Consumption Funds, Mutual Fund: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है और इसका सीधा असर निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ रहा है। अगर आपने भी कंजम्प्शन फंड्स (Consumption Funds) में पैसा लगाया है, तो शायद आपका पोर्टफोलियो इस वक्त लाल निशान में दिख रहा होगा। पिछले 3 महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो कंजम्प्शन फंड्स में लगभग 12.7 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस बड़ी गिरावट के कारण यह कैटेगरी हालिया समय में दूसरी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली कैटेगरी बन गई है।
नई दिल्ली, 3 अप्रैलः वर्तमान में इस कैटेगरी के तहत कुल 37 फंड बाजार में मौजूद हैं, जो करीब 40,739 करोड़ रुपये के विशाल एसेट (AUM) को मैनेज कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस गिरते बाजार में पैसा निकालकर भाग जाना चाहिए, या फिर बाजार की इस गिरावट को एक बेहतरीन निवेश के मौके (Buying Opportunity) के रूप में देखना चाहिए? आइए देश के दिग्गज वित्तीय विशेषज्ञों की मदद से इस पूरे गणित को आसान भाषा में समझते हैं।
कंजम्प्शन फंड्स में आखिर गिरावट क्यों आई?
किसी भी बीमारी का इलाज करने से पहले उसकी जड़ को समझना जरूरी है। कंजम्प्शन फंड्स के खराब प्रदर्शन के पीछे एक नहीं, बल्कि कई बड़े कारण छिपे हैं:
कच्चे तेल (Crude Oil) की मार:
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने कंपनियों का बजट बिगाड़ दिया है। सेबी-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार और SahajMoney.com के फाउंडर अभिषेक कुमार इस पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं, "तेल की ऊंची कीमतों के कारण ट्रांसपोर्टेशन और पैकेजिंग का खर्च काफी बढ़ गया है। इसका सीधा असर उपभोक्ता-केंद्रित (Consumer-centric) कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ा है।" अगर भविष्य में इनपुट कॉस्ट और बढ़ती है, तो इन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव और ज्यादा गहरा सकता है।
भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में रुकावट:
पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे युद्ध और ग्लोबल टेंशन ने सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। आनंद राठी वेल्थ के ज्वाइंट सीईओ फिरोज अजीज बताते हैं, "ग्लोबल टेंशन की वजह से सामान की सोर्सिंग बहुत महंगी हो गई है। जो भारतीय कंपनियां पहले खाड़ी देशों से सस्ता कच्चा माल मंगाती थीं, उन्हें अब मजबूरी में दूसरे देशों से महंगे दाम पर आयात करना पड़ रहा है। इससे उनका मुनाफा कम हो रहा है।"
महंगाई का डर और कम होती मांग:
जब बाजार में महंगाई बढ़ती है, तो आम आदमी अपने गैर-जरूरी खर्चों (Discretionary Spending) में कटौती कर देता है। फिनप्रो वेल्थ के चीफ फाइनैंशियल प्लानर और फाउंडर हर्ष वीरा का कहना है, "महंगाई के डर से लोगों ने अपना खर्च कम कर दिया है, जिससे सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर दिख रहा है।"
कंपनियों का हाई वैल्यूएशन (High Valuation):
पिछले कुछ सालों में मजबूत ब्रांड वैल्यू और लगातार हो रही कमाई के कारण कंजम्प्शन सेक्टर की कंपनियों के शेयर बहुत महंगे (Overvalued) हो गए थे। प्रूडेंट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सीईओ प्रशस्त सेठ बताते हैं कि यह मौजूदा गिरावट असल में हाई वैल्यूएशन और मैक्रो चुनौतियों के टकराव का नतीजा है। शहरी इलाकों में मांग ठीक है, लेकिन ग्रामीण मांग अभी भी कमजोर है। ऐसे में इन कंपनियों का प्रीमियम वैल्यूएशन अब सही नहीं लग रहा है।
ग्लोबल 'रिस्क-ऑफ' (Risk-Off) माहौल:
हेलियोस इंडिया के बिजनेस हेड देवीप्रसाद नायर के मुताबिक, दुनिया भर में चल रहे युद्ध और तनाव के कारण विदेशी निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं। इस ग्लोबल 'रिस्क-ऑफ' सेंटिमेंट ने पूरे बाजार की धारणा को नकारात्मक बना दिया है।
उम्मीद की किरण: कंजम्प्शन फंड्स को सहारा देने वाले फैक्टर
भले ही अभी तस्वीर धुंधली लग रही हो, लेकिन भविष्य के लिए कई ऐसे फैक्टर हैं जो कंजम्प्शन थीम को फिर से रॉकेट बना सकते हैं:
लागत में कमी की उम्मीद: अगर आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर होती हैं और ग्लोबल टेंशन कम होती है, तो कंपनियों की लागत घटेगी। अभिषेक कुमार के अनुसार, कच्चे माल की कीमतें स्थिर होने और सप्लाई चेन सुधरने से कंपनियों का मार्जिन फिर से बढ़ सकता है।
मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था (Domestic Growth): भारत की इकोनॉमी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। फिरोज अजीज मानते हैं कि लोगों की बढ़ती आय, युवा आबादी, टैक्स में छूट और जीएसटी दरों में कटौती जैसे सरकारी कदम इस सेक्टर के लिए संजीवनी का काम करेंगे।
लॉन्ग टर्म पॉजिटिव ट्रेंड्स: देवीप्रसाद नायर के अनुसार, अर्थव्यवस्था का तेजी से फॉर्मलाइजेशन होना, लोगों का महंगे ब्रांड्स की तरफ शिफ्ट होना (Premiumization) और डिजिटल पहुंच बढ़ना ये सभी कंजम्प्शन सेक्टर के लिए बहुत बड़े लॉन्ग टर्म फायदे हैं।
त्योहारी सीजन और ग्रामीण मांग: हर्ष वीरा का मानना है कि भारत में त्योहारों की मांग हमेशा इस सेक्टर को सहारा देती है। इसके अलावा, अच्छे मॉनसून के बाद ग्रामीण इलाकों में खपत बढ़ने की पूरी उम्मीद है, जो इस सेक्टर को वापसी करने में मदद करेगी।
कंजम्प्शन फंड्स में निवेश के फायदे
घरेलू विकास में सीधी भागीदारी: ये फंड्स आपको भारत की घरेलू 'ग्रोथ स्टोरी' में सीधा निवेश करने का मौका देते हैं। जब विदेशी बाजारों में टैरिफ और एक्सपोर्ट की दिक्कतें आती हैं, तब भी ये फंड्स सुरक्षित रहते हैं क्योंकि इनकी कमाई देश के अंदर से ही होती है।
शानदार डायवर्सिफिकेशन: कंजम्प्शन फंड में पैसा लगाने से आपका निवेश एफएमसीजी (FMCG), ऑटोमोबाइल, रिटेल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे कई अलग-अलग सेक्टर्स में फैल जाता है। इससे एक ही झटके में आपको बेहतरीन कंपनियों का एक्सपोजर मिल जाता है।
कंजम्प्शन फंड्स में निवेश के जोखिम
ओवरवैल्यूएशन का खतरा: एफएमसीजी जैसी कंपनियों के शेयर अक्सर बहुत महंगे होते हैं। नायर बताते हैं कि ग्रोथ और वैल्यूएशन में तालमेल न होने के कारण ये हर समय निवेश के लिए आकर्षक नहीं लगते।
चक्रिक (Cyclical) नेचर: थीमैटिक फंड्स का प्रदर्शन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। अजीज कहते हैं कि अच्छे रिटर्न के बाद अक्सर एक सुस्ती का दौर आता है, और इस वक्त कंजम्प्शन सेक्टर उसी दौर से गुजर रहा है।
कंसंट्रेशन रिस्क: यह एक थीमैटिक फंड है। अगर आप पहले से ही किसी लार्ज-कैप या डायवर्सिफाइड फंड में निवेश कर रहे हैं, तो आपके पास पहले से ही कंजम्प्शन स्टॉक्स होंगे। अलग से इस फंड में पैसा डालने से आपका रिस्क बढ़ सकता है।
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
बाजार की इस स्थिति को देखते हुए अलग-अलग निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह इस प्रकार है:
मौजूदा निवेशकों के लिए: अगर आपने इस थीम को समझकर 5 साल या उससे अधिक के नजरिए से निवेश किया है, तो बाजार की इस शॉर्ट-टर्म गिरावट से घबराएं नहीं। फिरोज अजीज सलाह देते हैं कि यह गिरावट अस्थायी है। अगर आप अभी घबराकर बाहर निकल जाएंगे, तो भविष्य में जब मांग और मार्जिन सुधरेंगे, तब आप बड़े मुनाफे से चूक जाएंगे।
पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग: अगर आपने अपने कुल निवेश का बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ कंजम्प्शन फंड्स में डाल दिया है, तो जब भी बाजार में रिकवरी आए, अपना कुछ प्रॉफिट बुक कर लें और निवेश को थोड़ा कम करें।
नए निवेशकों के लिए: जो लोग पहली बार शेयर बाजार या म्यूच्यूअल फंड में कदम रख रहे हैं, उन्हें सेक्टोरल या थीमैटिक फंड्स से दूर ही रहना चाहिए। आपके लिए लार्ज कैप या फ्लेक्सी कैप (Diversified Equity Funds) ज्यादा सुरक्षित रहेंगे।
SIP का लें सहारा: हर्ष वीरा की सलाह है कि अगर आप कंजम्प्शन की 'ग्रोथ स्टोरी' पर भरोसा करते हैं, तो एकमुश्त (Lumpsum) पैसा लगाने के बजाय एसआईपी (SIP) के जरिए धीरे-धीरे निवेश करें। उन फंड्स को चुनें जो मजबूत ब्रांड वैल्यू वाली कंपनियों में पैसा लगाते हों, क्योंकि ऐसी कंपनियां मुश्किल समय में भी कीमतें बढ़ाकर अपना मुनाफा बचा सकती हैं।
शेयर बाजार में संयम ही सफलता की कुंजी है। गिरावट से डरने के बजाय, अपनी निवेश रणनीति पर टिके रहें और अपने वित्तीय सलाहकार से राय जरूर लें।
Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। MoneysutraHub.in अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

