Rupee All-Time Low: डॉलर के आगे पस्त हुआ भारतीय रुपया, रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा; जानें इस भारी गिरावट के 3 बड़े कारण

MoneySutraHub Team

 Rupee hit all-time low: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 92.31 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक तनाव इसके मुख्य कारण हैं। पूरी वजह यहां जानें।

Rupee hit all-time low

नई दिल्लीः सोमवार, 9 मार्च को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.31 के ऑल-टाइम लो (All-Time Low) पर पहुंच गया। यह पिछले कुछ महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। रुपये में इस भारी कमजोरी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं: पहला, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता जियोपॉलिटिकल तनाव। दूसरा, इसके चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी, जो 117 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। और तीसरा, दुनिया भर के शेयर बाजारों में मची भारी बिकवाली (Risk-off mood)। माना जा रहा है कि गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बाजार में दखल दिया है। इसके अलावा महाराष्ट्र में 35,000 करोड़ रुपये की कर्ज माफी जैसे घरेलू कारणों पर भी बाजार की नजर है। अगर क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार रहता है, तो रुपया 93 के स्तर तक भी गिर सकता है।


अमेरिकी डॉलर के सामने भारतीय रुपया बुरी तरह टूट गया और अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (All-Time Low) पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में ही रुपये ने गोता लगाया और डॉलर के मुकाबले यह 92.31 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया।


इससे पहले शुक्रवार (6 मार्च) को रुपया 91.74 पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 92.20 पर खुला और देखते ही देखते 50 पैसे से ज्यादा टूट गया। महीनों बाद किसी एक दिन में रुपये में इतनी बड़ी गिरावट देखी गई है।


आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि भारतीय रुपया ताश के पत्तों की तरह बिखर गया? आइए इसके मुख्य कारण आसान भाषा में समझते हैं:


1. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आग


रुपये के गिरने की सबसे बड़ी वजह कच्चा तेल है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के हालात बने हुए हैं। होर्मुज स्ट्रेट (जहाँ से दुनिया का ज्यादातर तेल गुजरता है) पर सप्लाई रुकने का डर सता रहा है। इसी डर से बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 25% से ज्यादा उछलकर 117 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों (Importers) में से एक है। तेल महंगा होने से हमारा इंपोर्ट बिल बढ़ता है, जिससे सीधा दबाव रुपये पर पड़ता है।


2. ईरान में नया सुप्रीम लीडर और युद्ध का डर


जियोपॉलिटिकल टेंशन (भौगोलिक-राजनीतिक तनाव) और बढ़ गया है। ईरान में अली खामेनेई के बाद अब मोजतबा खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाया गया है। इससे यह साफ हो गया है कि ईरान की सत्ता में अभी भी कट्टरपंथी हावी हैं। ऐसे में अमेरिका और इजराइल के साथ लंबा युद्ध खिंचने की आशंका बढ़ गई है, जिससे ग्लोबल मार्केट डरा हुआ है।


3. दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी बिकवाली


युद्ध और महंगे तेल के डर से दुनिया भर के निवेशक अपना पैसा निकाल रहे हैं (इसे रिस्क-ऑफ मूड कहते हैं)। अमेरिकी शेयर बाजार (US Equity Futures) 2% से ज्यादा गिर गए। वहीं, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई बाजारों में 6.5% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। इस घबराहट के माहौल में निवेशकों ने 'सेफ हैवन' माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर में पैसा लगाना शुरू कर दिया, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और रुपया कमजोर।


RBI ने बाजार को संभालने की कोशिश की


रुपये को फ्री-फॉल (लगातार गिरने) से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को मैदान में उतरना पड़ा। करेंसी ट्रेडर्स के मुताबिक, घरेलू स्पॉट मार्केट खुलने से पहले ही RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचे। इसी वजह से रुपया कुछ देर के लिए 92.30 से 92.20 के स्तर पर संभलने में कामयाब रहा। अगर आगे भी उतार-चढ़ाव जारी रहा, तो RBI बाजार को शांत करने के लिए और दखल दे सकता है।


घरेलू कारणों पर भी बाजार की पैनी नजर


ग्लोबल टेंशन के अलावा देश के अंदर के घटनाक्रम भी रुपये पर असर डाल रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के लिए 2 लाख रुपये तक की कर्ज माफी का ऐलान किया है। इस योजना पर खजाने से लगभग 35,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस तरह के बड़े खर्चों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।


आगे क्या होगा?


बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक ग्लोबल टेंशन और कच्चे तेल की कीमतें कम नहीं होतीं, रुपये पर दबाव बना रहेगा। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स (Finrex Treasury Advisors) के एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर आने वाले दिनों में कच्चा तेल 100 डॉलर के ऊपर बना रहता है, तो भारतीय रुपया गिरकर 93 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को भी छू सकता है।


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(डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखी गई है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। अपना पैसा लगाने से पहले हमेशा किसी सर्टिफाइड फाइनेंसियल एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।)


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