Explainer: ईरान-इजरायल युद्ध से एलपीजी सिलेंडर पर गहराया संकट, लेकिन पीएनजी पर क्यों नहीं पड़ रहा कोई असर? जानें पूरा गणित

MoneySutraHub Team

 Middle East War Impact: ईरान-इजरायल युद्ध से एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हुई है। लेकिन पीएनजी पर इसका कोई असर क्यों नहीं है? जानें भारत सरकार क्यों पीएनजी अपनाने पर जोर दे रही है।


                                    PNG vs LPG Gas Supply Middle east war impact india

नई दिल्ली, 28 मार्चः मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव और युद्ध के हालातों ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सबसे बड़ा असर एलपीजी (LPG) गैस की सप्लाई पर पड़ा है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से होने वाला व्यापार बाधित हुआ है। भारत अपनी जरूरत का 60 फीसदी एलपीजी आयात करता है। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों की कमी देखी जा रही है। ऐसे में भारत सरकार आम जनता से पीएनजी (PNG) यानी पाइप्ड नेचुरल गैस पर शिफ्ट होने की अपील कर रही है। आखिर पीएनजी क्या है, यह कहां से आती है और युद्ध जैसे हालातों में भी इसकी सप्लाई क्यों नहीं रुकती? इस विस्तृत लेख में हम पीएनजी और एलपीजी के बीच का अंतर, भारत में गैस उत्पादन के आंकड़े और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा पर गहराई से चर्चा करेंगे।


वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) में जब भी कोई हलचल होती है, तो उसका सीधा असर आम आदमी की रसोई तक पहुंचता है। इन दिनों मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सप्लाई की चेन पूरी तरह से चरमरा गई है। तेल और गैस के विशाल भंडारों से भरे गल्फ क्षेत्र में मिसाइलों और ड्रोन के हमलों ने तबाही मचा दी है। इसका खामियाजा भारत समेत दुनिया के कई देशों को भुगतना पड़ रहा है।


वर्तमान में दुनिया दशकों के सबसे बड़े फ्यूल क्राइसिस (ईंधन संकट) का सामना कर रही है। इस संकट का सबसे बड़ा शिकार बना है आपका एलपीजी (LPG) सिलेंडर। कई शहरों में एलपीजी सिलेंडरों के लिए लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गई हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार लगातार लोगों को पीएनजी (PNG - Piped Natural Gas) कनेक्शन के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सरकार की अपील है कि जिन घरों तक पीएनजी की पाइपलाइन पहुंच चुकी है, वे लोग अपना एलपीजी सिलेंडर सरेंडर कर दें और पीएनजी पर शिफ्ट हो जाएं। लेकिन आम आदमी के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि जब युद्ध के कारण एलपीजी नहीं आ पा रही है, तो पीएनजी पर इसका असर क्यों नहीं पड़ रहा? आइए इस पूरे विषय को विस्तार से समझते हैं।


आखिर क्यों प्रभावित हो रही है एलपीजी सप्लाई?


एलपीजी की सप्लाई रुकने या प्रभावित होने के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट का तनाव और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) का बंद होना है।


एलपीजी क्या है? एलपीजी मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का एक मिश्रण है। इसे क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) को रिफाइन करके निकाला जाता है और भारी दबाव (Pressure) के तहत सिलेंडरों में तरल (Liquid) रूप में भरकर घरों तक पहुंचाया जाता है।


आयात पर निर्भरता: भारत में एलपीजी का उत्पादन मांग के मुकाबले काफी कम है। भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का लगभग 60 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात करता है।


होर्मुज स्ट्रेट का पेंच: इस 60 फीसदी आयातित एलपीजी का करीब 90 फीसदी हिस्सा मिडिल ईस्ट से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रास्ते भारत आता है।


ईरान ने इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग बंद कर रखा है। वहां से बहुत ही गिने-चुने और कड़ी सुरक्षा वाले कमर्शियल टैंकर ही गुजर पा रहे हैं। इसके लिए भी तेल और गैस कंपनियों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। सप्लाई चेन टूटने और जहाजों के आवागमन में देरी के कारण ही भारत के कई शहरों में एलपीजी की किल्लत देखने को मिल रही है।


Current Update: क्या है पीएनजी और यह कैसे काम करती है?


पीएनजी (PNG) का पूरा नाम पाइपलाइन गैस या पाइप्ड नैचुरल गैस है। यह मुख्य रूप से नैचुरल गैस (जिसमें सबसे अधिक मात्रा मीथेन की होती है) है।


सप्लाई का तरीका: एलपीजी की तरह इसे सिलेंडरों में भरने की जरूरत नहीं होती। इसे जमीन के नीचे बिछी अंडरग्राउंड पाइपलाइनों के नेटवर्क के जरिए सीधे रसोई तक पहुंचाया जाता है।


उत्पादन: भारत में पीएनजी को गैस वाले क्षेत्रों (Gas Fields) से प्राकृतिक ढंग से जमीन या समुद्र के नीचे से निकाला जाता है।


निरंतर फ्लो: पीएनजी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पाइप में लगातार फ्लो (प्रवाह) में रहती है। इसे बार-बार रिफिल कराने की कोई झंझट नहीं होती। इसे सिटी गैस नेटवर्क (CGD) के माध्यम से लो प्रेशर में सुरक्षित रूप से सप्लाई किया जाता है।


पीएनजी सप्लाई पर युद्ध का असर क्यों नहीं?


अब आते हैं उस मुख्य सवाल पर कि युद्ध के इस भयानक माहौल में भी पीएनजी की सप्लाई क्यों नहीं रुक रही है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:


वितरण का सुरक्षित नेटवर्क: पीएनजी एक फिक्स्ड अंडरग्राउंड पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए सप्लाई होती है। एक बार जब गैस गैस ग्रिड में आ जाती है, तो वह बिना किसी बाहरी बाधा के सीधे आपके घर तक पहुंचती है। इसमें जहाजों या सिलेंडरों की लोडिंग-अनलोडिंग का झंझट नहीं होता।


घरेलू उत्पादन की ताकत: एलपीजी के उलट, पीएनजी के मामले में भारत अपने घरेलू उत्पादन पर भी काफी हद तक निर्भर है। इसलिए अगर वैश्विक स्तर पर कोई डिस्टर्बेंस होता भी है, तो देश के भीतर पैदा होने वाली गैस पाइपलाइनों के जरिए बिना रुके घरों का चूल्हा जलाती रहती है।3


Important Data: पीएनजी आती कहां से है?


पीएनजी के सोर्स को हम दो हिस्सों में बांट सकते हैं: घरेलू उत्पादन और आयात।


1. घरेलू उत्पादन (Domestic Production)


भारत में इस्तेमाल होने वाली पीएनजी का एक बड़ा हिस्सा देश के भीतर से ही आता है।


कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन: भारत के पूर्वी तट पर गहरे पानी में स्थित केजी बेसिन पीएनजी का सबसे बड़ा उत्पादक है। केजी बेसिन में मुख्य रूप से तीन क्षेत्र हैं- आर क्लस्टर, सैटेलाइट क्लस्टर और एमजे। साल 2024 में भारत में कुल 36 बीसीएम (Billion Cubic Meters) पीएनजी का उत्पादन हुआ, जिसमें से 25 फीसदी हिस्सा अकेले केजी बेसिन का था। अनुमान है कि अपने पूरे जीवनकाल में यहां से 85 बीसीएम गैस निकाली जाएगी।

पूर्वोत्तर भारत: असम और त्रिपुरा के गैस रिजर्व (बेसिन) भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारत के कुल घरेलू उत्पादन की 47 फीसदी पीएनजी इन्हीं क्षेत्रों से आती है।


2. आयातित प्राकृतिक गैस (LNG)


जो गैस पाइपलाइनों के जरिए नहीं आ सकती, उसे शून्य से नीचे के तापमान पर ठंडा करके लिक्विड (तरल) में बदला जाता है, जिसे लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) कहते हैं।


  • भारत अपनी प्राकृतिक गैस की मांग का लगभग 50 फीसदी आयात करता है (जो मुख्य रूप से एलएनजी के रूप में होता है)।

  • भारत हर साल लगभग 25 से 26 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी आयात करता है।

  • एस एंड पी ग्लोबल (S&P Global) की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में भारत का एलएनजी आयात लगभग 25.5 मिलियन टन रहा है।

  • भारत सबसे ज्यादा एलएनजी कतर (Qatar) से खरीदता है। वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, कुल आयात का 41 फीसदी हिस्सा कतर से आया है।

  • इसके अलावा अमेरिका (USA) से 19 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया से भी भारत को एलएनजी की सप्लाई होती है।




Market / Public Reaction: उपभोक्ता आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर


पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आधिकारिक सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में एलपीजी और पीएनजी उपभोक्ताओं की संख्या में बड़ा अंतर है:


एलपीजी उपभोक्ता: भारत में वर्तमान में 332 मिलियन (33 करोड़ 20 लाख) से अधिक एलपीजी उपभोक्ता हैं। साल 2014 में यह आंकड़ा 140 मिलियन था। इसमें से 105.6 मिलियन उपभोक्ता बीपीएल (BPL) परिवार से हैं, जिन्हें पीएम उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाला कनेक्शन मिला है।


पीएनजी उपभोक्ता: इसके विपरीत, देश में घरेलू पीएनजी कनेक्शनों की संख्या अभी केवल 16.2 मिलियन (1 करोड़ 62 लाख) ही है।


यही कारण है कि जब एलपीजी की सप्लाई चेन में थोड़ी सी भी रुकावट आती है, तो देश की एक बहुत बड़ी आबादी (332 मिलियन उपभोक्ता) प्रभावित होती है और बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है।


Expert Analysis: पीएनजी क्यों है भविष्य की जरूरत?


ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी एनर्जी सिक्योरिटी (ऊर्जा सुरक्षा) सुनिश्चित करने के लिए तेजी से गैस आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना होगा।


आर्थिक बचाव: एलपीजी की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार के क्रूड ऑयल के दामों के हिसाब से भारी उतार-चढ़ाव आता है। जबकि पीएनजी की कीमतें अपेक्षाकृत अधिक स्थिर रहती हैं।


सुविधा और सुरक्षा: पीएनजी एलपीजी की तुलना में हवा से हल्की होती है। लीकेज होने पर यह हवा में उड़ जाती है, जबकि एलपीजी भारी होने के कारण फर्श पर बैठ जाती है जिससे आग लगने का खतरा ज्यादा होता है।


लॉजिस्टिक कॉस्ट: एलपीजी सिलेंडरों को ट्रकों में भरकर एक शहर से दूसरे शहर और फिर गली-गली पहुंचाना पड़ता है। पीएनजी में यह परिवहन लागत (Transportation Cost) शून्य हो जाती है।


भविष्य की क्या हैं संभावनाएं?


एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि भविष्य में भारत की गैस की मांग तेजी से बढ़ेगी। साल दर साल एलएनजी आयात का ग्राफ ऊपर जा रहा है। आने वाले कुछ वर्षों में भारत का एलएनजी आयात 28 से 29 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है। सरकार 'वन नेशन वन गैस ग्रिड' (One Nation One Gas Grid) के तहत पूरे देश में पाइपलाइन बिछाने का काम युद्ध स्तर पर कर रही है। जैसे-जैसे यह नेटवर्क फैलेगा, भारत की विदेशी क्रूड ऑयल और एलपीजी पर निर्भरता कम होती जाएगी, जिससे मिडिल ईस्ट जैसे संकटों का असर भारतीय रसोई पर न के बराबर पड़ेगा।


यह स्पष्ट है कि ईरान-इजरायल युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से एलपीजी सप्लाई पर जो संकट आया है, वह भारत के लिए एक बड़ा सबक है। क्रूड ऑयल और उससे बनने वाले उत्पादों (जैसे एलपीजी) के लिए दूसरे देशों के जहाजों पर निर्भर रहना किसी भी समय बड़े संकट को जन्म दे सकता है। ऐसे में पीएनजी (पाइप्ड नैचुरल गैस) एक सुरक्षित, निरंतर और किफायती विकल्प बनकर उभरती है। इसका घरेलू उत्पादन और पाइपलाइन वितरण इसे वैश्विक झटकों से महफूज रखता है। इसलिए, सरकार की यह अपील बिल्कुल वाजिब है कि यदि आपके क्षेत्र में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है, तो बिना देर किए एलपीजी सिलेंडर छोड़कर पीएनजी कनेक्शन अपना लेना चाहिए। इससे न केवल आपकी रसोई का चूल्हा बिना रुकावट जलेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।


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