अडानी ग्रुप ने भारतीय सेना को सौंपी 2000 प्रहर लाइट मशीन गन, तय समय से 11 महीने पहले डिलीवरी कर रचा इतिहास

MoneySutraHub Team

 Adani Group Defense: अडानी ग्रुप ने भारतीय सेना को 2000 प्रहर लाइट मशीन गन सौंप दी हैं। यह डिलीवरी तय समय से 11 महीने पहले हुई है। जानें इस मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट की अहम बातें।


source- Press Trust of India

मुंबई, 28 मार्चः भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और मेक इन इंडिया पहल को एक बड़ी सफलता मिली है। अडानी ग्रुप की डिफेंस कंपनी अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारतीय सेना को 2000 प्रहर लाइट मशीन गन (LMG) सौंप दी हैं। सबसे खास बात यह है कि कंपनी ने यह डिलीवरी तय समय सीमा से 11 महीने पहले ही पूरी कर ली है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित कंपनी के अत्याधुनिक प्लांट में इन 7.62mm क्षमता वाली स्वदेशी मशीन गनों का निर्माण किया गया है। रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक (अधिग्रहण) ए अंबरासु ने हरी झंडी दिखाकर इन हथियारों के पहले जत्थे को रवाना किया। सेना ने अडानी ग्रुप को कुल 40000 लाइट मशीन गन बनाने का ऑर्डर दिया है, जिसे अगले 3 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।


भारतीय सेना की ताकत को और अधिक बढ़ाने और देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। भारत के प्रमुख कारोबारी समूह अडानी ग्रुप (Adani Group) की डिफेंस कंपनी के लिए शनिवार का दिन बेहद ऐतिहासिक रहा। कंपनी ने भारतीय सेना को 2000 प्रहर (Prahar) लाइट मशीन गन (LMG) की पहली खेप सौंप दी है। सबसे चौंकाने वाली और सकारात्मक बात यह रही कि अडानी ग्रुप ने इस बड़े ऑर्डर की डिलीवरी तय समय से 11 महीने पहले ही कर दी है। रक्षा क्षेत्र में, जहां अक्सर प्रोजेक्ट्स सालों लेट हो जाते हैं, वहां समय से पहले हथियारों की डिलीवरी होना भारतीय डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के बदलते दौर का सबसे बड़ा प्रमाण है।


मेक इन इंडिया को मिला बड़ा बूस्ट


मौजूदा केंद्र सरकार पिछले कई सालों से मेक इन इंडिया (Make in India) और आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) अभियान पर विशेष जोर दे रही है। सरकार का स्पष्ट विजन है कि भारत रक्षा उपकरणों और हथियारों के लिए दूसरे देशों पर अपनी निर्भरता कम करे और घरेलू स्तर पर ही इनका उत्पादन करे। अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस (Adani Defence and Aerospace) द्वारा सेना को सौंपे गए ये स्वदेशी हथियार इसी विजन का एक सफल परिणाम हैं। जब देश की निजी कंपनियां सेना के लिए अत्याधुनिक हथियार बनाने लगती हैं, तो इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होती है, बल्कि आपातकालीन स्थिति में हथियारों की सप्लाई चेन भी बाधित नहीं होती है।


ग्वालियर के अत्याधुनिक प्लांट में तैयार हुई प्रहर गन


इन खतरनाक और अत्याधुनिक लाइट मशीन गन का निर्माण मध्य प्रदेश के ग्वालियर के पास स्थित अडानी डिफेंस के कॉम्प्लेक्स में किया गया है।


हथियार की खासियत: यह एक 7.62mm कैलिबर की लाइट मशीन गन है। इसका नाम प्रहर रखा गया है। यह गन युद्ध के मैदान में सैनिकों को भारी फायरपावर देने में सक्षम है।


हैंडओवर कार्यक्रम: शनिवार को ग्वालियर के इसी मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


मुख्य अतिथि: इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक (अधिग्रहण) ए अंबरासु मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनके साथ अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी और सेना व कंपनी के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।


कार्यक्रम के अंत में ए अंबरासु ने इन 2000 लाइट मशीन गन से लदे ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर सेना के बेस के लिए रवाना किया।


तय समय से 11 महीने पहले हुई डिलीवरी: एक नया कीर्तिमान


रक्षा सौदों के इतिहास में अक्सर देरी की खबरें आम होती हैं, लेकिन अडानी ग्रुप ने एक नया बेंचमार्क सेट किया है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी ने इस प्रोजेक्ट के सफर के बारे में विस्तार से बताया।


उन्होंने कहा, आज हम जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, उसकी यात्रा 6 साल पहले शुरू हुई थी। टेंडर की बोली लगाने से लेकर डिजाइनिंग, टेस्टिंग और अंततः डिलीवरी तक पहुंचने में इतना लंबा समय लगा। लेकिन हमें यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि हमने सेना को तय समय से 11 महीने पहले ही यह डिलीवरी कर दी है।


समय से पहले डिलीवरी का मतलब है कि भारतीय सेना के जवानों को जल्द ही उनके हाथों में नए और आधुनिक हथियार मिल जाएंगे, जिससे बॉर्डर पर उनकी मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।


कुल 40000 लाइट मशीन गन (LMG) का है बड़ा ऑर्डर


यह 2000 गन की डिलीवरी केवल एक शुरुआत है। भारतीय सेना ने अपनी इन्फैंट्री (पैदल सेना) को आधुनिक बनाने के लिए अडानी ग्रुप को कुल 40000 प्रहर लाइट मशीन गन बनाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया है।


सीईओ आशीष राजवंशी ने भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया, ग्राहक (भारतीय सेना) की तरफ से हमें इस पूरे प्रोजेक्ट को खत्म करने के लिए 7 साल का समय दिया गया था। लेकिन जिस गति से हमारी टीम काम कर रही है, मैं देश और सेना को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम अगले 3 साल के भीतर ही पूरा ऑर्डर (40000 गन) डिलीवर कर देंगे।


मुख्य तथ्य (Important Data & Highlights): एक नजर में


  • हथियार का नाम: प्रहर (Prahar) लाइट मशीन गन (LMG)
  • कैलिबर: 7.62mm (बेहतर रेंज और घातक मारक क्षमता के लिए)
  • कुल ऑर्डर: 40000 मशीन गन
  • पहली डिलीवरी: 2000 गन
  • डिलीवरी का रिकॉर्ड: तय समय सीमा से 11 महीने पहले।
  • निर्माण स्थल: ग्वालियर (मध्य प्रदेश), अडानी डिफेंस कॉम्प्लेक्स।
  • प्रोजेक्ट की कुल अवधि: सेना द्वारा 7 साल का समय दिया गया था, लेकिन कंपनी इसे अगले 3 साल में पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
  • निर्माता कंपनी: अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस।


भारतीय सेना पर इसका प्रभाव  


भारतीय सेना लंबे समय से अपनी पुरानी मशीन गनों को बदलने की प्रक्रिया में है। 7.62mm की ये नई प्रहर LMG फ्रंटलाइन पर तैनात सैनिकों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।


फायरपावर में इजाफा: 7.62mm की गोलियां दुश्मन के बंकरों और हल्के वाहनों को आसानी से भेद सकती हैं।


विश्वसनीयता: स्वदेशी होने के कारण इसके स्पेयर पार्ट्स और सर्विसिंग के लिए सेना को विदेशी कंपनियों का मुंह नहीं ताकना पड़ेगा।


सैनिकों का मनोबल: जब सैनिकों को समय पर आधुनिक और बेहतरीन क्वालिटी के हथियार मिलते हैं, तो युद्ध के मैदान में उनका आत्मविश्वास चरम पर होता है।


विशेषज्ञों का विश्लेषण 


रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि भारत के प्राइवेट सेक्टर का डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में इस तरह मजबूती से उतरना एक शानदार कदम है। पहले भारत अपनी रक्षा जरूरतों का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आयात करता था। रूस, इजरायल या अमेरिका से हथियार आने में सालों लग जाते थे।


लेकिन अब अडानी, टाटा और एलएंडटी (L&T) जैसी भारतीय कंपनियां ग्लोबल स्टैंडर्ड के हथियार देश में ही बना रही हैं। अडानी डिफेंस द्वारा 11 महीने पहले डिलीवरी करना यह साबित करता है कि भारतीय प्राइवेट सेक्टर के पास तकनीक, संसाधन और इच्छाशक्ति तीनों हैं। यह कदम ग्लोबल मार्केट में भी भारत की छवि एक हथियार आयातक से बदलकर हथियार निर्यातक देश के रूप में स्थापित करेगा।


भविष्य की संभावनाएं  


इस प्रोजेक्ट की सफलता अडानी ग्रुप के लिए रक्षा क्षेत्र में नए दरवाजे खोलेगी। न केवल छोटे हथियार (Small Arms), बल्कि ड्रोन (UAV), मिसाइल सिस्टम और एयरोस्पेस तकनीक में भी कंपनी भारी निवेश कर रही है। अगर 40000 गन की डिलीवरी अगले 3 साल में सफलतापूर्वक पूरी हो जाती है, तो पूरी संभावना है कि मित्र देशों (अफ्रीकी और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों) से भी भारत को इन हथियारों के निर्यात (Export) के ऑर्डर मिल सकते हैं। इसके अलावा ग्वालियर और उसके आसपास के इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और एक पूरा डिफेंस इकोसिस्टम विकसित होगा।


अडानी डिफेंस द्वारा भारतीय सेना को 2000 प्रहर लाइट मशीन गन का समय से 11 महीने पहले सौंपा जाना नए भारत की काम करने की गति को दर्शाता है। यह सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की उस सोच की जीत है जहां देश की सुरक्षा देश के ही कारखानों में तय की जा रही है। सेना के आधुनिकीकरण और देश की संप्रभुता को मजबूत करने के लिए ऐसे कदम निरंतर उठाए जाने चाहिए। एक मजबूत सेना और एक सक्षम स्वदेशी रक्षा उद्योग ही भविष्य में भारत को एक वैश्विक महाशक्ति बनाएगा।


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