Commercial LPG shortage: कमर्शियल LPG की भारी किल्लत से Swiggy, Zomato और QSR कंपनियों के शेयर बुरी तरह टूट गए हैं। रेस्टोरेंट्स बंद होने की कगार पर हैं। जानें क्या है सरकार का प्लान।
नई दिल्लीः शेयर बाजार में आज एक तरफ जहां पश्चिमी एशिया में युद्ध खत्म होने की उम्मीदों (अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संकेतों) से रौनक देखने को मिली, वहीं दूसरी तरफ फूड सर्विस सेक्टर में हाहाकार मच गया। कमर्शियल एलपीजी (LPG) गैस सिलिंडर की भारी किल्लत के कारण फूड डिलीवरी और रेस्टोरेंट चेन से जुड़े स्टॉक्स आज औंधे मुंह गिर गए।
अगर आपके पोर्टफोलियो में भी फूड सेक्टर से जुड़े शेयर हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और इसका असर किन कंपनियों पर पड़ रहा है।
इन बड़े स्टॉक्स को लगा तगड़ा झटका
कमर्शियल गैस की कमी की खबर जैसे ही बाजार में फैली, निवेशकों में घबराहट देखने को मिली। इसका सीधा असर इन प्रमुख शेयरों पर पड़ा:
- जुबिलैंट फूडवर्क्स (Jubilant FoodWorks)
- देवयानी इंटरनेशनल (Devyani International)
- जोमैटो (Zomato)
- स्विगी (Swiggy)
शेयरों में गिरावट की असली वजह क्या है?
दरअसल, देश के कई हिस्सों में कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई रुक गई है। बेंगलुरु होटल एसोसिएशन ने तो साफ चेतावनी दे दी है कि गैस न मिलने पर उन्हें होटल्स बंद करने पड़ेंगे। अगर रेस्टोरेंट और होटल ही बंद हो गए, तो स्विगी और जोमैटो जैसे फूड डिलीवरी ऐप्स को ऑर्डर कहां से मिलेंगे? ऑर्डर वॉल्यूम घटने के इसी डर से इन कंपनियों के शेयर टूट गए हैं।
ग्राउंड पर क्या हैं मौजूदा हालात?
दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और बेंगलुरु के रेस्टोरेंट एसोसिएशन इस किल्लत से बेहद परेशान हैं। कई जगहों पर छोटे-बड़े रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं। नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने चेतावनी दी है कि रेस्टोरेंट्स के पास अब सिर्फ 1 हफ्ते की गैस बची है। अगर सप्लाई जल्दी बहाल नहीं हुई, तो मेन्यू में कटौती करनी पड़ेगी या फिर रेस्टोरेंट्स को पूरी तरह ताला लगाना पड़ेगा। NRAI ने इस स्थिति को 'विनाशकारी बंदी' का नाम दिया है और पेट्रोलियम मंत्रालय से तुरंत मदद मांगी है।
आखिर क्यों पैदा हुई गैस की किल्लत?
इस पूरे बवाल की जड़ 5 मार्च को आया सरकार का एक आदेश है। सरकार ने तेल कंपनियों से कहा था कि वे 'घरेलू एलपीजी सप्लाई' को प्राथमिकता दें। इस आदेश की भाषा से डिस्ट्रीब्यूटर्स में कंफ्यूजन फैल गया और उन्होंने कमर्शियल गैस की डिलीवरी ही रोक दी। बेंगलुरु में तो 9 मार्च से ही कमर्शियल गैस की सप्लाई ठप है, जबकि पहले कंपनियों ने दावा किया था कि 70 दिनों तक गैस की कोई कमी नहीं होगी।
सरकार का क्या कहना है?
इस संकट के बीच सरकारी सूत्रों से कुछ राहत भरी खबरें भी आई हैं सरकार अमेरिका और कनाडा से एक्स्ट्रा एलपीजी मंगाने की कोशिश कर रही है। कमर्शियल गैस पर बैन लगाने का सरकार का कोई इरादा नहीं है, लेकिन आम जनता (घरेलू सप्लाई) को गैस देना उनकी पहली प्राथमिकता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने रेस्टोरेंट्स और ऑटो सेक्टर की जरूरतें समझने के लिए एक स्पेशल पैनल बनाया है, ताकि उन्हें जल्द से जल्द गैस पहुंचाई जा सके।
फिलहाल फूड सर्विस सेक्टर के लिए समय थोड़ा मुश्किल है। जब तक एलपीजी सप्लाई पूरी तरह से नॉर्मल नहीं हो जाती, तब तक स्विगी, जोमैटो और QSR कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों को इस सेक्टर में कोई भी नई पोजीशन बनाने से पहले सरकार के अगले कदम और गैस सप्लाई की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए।
(डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखी गई है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। अपना पैसा लगाने से पहले हमेशा किसी सर्टिफाइड फाइनेंसियल एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।)

