Foreign Stock Investing: विदेशी शेयरों में निवेश करते हैं? ITR में डिविडेंड इनकम न बताने पर इनकम टैक्स विभाग 200% तक जुर्माना लगा सकता है। जानें टैक्स नियम और जुर्माने से बचने के तरीके।
अहमदाबाद, 14 मार्चः आजकल बहुत से भारतीय निवेशक अमेरिकी और अन्य विदेशी बाजारों में जमकर पैसा लगा रहे हैं। अगर आप भी विदेशी कंपनियों के शेयर खरीदते-बेचते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। अक्सर निवेशक विदेशी शेयर खरीदने और बेचने की जानकारी तो अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में दे देते हैं, लेकिन उनसे मिलने वाले डिविडेंड (लाभांश) को बताना भूल जाते हैं। आपकी यह छोटी सी भूल आपके घर इनकम टैक्स का एक बड़ा नोटिस ला सकती है, और साथ ही आप पर 200% तक का भारी भरकम जुर्माना भी लग सकता है।
कैसे पकड़ी जा रही है ये गलती?
अक्सर लोगों को लगता है कि विदेशी बाजार से मिले डिविडेंड की जानकारी इनकम टैक्स विभाग को कैसे मिलेगी? लेकिन अब ऐसा नहीं है। टैक्स डिपार्टमेंट अब 'विदेशी डेटा एक्सचेंज' (Foreign Data Exchange) के जरिए भारतीय निवेशकों के विदेशी निवेश और वहां से होने वाली कमाई की पूरी जानकारी जुटा रहा है। ऐसे में 'इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज' में अपनी डिविडेंड इनकम को छिपाना आपको भारी मुसीबत में डाल सकता है।
डिविडेंड की जानकारी देना क्यों है जरूरी?
भारत के टैक्स नियमों के अनुसार, अगर आप भारत के निवासी हैं, तो आपकी 'ग्लोबल इनकम' पर यहीं टैक्स लगेगा। मतलब साफ है कि आपने पैसा चाहे अमेरिका में कमाया हो या जापान में, आपको उसकी पूरी जानकारी भारत के टैक्स डिपार्टमेंट को देनी ही होगी।
इसे एक उदाहरण से समझते हैं:
मान लीजिए, किसी अमेरिकी कंपनी ने आपको 10 डॉलर का डिविडेंड दिया। अमेरिकी नियमों के तहत वहां की सरकार इस पर 25% (विथहोल्डिंग टैक्स) काट लेगी और आपके खाते में सिर्फ 7.5 डॉलर आएंगे। ज्यादातर भारतीय निवेशक यही सोचते हैं कि जब टैक्स कट ही गया तो भारत में क्या बताना? लेकिन असली खेल यहीं है। भारतीय नियमों के मुताबिक, आपको अपने ITR में पूरी 10 डॉलर की इनकम ही दिखानी होगी।
क्या दो बार देना होगा टैक्स? (DTAA का फायदा)
अब आप सोचेंगे कि ऐसे तो अमेरिका में भी टैक्स कट गया और भारत में भी देना पड़ेगा? घबराइए मत, इसके लिए भारत और अमेरिका के बीच 'डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट' (DTAA) है। इस एग्रीमेंट के तहत, अमेरिका में कटे हुए 2.5 डॉलर को आप भारत में 'फॉरेन टैक्स क्रेडिट' (FTC) के रूप में क्लेम कर सकते हैं। यानी आपको एक ही कमाई पर दो बार टैक्स नहीं देना है।
इनकम छिपाने पर कितना लगेगा जुर्माना?
अगर आप ITR में डिविडेंड इनकम नहीं दिखाते हैं, तो इनकम टैक्स एक्ट की धारा 270A के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है। कम इनकम दिखाने पर: टैक्स का 50% जुर्माना।
जानबूझकर गलत जानकारी देने पर: टैक्स का 200% तक जुर्माना। इसके अलावा 'ब्लैक मनी एक्ट' के तहत भी आपके खिलाफ केस दर्ज हो सकता है।
अगर गलती हो गई है, तो कैसे सुधारें?
अगर आपने अपने पिछले रिटर्न में विदेशी डिविडेंड की जानकारी नहीं दी है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार आपको 'अपडेटेड रिटर्न' (ITR-U) भरने का मौका देती है। असेसमेंट ईयर खत्म होने के 24 महीने के अंदर आप इसे भर सकते हैं।
अगर आप 12 महीने के अंदर रिटर्न अपडेट करते हैं, तो बकाया टैक्स और ब्याज पर 25% अतिरिक्त टैक्स देना होगा। अगर आप 12 से 24 महीने के बीच अपडेट करते हैं, तो यह पेनल्टी 50% होगी। भले ही आपको थोड़ी पेनल्टी देनी पड़े, लेकिन यह 200% के भारी जुर्माने से कहीं बेहतर है।
विदेशी शेयरों के निवेशकों के लिए 3 जरूरी बातें:
शेड्यूल FA भरें: अपने हर विदेशी एसेट और विदेशी बैंक खाते की जानकारी ITR के 'शेड्यूल FA' में जरूर दें।
फॉर्म 67 न भूलें: अगर आप विदेशी टैक्स क्रेडिट (FTC) का फायदा लेना चाहते हैं, तो समय पर फॉर्म 67 जरूर फाइल करें।
ग्रॉस अमाउंट बताएं: ITR भरते समय हमेशा टैक्स कटने से पहले वाला टोटल (Gross) अमाउंट ही अपनी इनकम में दिखाएं।

