FPI selling in India: पश्चिम एशिया संकट (Iran-Israel War) के डर से विदेशी निवेशकों (FPIs) ने भारतीय शेयर बाजार से महज 4 दिन में 21000 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। जानें इस भारी बिकवाली और मार्केट क्रैश के मुख्य कारण।
मुंबईः अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं, तो हालिया गिरावट ने आपको भी परेशान किया होगा। बाजार में एक बार फिर से विदेशी निवेशकों (FPIs) ने बिकवाली शुरू कर दी है। पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे भयंकर तनाव और युद्ध की आहट के बीच विदेशी निवेशकों ने पिछले 4 कारोबारी दिनों में ही भारतीय शेयर बाजार से 21000 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं।
इस भारी बिकवाली ने बाजार के सेंटीमेंट को बुरी तरह प्रभावित किया है। ग्लोबल निवेशक अब शेयर बाजार से पैसा निकालकर अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित जगहों पर अपना पैसा लगा रहे हैं। आइए समझते हैं कि अचानक विदेशी निवेशक भारत से पैसा क्यों निकाल रहे हैं और इसके पीछे की पूरी कहानी क्या है।
फरवरी की खुशी मार्च में हुई गायब
अगर हम पिछले कुछ महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो कहानी काफी दिलचस्प है। फरवरी के महीने में विदेशी निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटी में 22615 करोड़ रुपये का तगड़ा निवेश किया था। यह पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा निवेश था। इससे पहले सितंबर 2024 में FPI ने बाजार में 57724 करोड़ रुपये डाले थे।
लेकिन फरवरी से पहले का ट्रेंड भी बिकवाली का ही था। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने लगातार तीन महीने बाजार से पैसा निकाला था:
- जनवरी 2026 में 35962 करोड़ रुपये की बिकवाली।
- दिसंबर 2025 में 22611 करोड़ रुपये निकाले।
- नवंबर 2025 में 3765 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
अब मार्च की शुरुआत में ही हालात फिर बिगड़ गए हैं। 2 से 6 मार्च 2026 के बीच (3 मार्च को होली की छुट्टी को छोड़कर) केवल 4 ट्रेडिंग सेशन में FPI ने कैश मार्केट में लगभग 21000 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले हैं।
क्यों भाग रहे हैं विदेशी निवेशक?
बाजार के जानकारों का साफ कहना है कि इस भयंकर बिकवाली का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई बड़े नेता मारे गए।
इस घटना के बाद ईरान ने भी चुप न बैठते हुए मिसाइलों और ड्रोन्स से इजरायल पर पलटवार किया। यही नहीं, मिडिल ईस्ट के कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। इस युद्ध के हालात ने दुनिया भर के निवेशकों को डरा दिया है।
इन 4 बड़े कारणों ने बिगाड़ा बाजार का मूड:
1) क्रूड ऑयल में आग: एंजेल वन के सीनियर एनालिस्ट वकारजावेद खान के मुताबिक, युद्ध के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (फारस की खाड़ी का अहम समुद्री रास्ता) में व्यापार रुकने का डर फैल गया है। इसी रास्ते से दुनिया का सबसे ज्यादा तेल गुजरता है। भारत भी अपना 40% कच्चा तेल यहीं से मंगाता है। इसी डर से ब्रेंट क्रूड ऑयल 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
2) रुपये में भारी गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होकर 92 के पार चला गया है, जो विदेशी निवेशकों के लिए एक नेगेटिव संकेत है।
3) अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल: अमेरिका में ब्याज दरें (ट्रेजरी यील्ड) बढ़ रही हैं, जिससे विदेशी निवेशक उभरते बाजारों (जैसे भारत) से पैसा निकालकर अमेरिका ले जा रहे हैं।
4) बाजार का करेक्शन और अनिश्चितता: जियोजित इनवेस्टमेंट्स के वी के विजयकुमार का मानना है कि इस अनिश्चित माहौल और बाजार की मौजूदा गिरावट ने FPI को बिकवाली करने पर मजबूर किया है।
आगे क्या होगा?
मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट के हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि जब क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो देश में महंगाई बढ़ती है और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) भी बढ़ता है। यह किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नहीं है।
बाजार के जानकारों का साफ शब्दों में कहना है कि जब तक ईरान-इजरायल विवाद शांत नहीं होता और कच्चे तेल के दाम 90 डॉलर से नीचे नहीं आते, तब तक विदेशी निवेशकों (FPIs) के दोबारा भारतीय बाजार में लौटकर खरीदारी करने की उम्मीद बहुत कम है। निवेशकों को फिलहाल संभलकर और बाजार की खबरों पर नजर रखकर ही निवेश करना चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ न्यूज़ और एजुकेशन के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। किसी भी स्टॉक में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से सलाह जरूर लें। हम किसी भी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं देते हैं।)

