Aluminum price today: ईरान-इजराइल युद्ध के कारण एल्युमिनियम का भाव 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। सप्लाई चेन रुकने से कीमतों में भारी उछाल आया है। जानें पूरी खबर।
अहमदाबादः ईरान और इजराइल के बीच चल रहे भयंकर युद्ध का असर अब ग्लोबल मार्केट पर साफ दिखने लगा है। मिडिल ईस्ट (Middle East) में तनाव बढ़ने से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका सबसे सीधा और बड़ा असर एल्युमिनियम (Aluminum) की कीमतों पर पड़ा है। सप्लाई घटने के डर से एल्युमिनियम का भाव लगभग 4 साल (अप्रैल 2022) के बाद अपने सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गया है।
लंदन मेटल एक्सचेंज पर जबरदस्त उछाल
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर एल्युमिनियम की कीमतों में 1.6% की तेजी दर्ज की गई, जिसके बाद इसका भाव $3,499.50 प्रति टन हो गया है। फारस की खाड़ी से शिपमेंट रुकने के कारण पिछले हफ्ते ही इसकी कीमतों में लगभग 10% का तगड़ा उछाल आया था।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
सप्लाई में रुकावट: मिडिल ईस्ट इलाका पूरी दुनिया की ग्लोबल एल्युमिनियम सप्लाई का लगभग 9% हिस्सा कवर करता है। युद्ध के कारण यह सप्लाई खतरे में है।
स्मेल्टर्स पर असर: कतर और बहरीन के दो बड़े स्मेल्टर्स से डिलीवरी रोक दी गई है।
अमेरिका का नया कदम: मिडिल ईस्ट से सप्लाई रुकने के कारण अब अमेरिकी खरीदार (Buyers) घबराहट में एशिया से अपने कार्गो मंगाने की दौड़ में लग गए हैं।
कच्चे तेल में आग, लेकिन दूसरे मेटल्स में गिरावट
युद्ध की वजह से प्रोडक्शन रुकने के डर से सोमवार को कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भी लगभग 20% की भारी बढ़ोतरी देखी गई। वहीं, ग्लोबल इकॉनमी पर युद्ध के असर को देखते हुए इन्वेस्टर्स अब रिस्क लेने से बच रहे हैं। यही वजह है कि कॉपर और निकेल जैसे दूसरे इंडस्ट्रियल मेटल्स के भाव गिर गए हैं।
शंघाई मार्केट में सुबह के समय कॉपर 1.8% गिरकर $12,637 और निकेल 3.1% टूटकर $16,920 प्रति टन पर आ गया। हालांकि, यहां भी एल्युमिनियम 0.7% की बढ़त के साथ $34,670.50 प्रति टन पर ट्रेड कर रहा था।
एक्सपर्ट्स की क्या है राय?
शुओहे एसेट मैनेजमेंट की एनालिस्ट गाओ यिन का कहना है, "अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो एल्युमिनियम की सप्लाई को और ज्यादा नुकसान होगा।" उन्होंने बताया कि बाजार में डर का माहौल है; लोग तेजी से एल्युमिनियम खरीद रहे हैं और दूसरे इंडस्ट्रियल मेटल्स को बेच रहे हैं।
युद्ध के हालात और नेताओं की चेतावनी
रविवार को ईरान ने अपने पड़ोसी देशों पर हमले किए, जबकि इजराइल ने पलटवार करते हुए तेहरान के फ्यूल डिपो और पावर ग्रिड को निशाना बनाया। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अमेरिका उन इलाकों को भी निशाना बना सकता है, जिन्हें पहले छोड़ दिया गया था। उन्होंने साफ कहा कि जब तक विरोधी सरेंडर नहीं करते या पूरी तरह खत्म नहीं हो जाते, हमले जारी रहेंगे।
कुल मिलाकर, जब तक मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित नहीं होती, तब तक कमोडिटी और मेटल मार्केट में इसी तरह की भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। इन्वेस्टर्स की नज़रें अब आगे के भू-राजनीतिक (Geopolitical) घटनाक्रमों पर टिकी हैं।
(डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल मार्केट अपडेट्स और रिपोर्ट्स पर आधारित है। यह किसी भी प्रकार की वित्तीय सलाह या निवेश की राय नहीं है। बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से संपर्क जरूर करें।)

