शेयर बाजार में ब्लडबाथ और क्रैश का सच: क्या डरावनी हेडलाइन्स आपको कर रही हैं कंगाल? जानें SIP की सही स्ट्रैटेजी

MoneySutraHub Team

 Mutual Fund SIP: शेयर बाजार में ब्लडबाथ और क्रैश का सच: क्या डरावनी हेडलाइन्स आपको कर रही हैं कंगाल? जानें SIP की सही स्ट्रैटेजी


Mutual Fund SIP Investment Strategy

नई दिल्ली, 28 मार्चः क्या आपने भी आज सुबह अपना मोबाइल उठाया और शेयर बाजार से जुड़ी कोई ऐसी खबर पढ़ी जिसने आपकी धड़कनें तेज कर दीं? आजकल जब भी आप किसी फाइनेंशियल न्यूज़ वेबसाइट या ऐप पर जाते हैं, तो आपको "ब्लडबाथ" (Bloodbath), "क्रैश" (Crash), या "वाइपआउट" (Wipeout) जैसे भारी-भरकम और डरावने शब्द लिखे हुए मिलते हैं।


ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और जंग के हालात ने दुनिया भर के शेयर बाजारों में अस्थिरता ला दी है। बाजार रोज़ हिचकोले खा रहा है। लेकिन इस पूरे माहौल में एक आम निवेशक के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि— क्या सच में बाजार खत्म होने वाला है, या फिर न्यूज़ की ये सनसनीखेज हेडलाइन्स सिर्फ आपको गुमराह कर रही हैं?


हाल ही में व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड (WhiteOak Capital Mutual Fund) ने एक बेहद शानदार रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट ने एक ऐसी सच्चाई से पर्दा उठाया है, जिसे हर निवेशक को जानना चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक, शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के दौर में आपका सबसे बड़ा दुश्मन खुद बाजार नहीं है, बल्कि खबरों की डरावनी भाषा है। ये हेडलाइन्स आपके अंदर डर पैदा करती हैं, ताकि आप जल्दबाजी में अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई को लेकर गलत फैसले कर बैठें। समझदारी इसी में है कि इस शोर से दूर रहें और अपनी SIP (Systematic Investment Plan) जैसी सॉलिड स्ट्रैटेजी को चुपचाप जारी रखें।


आइए विस्तार से समझते हैं कि यह पूरा खेल कैसे काम करता है और आपको अपने पैसों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करना चाहिए।


हेडलाइन्स का मायाजाल: आपको कैसे गुमराह करती हैं खबरें?


जब बाजार में गिरावट आती है, तो मीडिया का काम उसे रिपोर्ट करना होता है। लेकिन क्लिक्स (Clicks) और व्यूज (Views) बटोरने के चक्कर में अक्सर खबरों को बहुत ज्यादा नाटकीय बना दिया जाता है। व्हाइटओक कैपिटल की रिपोर्ट बताती है कि मीडिया मुख्य रूप से 3 तरीकों से निवेशकों के दिमाग से खेलती है:



1. बड़े नंबरों का डर


कल्पना कीजिए, आपने एक खबर पढ़ी "सेंसेक्स में 1800 अंकों की भारी गिरावट, निवेशकों में हाहाकार!" 1800 का यह नंबर सुनकर किसी भी नए निवेशक के पसीने छूट सकते हैं। लेकिन अगर आप इसके पीछे का गणित समझेंगे, तो आपको हंसी आएगी।


मान लीजिए कि सेंसेक्स 74000 अंकों के स्तर पर है। ऐसे में अगर 1800 अंकों की गिरावट आती है, तो प्रतिशत (Percentage) के हिसाब से यह सिर्फ 2.4% की गिरावट है।


बाजार के जानकारों के अनुसार, किसी भी सामान्य दिन में शेयर बाजार का 1% से 3% तक ऊपर-नीचे होना बिल्कुल नॉर्मल बात है। इसे बाजार का रूटीन माना जाता है। लेकिन मीडिया कभी नहीं लिखेगा कि "बाजार में सिर्फ 2.4% का सामान्य बदलाव हुआ," क्योंकि इससे कोई पैनिक नहीं फैलेगा और लोग खबर पर क्लिक नहीं करेंगे। इसलिए, हमेशा पॉइंट्स (Points) के बजाय प्रतिशत (%) पर ध्यान दें।


2. ‘वाइपआउट’ (Wipeout) और करोड़ों के नुकसान का भ्रम


जब भी बाजार गिरता है, तो टीवी और मोबाइल स्क्रीन पर फ्लैश होता है "शेयर बाजार में निवेशकों के 11 लाख करोड़ रुपये स्वाहा!" यह सुनकर ऐसा लगता है जैसे किसी के बैंक खाते से पैसे चोरी हो गए हों या किसी की फैक्ट्री में आग लग गई हो। लेकिन सच्चाई कुछ और है।


यह जो नुकसान टीवी पर दिखाया जाता है, वह सिर्फ कागजी नुकसान (Unrealized Loss) होता है। कंपनियों का मार्केट कैप कुछ समय के लिए स्क्रीन पर कम हो जाता है। असल में कोई कंपनी बंद नहीं हुई है, न ही उनके प्रोडक्ट बिकने बंद हुए हैं और न ही आपका डिविडेंड रुका है।


शेयर बाजार का एक सीधा सा नियम है जब तक आप डर कर अपने शेयर या म्यूचुअल फंड को नुकसान में बेच नहीं देते, तब तक आपको एक रुपये का भी असली नुकसान नहीं हुआ है। यह सिर्फ एक आंकड़ा है, आपकी जिंदगी की अंतिम सच्चाई नहीं।


3. दिमागी खेल और डरावनी भाषा का इस्तेमाल


आपने कभी सोचा है कि फाइनेंशियल खबरों में अक्सर युद्ध के मैदान वाले शब्दों का इस्तेमाल क्यों होता है? "ब्लडबाथ" (खून-खराबा) या "तबाही" जैसे शब्द जानबूझकर चुने जाते हैं।


मानव मनोविज्ञान (Human Psychology) कहता है कि जब हम ऐसे शब्द पढ़ते हैं, तो हमारा दिमाग खतरे का अलार्म बजा देता है। इसे विज्ञान में फाइट या फ्लाइट (Fight or Flight) रिस्पॉन्स कहते हैं। ऐसे समय में इंसान का तार्किक (Logical) दिमाग काम करना बंद कर देता है और वह भावनाओं में बहकर फैसले लेने लगता है। इसी डर में आकर लोग एसेट एलोकेशन (Asset Allocation) जैसे समझदारी वाले काम भूल जाते हैं और अपनी सालों पुरानी SIP बंद कर देते हैं।


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समझदार निवेशकों को क्या करना चाहिए? 


अगर आप बाजार में लंबे समय तक टिकना चाहते हैं और अच्छी वेल्थ (Wealth) बनाना चाहते हैं, तो इन 4 बातों को गांठ बांध लें:


1. लाइव टिकर नहीं, अपना एसेट एलोकेशन चेक करें


बाजार गिरते ही बार-बार अपना पोर्टफोलियो या मनी-कंट्रोल जैसे ऐप खोलने की आदत छोड़ दें। लाल रंग के निशान देखकर आपको सिर्फ स्ट्रेस होगा। इसके बजाय, यह देखें कि क्या आपके निवेश का एसेट एलोकेशन (इक्विटी और डेट का बैलेंस) आपके वित्तीय लक्ष्यों (Financial Goals) के हिसाब से सही है? अगर सब कुछ आपकी पुरानी प्लानिंग के हिसाब से चल रहा है, तो इस वक्त कुछ न करना (Doing Nothing) ही सबसे बेहतरीन निवेश रणनीति है।


2. भूलकर भी SIP न रोकें


गिरावट के समय SIP बंद करना सबसे बड़ी बेवकूफी है। रिपोर्ट का शानदार उदाहरण याद रखें "गिरावट में SIP रोकना बिल्कुल वैसा है, जैसे तेज बारिश शुरू होते ही अपना छाता बंद कर लेना।"


जब बाजार गिरता है और NAV (Net Asset Value) सस्ती होती है, तो आपकी उसी तय SIP रकम से आपको म्यूचुअल फंड की ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। यानी बाजार की गिरावट आपके लिए सेल (Sale) का काम करती है। आज खरीदी गई ये सस्ती यूनिट्स भविष्य में आपको तगड़ा रिटर्न देंगी।


3. न्यूज़ और मीडिया की "डूमस्क्रॉलिंग" (Doomscrolling) बंद करें


आजकल लोग सोशल मीडिया पर लगातार बुरी खबरें स्क्रॉल करते रहते हैं, जिसे डूमस्क्रॉलिंग कहा जाता है। अपने लिए एक नियम बनाएं— बाजार को दिन में सिर्फ एक बार देखें, वह भी शाम को बाजार बंद (Closing) होने के बाद। ट्रेडिंग के दौरान हर 10 मिनट में बाजार का हाल देखने से कुछ नहीं बदलेगा, बस आपका ब्लड प्रेशर ही ऊपर-नीचे होगा।


4. व्हाट्सएप ग्रुप्स से बचें और सलाहकार (Advisor) की सुनें


बाजार गिरते ही व्हाट्सएप (WhatsApp) ग्रुप्स पर ज्ञान देने वालों की बाढ़ आ जाती है। कोई कहता है सब बेच दो, कोई कहता है एफडी (FD) कर लो। इन सब बातों में न आएं। घबराहट के इस माहौल में हमेशा अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर (Financial Advisor) से बात करें। उसे आपकी उम्र, आपके लक्ष्य और आपके रिस्क लेने की क्षमता का पता है।


व्हाइटओक कैपिटल की रिपोर्ट एक बहुत बड़ी सीख देती है फाइनेंशियल मीडिया का काम है खबरें बेचना और डर हमेशा अच्छे से बिकता है। हेडलाइन्स कल भी डरावनी थीं, आज भी हैं और 2030 में भी डरावनी ही रहेंगी। इतिहास गवाह है कि बाजार में हर करेक्शन (Correction) या गिरावट के बाद बाजार ने जोरदार वापसी (Bounce Back) की है।


हेडलाइन्स आपसे जल्दबाजी करवाना चाहती हैं, लेकिन शेयर बाजार में पैसा सिर्फ उसी का बनता है जिसके पोर्टफोलियो में धैर्य (Patience) होता है। इसलिए, शोरगुल से दूर रहें, अपनी SIP को चलने दें और अपने पैसों को शांति से काम करने दें।


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Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। MoneysutraHub.in अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

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