Middle East crisis: मिडल ईस्ट में ईरान-इजरायल युद्ध के कारण क्या भारत में पेट्रोल-डीजल खत्म हो जाएगा? जानें सरकार का 'प्लान बी', तेल का रिज़र्व और आम जनता की जेब पर इसका असर।

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नई दिल्लीः मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में लगातार भड़क रहे युद्ध ने पूरी दुनिया के बाजारों की टेंशन बढ़ा दी है। आम लोगों के मन में भी एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे इस भारी टकराव के कारण क्या भारत में पेट्रोल और डीजल की किल्लत हो जाएगी? यह चिंता इसलिए भी जायज़ है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से ही खरीदता है।
लेकिन आपको घबराने की जरूरत नहीं है। भारत सरकार ने देश में ऊर्जा की कोई कमी न हो, इसके लिए अपना 'प्लान-बी' पूरी तरह से एक्टिव कर दिया है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सरकार इस वक्त क्या कदम उठा रही है और देश में तेल का कितना स्टॉक बचा है।
खाड़ी देशों से दूरी, अमेरिका-रूस से दोस्ती
ईरान और ओमान के बीच एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जिसे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) कहते हैं। दुनिया भर का बहुत सारा तेल इसी रास्ते से होकर जाता है। इस साल फरवरी की बात करें तो भारत का आधा तेल यहीं से आया था। लेकिन अब हमलों के डर से इस रास्ते पर तेल के जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है।
इसे देखते हुए भारतीय रिफाइनरियों ने अपना तरीका बदल लिया है। अब वे खाड़ी देशों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अमेरिका, रूस और पश्चिमी अफ्रीका से कच्चा तेल मंगाने पर फोकस कर रही हैं। सरकार ने विवाद वाले इलाकों से तेल मंगाना कम कर दिया है। सुरक्षित जगहों से पहले 60 प्रतिशत तेल आता था, जिसे अब बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया है।
रूस से कच्चा तेल मंगाने पर मिली बड़ी राहत
इस मुश्किल समय में अमेरिका ने भारत को एक बड़ी राहत दी है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक विशेष छूट (वेवर) दी है, जो 5 अप्रैल तक लागू रहेगी। इसके तहत 5 मार्च या उससे पहले लोड हुए रूसी जहाजों को भारत में तेल उतारने की परमिशन मिल गई है।
इस छूट के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries), एचपीसीएल (HPCL) और मित्तल एनर्जी जैसी बड़ी कंपनियां वापस रूसी तेल खरीदने लगी हैं। अभी भारतीय समुद्री तटों के पास लगभग 15 मिलियन बैरल रूसी तेल जहाजों में मौजूद है। साल 2023 से 2025 के बीच रूस से तेल का आयात 1.8 मिलियन बैरल हर दिन था। हालांकि, फरवरी में यह गिरकर 1.04 मिलियन बैरल रह गया था, लेकिन अब इसमें फिर से उछाल आने की पूरी उम्मीद है।
क्या हमारे पास काफी पेट्रोल-डीजल बचा है?
अगर युद्ध लंबा चलता है, तो क्या होगा? इस पर पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़े काफी सुकून देने वाले हैं। भारत के पास इस समय अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए करीब 74 दिनों का बैकअप मौजूद है। इसमें से 30 दिनों का स्टॉक तटीय स्टोरेज में है। सरकार के रणनीतिक रिज़र्व (SPR) में 9.5 दिनों का तेल सुरक्षित है। इसके अलावा, तेल कंपनियों के पास 64.5 दिनों का अलग स्टॉक जमा है। सरकार का साफ कहना है कि अगर बाहर से तेल आना पूरी तरह बंद भी हो जाए, तब भी हम 50 दिनों तक पूरे देश की मांग आराम से पूरी कर सकते हैं। इसके अलावा, तेल कंपनियों ने अपनी मशीनों के मेंटेनेंस का काम भी टाल दिया है, ताकि पेट्रोल-डीजल बनाने का काम बिना रुके तेजी से चलता रहे।
महंगाई बढ़ा सकता है यह युद्ध
भले ही देश में पेट्रोल-डीजल खत्म नहीं होगा, लेकिन इसके दाम आपकी जेब पर असर जरूर डाल सकते हैं। 28 फरवरी को कच्चे तेल का दाम 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब बढ़कर 92 डॉलर के पार पहुंच गया है। एलएनजी (LNG) की कीमतें भी डबल होकर 24 से 25 डॉलर प्रति यूनिट हो गई हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और रूस से तेल मंगाना सुरक्षित तो है, लेकिन रास्ता लंबा होने के कारण माल ढुलाई का खर्च बढ़ जाता है। युद्ध की वजह से जहाजों का बीमा (Insurance) भी काफी महंगा हो गया है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कच्चे तेल के दाम में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से हमारे देश की महंगाई दर 20 से 25 बेसिस पॉइंट तक बढ़ सकती है। इसका सीधा नुकसान रुपये की कीमत पर भी पड़ेगा।
कुल मिलाकर बात यह है की भारत में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं होने वाली है। सरकार ने अपनी तैयारी पूरी रखी है, लेकिन ग्लोबल मार्केट में बढ़ रही कीमतों के कारण आने वाले समय में महंगाई का थोड़ा सामना करना पड़ सकता है।
