Indian stock market crash: 2026 के सिर्फ ढाई महीने में भारतीय शेयर बाजार का मार्केट कैप 533 अरब डॉलर घटा। ईरान युद्ध, अमेरिकी टैरिफ और AI क्राइसिस के कारण 15 साल की सबसे बड़ी गिरावट।
मुंबई, 14 मार्चः साल 2026 भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के लिए किसी बुरे सपने की तरह शुरू हुआ है। वैश्विक अनिश्चितता और भारी उतार-चढ़ाव के बीच, साल के शुरुआती सिर्फ ढाई महीनों में ही भारतीय इक्विटी मार्केट को तगड़ा झटका लगा है।
इस छोटी सी अवधि में शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप (Market Cap) 533 अरब डॉलर तक घट गया है। यह पिछले 15 सालों में आई सबसे बड़ी गिरावट है। इससे पहले साल 2011 के पूरे वर्ष में भारतीय शेयरों के मूल्य में 625 अरब डॉलर की भारी गिरावट दर्ज की गई थी।
कई देशों के मार्केट कैप से भी बड़ा है यह नुकसान
आपको जानकर हैरानी होगी कि एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के मार्केट कैप में आई यह 533 अरब डॉलर की गिरावट पोलैंड, वियतनाम, फिनलैंड, नॉर्वे और मलेशिया जैसे देशों के कुल शेयर बाजार के आकार (मार्केट कैप) से भी ज्यादा है।
साल 2026 की शुरुआत में भारत में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 5.30 ट्रिलियन डॉलर था, जो अब घटकर 4.77 ट्रिलियन डॉलर के नीचे आ गया है। वहीं, बीएसई (BSE) पर लिस्टेड शेयरों का कुल मार्केट कैप रुपये के लिहाज से गिरकर 429 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है। आपको बता दें कि ईरान युद्ध की खबर आते ही पहले कारोबारी सत्र में मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर से खिसककर 4.99 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया था।
बाजार में इस भारी गिरावट के मुख्य कारण:
इस भयंकर बिकवाली और गिरावट के पीछे कई नकारात्मक फैक्टर काम कर रहे हैं:
अमेरिका का टैरिफ फैसला: अमेरिका द्वारा लागू किए गए नए टैरिफ नियमों के कारण भारतीय इक्विटी वैल्यूएशन को तगड़ा नुकसान हुआ है।
ईरान-इजराइल युद्ध: मध्य पूर्व में जारी जंग ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का भरोसा तोड़ दिया है, जिससे वे लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
AI और IT सेक्टर पर मार: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में आ रही दिक्कतों और बदलावों ने भारतीय आईटी (IT) शेयरों को बुरी तरह प्रभावित किया है।
आगे क्या हैं खतरे?
ईरान-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध के कारण यह डर सता रहा है कि देश की लिस्टेड कंपनियों की कमाई (Earnings) में भारी कमी आ सकती है। 2026 में अब तक बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध कुछ और हफ्ते लंबा चलता है, तो कच्चे तेल (Crude Oil) और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी। इससे न सिर्फ कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर दबाव कई गुना बढ़ जाएगा। विदेशी निवेशकों का सेंटिमेंट पहले ही खराब हो चुका है, जो बाजार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।

