शेयर बाजार की गिरावट के बीच IPO मार्केट का महाधमाका! लगातार दूसरे साल बना रिकॉर्ड, जुटाए 1.8 लाख करोड़ रुपये

MoneySutraHub Team

 IPO Market India: भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों एक अजीब सा ट्रेंड देखने को मिल रहा है। सेकेंडरी मार्केट यानी जहां पहले से लिस्टेड शेयरों की खरीद-बिक्री होती है, वहां भारी उतार-चढ़ाव और गिरावट का दौर है। निफ्टी और सेंसेक्स जैसे प्रमुख इंडेक्स दबाव में हैं। विदेशी निवेशक लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं। लेकिन इन सब खराब हालातों के बावजूद, प्राइमरी मार्केट यानी आईपीओ (IPO) बाजार में एक अलग ही जश्न का माहौल है। वित्त वर्ष 2026 में 112 कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाकर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम किया है। यह लगातार दूसरा साल है जब आईपीओ बाजार ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हालांकि, लिस्टिंग पर मिलने वाले मुनाफे (Listing Gains) में कमी आई है और रिटेल निवेशकों की भागीदारी घटी है। आगे सैकड़ों कंपनियां कतार में हैं, जो बाजार के हालात सुधरने का इंतजार कर रही हैं। इस लेख में हम इस पूरे घटनाक्रम का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।


FY 2026 IPO Record


मुंबई, 3 अप्रैलः भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) हमेशा से ही आश्चर्य और रोमांच से भरा रहा है। जब दुनिया भर के बाजारों में निराशा का माहौल होता है, तब भी भारतीय बाजार अपनी एक अलग चाल चलता है। ऐसा ही कुछ वित्त वर्ष 2026 में देखने को मिला है। एक तरफ जहां हमारा सेकेंडरी बाजार (Secondary Market) बुरी तरह से लड़खड़ा रहा था, वहीं दूसरी तरफ प्राइमरी बाजार यानी आईपीओ (IPO) मार्केट ने ऐसा धमाका किया कि बड़े-बड़े अर्थशास्त्री और बाजार विशेषज्ञ हैरान रह गए।


आपको यह जानकर हैरानी होगी कि वित्त वर्ष 2026 में भारतीय कंपनियों ने आईपीओ के जरिए बाजार से रिकॉर्ड 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह आंकड़ा तब सामने आया है जब ग्लोबल मार्केट में टेंशन थी और विदेशी निवेशक अपना पैसा निकाल रहे थे। आइए इस पूरी रिपोर्ट को आसान भाषा में और विस्तार से समझते हैं।


लगातार दूसरे साल टूटा रिकॉर्ड: एक नया इतिहास


शेयर बाजार का एक पुराना और स्थापित नियम रहा है कि जब भी किसी एक साल में आईपीओ बाजार बहुत मजबूत प्रदर्शन करता है, तो उसके अगले साल आमतौर पर शांति छा जाती है। यानी कंपनियां पैसा जुटाने से बचती हैं। लेकिन भारतीय बाजार ने इस पुरानी परंपरा को पूरी तरह से तोड़ दिया है।


यह पहली बार है जब आईपीओ से पैसा जुटाने का सिलसिला लगातार दो सालों तक अपने चरम पर रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो:


वित्त वर्ष 2025: इस साल कुल 78 मुख्य श्रेणी (Mainboard) के आईपीओ आए थे, जिनके जरिए बाजार से 1.62 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए थे।


वित्त वर्ष 2026: इस साल यह आंकड़ा और भी ऊपर चला गया। कुल 112 कंपनियों ने अपने आईपीओ लॉन्च किए और बाजार से 1.8 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम जुटा ली।


यह रिकॉर्ड अपने आप में इसलिए भी खास है क्योंकि वित्त वर्ष 2026 की आखिरी तिमाही में बाजार का मूड बहुत खराब था। निफ्टी (Nifty) में लगभग 15 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। इस गिरावट के कारण आखिरी तिमाही में आईपीओ के जरिए केवल 18,772 करोड़ रुपये ही जुटाए जा सके। अगर यह गिरावट ना आती, तो शायद यह रिकॉर्ड 2 लाख करोड़ रुपये के भी पार चला जाता।


प्राइमरी बनाम सेकेंडरी मार्केट: क्यों हुआ यह विरोधाभास?


अब सवाल यह उठता है कि जब शेयर बाजार गिर रहा था, तो आईपीओ इतने हिट कैसे हो गए? इसके लिए हमें उन कारणों को समझना होगा जिन्होंने सेकेंडरी मार्केट (जहां रोज ट्रेडिंग होती है) की कमर तोड़ दी थी।


वित्त वर्ष 2026 के दौरान घरेलू बेंचमार्क सूचकांकों ने दुनिया के अन्य बाजारों के मुकाबले काफी खराब प्रदर्शन किया। पूरे साल के दौरान:


निफ्टी 50 (Nifty 50): इसमें 5.1 प्रतिशत की गिरावट आई।


सेंसेक्स (Sensex): इसमें 7.1 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।


यह वित्त वर्ष 2020 (जब कोविड आया था) के बाद भारतीय बाजार का सबसे खराब प्रदर्शन था। बाजार में इस उथल-पुथल के पीछे कई बड़े कारण थे:


भू-राजनीतिक तनाव: दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव के हालात बने हुए थे, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित हुई।


कच्चे तेल की कीमतें: क्रूड ऑयल (Crude Oil) के दामों में अचानक आई तेजी ने महंगाई का डर पैदा कर दिया।


विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाला।


इन सबके बावजूद आईपीओ बाजार इसलिए सफल रहा क्योंकि हमारे घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने मोर्चा संभाल लिया था। म्यूचुअल फंड्स और घरेलू बीमा कंपनियों ने बाजार में इतना पैसा डाला कि विदेशी निवेशकों के जाने का असर काफी हद तक कम हो गया। इससे यह भी साबित होता है कि भारतीय बाजार अब विदेशी पूंजी पर पहले जितना निर्भर नहीं है।


लिस्टिंग गेन में आई भारी गिरावट: निवेशकों के लिए एक चेतावनी


भले ही कंपनियों ने आईपीओ से बंपर पैसा जुटा लिया हो, लेकिन क्या आम निवेशकों को इससे फायदा हुआ? इसका जवाब थोड़ा निराशाजनक है। आईपीओ में पैसा लगाने वाले निवेशक मुख्य रूप से लिस्टिंग वाले दिन मिलने वाले मुनाफे (Listing Gains) का इंतजार करते हैं। लेकिन खराब बाजार का असर इस मुनाफे पर साफ दिखाई दिया।


मुनाफा घटा: एक साल पहले जहां औसतन 30 प्रतिशत का लिस्टिंग फायदा होता था, वह अब घटकर मात्र 8 प्रतिशत रह गया है।


खराब शुरुआत: वित्त वर्ष 2026 में आए कुल आईपीओ में से केवल 31 प्रतिशत आईपीओ ही ऐसे थे, जिन्होंने बाजार में लिस्ट होते समय 10 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया।


इस कमजोर प्रदर्शन ने निवेशकों के उत्साह को काफी हद तक फीका कर दिया है। अब निवेशक हर किसी आईपीओ में पैसा लगाने के बजाय 'चुनकर निवेश करने' (Stock Selection) की रणनीति पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।


रिटेल निवेशकों का मोहभंग और घटते आवेदन


जब लिस्टिंग पर बंपर कमाई नहीं होती, तो सबसे पहले छोटे निवेशक यानी रिटेल इन्वेस्टर्स पीछे हटते हैं। यही ट्रेंड इस बार भी देखने को मिला है। प्राइमरी मार्केट में भले ही कंपनियों की बाढ़ आई हो, लेकिन निवेशकों की भीड़ कम हो गई है।


प्राइम डेटाबेस (Prime Database) के आंकड़ों के अनुसार:


ओवर-सब्सक्रिप्शन में कमी: जिन आईपीओ को 10 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब किया गया था, उनकी संख्या वित्त वर्ष 2025 में 72 प्रतिशत थी। लेकिन वित्त वर्ष 2026 में यह आंकड़ा गिरकर सिर्फ 56 प्रतिशत रह गया।


रिटेल आवेदनों में भारी गिरावट: एक साल पहले तक एक आईपीओ में औसतन 21.3 लाख रिटेल आवेदन आते थे, जो अब घटकर मात्र 13 लाख रह गए हैं। यह साफ दर्शाता है कि आम आदमी अब अपनी गाढ़ी कमाई शेयर बाजार में लगाने से पहले दस बार सोच रहा है और क्वालिटी कंपनियों का ही चुनाव कर रहा है।


भविष्य का रास्ता: कतार में हैं सैकड़ों कंपनियां


भले ही इस समय बाजार में थोड़ी सुस्ती हो और छोटे निवेशक डरे हुए हों, लेकिन कंपनियों का उत्साह कम नहीं हुआ है। कई कंपनियां अपना आईपीओ लाने के लिए पूरी तरह तैयार बैठी हैं।


प्राइम डेटाबेस की रिपोर्ट बताती है कि आईपीओ बाजार की पाइपलाइन बहुत मजबूत है:


सेबी की मंजूरी मिली: लगभग 144 कंपनियां ऐसी हैं जिन्हें बाजार नियामक सेबी (SEBI) से आईपीओ लाने की हरी झंडी मिल चुकी है। ये कंपनियां बाजार से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं।


मंजूरी का इंतजार: इसके अलावा 63 नए आईपीओ प्रस्ताव सेबी के पास मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिनके जरिए 1.37 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है।


हालांकि, सेकेंडरी बाजार में लगातार हो रही बिकवाली को देखते हुए शॉर्ट टर्म (अल्पावधि) में आईपीओ की गतिविधियां थोड़ी सुस्त रह सकती हैं। कंपनियां अभी सही समय का इंतजार कर रही हैं।


बाजार के दिग्गजों की क्या है राय?


बाजार के मौजूदा हालात पर एक्सपर्ट्स का नजरिया बहुत स्पष्ट है।


इक्विरस कैपिटल (Equirus Capital) के प्रबंध निदेशक और निवेश बैंकिंग प्रमुख, भावेश शाह का कहना है, "घरेलू आईपीओ बाजार पिछले कई दशकों में देखे गए सबसे मजबूत बैकलॉग के साथ वित्त वर्ष 2027 में प्रवेश कर रहा है। नया वित्त वर्ष मात्रा (Quantity) से अधिक गुणवत्ता (Quality), आकार और सही वैल्यूएशन के अनुशासन के बारे में ज्यादा होगा।"


वहीं, प्राइम डेटाबेस के प्रणव हल्दिया ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही है। उनके अनुसार, "कंपनियां अब अस्थिर या खराब बाजार हालात में जबरदस्ती अपना आईपीओ लाने के बजाय उसे टालने के लिए तैयार हैं। यह उनके 'रुको और देखो' (Wait and Watch) के दृष्टिकोण को साफ तौर पर दर्शाता है।"


कुल मिलाकर देखा जाए तो वित्त वर्ष 2026 भारतीय आईपीओ बाजार के लिए एक ऐतिहासिक साल रहा है। 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाना यह साबित करता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में दम है और घरेलू निवेशक बाजार को संभालने में सक्षम हैं। लेकिन, घटते लिस्टिंग गेन और रिटेल निवेशकों की कम होती संख्या एक चेतावनी भी है।


आने वाले समय में कंपनियों को अपने आईपीओ की कीमत (Valuation) सही रखनी होगी ताकि निवेशकों को मुनाफा कमाने का मौका मिल सके। वहीं, आम निवेशकों को भी अब सिर्फ आईपीओ के नाम पर पैसा लगाने से बचना चाहिए। कंपनी के बिजनेस मॉडल, उसकी कमाई और भविष्य के प्लान को अच्छे से समझकर ही निवेश करना समझदारी होगी। आने वाला साल बाजार में क्वालिटी और अनुशासन का साल होने वाला है।


डिस्क्लेमर: यहां पर दिए गए विचार और इन्वेस्टमेंट सलाह इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के अपने विचार और सलाह हैं। MoneysutraHub.in यूज़र्स को सलाह देता है कि कोई भी इन्वेस्टमेंट का फैसला लेने से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।


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