उभर चुके हैं। एसआईपी (SIP) के जरिए आने वाला लगातार पैसा भारतीय बाजार को एक मजबूत सहारा (स्टेबिलिटी) दे रहा है।
मार्च का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा टेस्ट था। विदेशी निवेशकों ने 1.23 लाख करोड़ रुपये निकालकर बाजार को गिराने की पूरी कोशिश की, लेकिन हमारे घरेलू म्युचुअल फंड्स और भारतीय रिटेल निवेशकों ने 1 लाख करोड़ रुपये की बंपर खरीदारी करके बाजार को बचा लिया। म्युचुअल फंड्स ने इस भारी गिरावट में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संतुलनकारी (Balancing) भूमिका निभाई है।
ध्यान दें कि मार्च महीने के म्युचुअल फंड निवेश और शेयरों की कुल शुद्ध खरीद के अंतिम (Final) आंकड़े अगले हफ्ते आने वाले हैं। सेबी (SEBI) और एक्सचेंज द्वारा डेटा अपडेट होने पर इन अंतिम आंकड़ों में थोड़ा बहुत बदलाव हो सकता है। लेकिन एक बात तो साफ है, भारतीय शेयर बाजार अब सिर्फ विदेशी निवेशकों के भरोसे नहीं बैठा है; हमारे अपने देसी फंड्स अब बाजार के नए 'गेम चेंजर' बन चुके हैं।
Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। MoneysutraHub.in अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

