Global Market Crash: मिडिल ईस्ट युद्ध और अमेरिका में घटती नौकरियों के कारण वॉल स्ट्रीट में भारी गिरावट आई है। क्रूड ऑयल $90 के पार पहुंचा। जानिए ग्लोबल मार्केट का पूरा हाल।
मुंबईः शेयर बाजार के निवेशकों के लिए पिछला हफ्ता बेहद खराब साबित हुआ है। ग्लोबल मार्केट (Global Market) में इस वक्त भारी उथल-पुथल मची हुई है। मिडिल ईस्ट में भड़कते युद्ध और अमेरिका (US) में नौकरियों के खराब आंकड़ों ने वॉल स्ट्रीट (Wall Street) को बुरी तरह हिला कर रख दिया है। हालत यह है कि अमेरिकी शेयर बाजार में अक्टूबर के बाद सबसे बड़ी वीकली गिरावट दर्ज की गई है।
प्रमुख इंडेक्स का क्या रहा हाल?
शुक्रवार का दिन अमेरिकी बाजारों के लिए ‘ब्लैक फ्राइडे' जैसा रहा।
S&P 500: इस इंडेक्स में लगभग एक महीने की सबसे बड़ी सिंगल-डे गिरावट (1.3%) देखी गई। पूरे हफ्ते के हिसाब से यह 2% टूट गया।
Dow Jones: डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 1% की गिरावट आई।
Nasdaq 100: टेक कंपनियों से भरे इस इंडेक्स ने 1.5% का गोता लगाया।
यूरोपियन शेयर बाजार भी इस झटके से बच नहीं पाए और शुक्रवार को 1% से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए।
नौकरियों के आंकड़ों ने बढ़ाई टेंशन
अर्थशास्त्रियों को उम्मीद थी कि फरवरी में 59,000 नई नौकरियां जुड़ेंगी, लेकिन हुआ इसका बिल्कुल उल्टा। अमेरिकी सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, नॉन-फार्म पेरोल में अचानक 92,000 नौकरियां कम हो गईं।
आपको बता दें कि जनवरी में नौकरियों में 126,000 की बढ़ोतरी हुई थी। लेकिन फरवरी के खराब आंकड़ों के बाद अमेरिका में बेरोजगारी दर 4.3% से बढ़कर 4.4% हो गई है। इस झटके के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद तो बढ़ी है, लेकिन इससे अर्थव्यवस्था को लेकर निवेशकों का डर कम नहीं हुआ।
मिडिल ईस्ट का युद्ध और डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी
ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध ने बाजार का मूड पूरी तरह बिगाड़ दिया है। इजराइल ने ईरान और लेबनान पर हमले तेज कर दिए हैं। जवाब में ईरान ने भी इजराइल और खाड़ी देशों (जहां अमेरिकी मिलिट्री बेस हैं) पर मिसाइलें दागी हैं।
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में दखल देते हुए ईरान से "बिना शर्त सरेंडर" करने की मांग कर दी है। इन भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनावों ने शेयर बाजार के उस अच्छे प्रदर्शन पर ब्रेक लगा दिया है, जो पिछले पूरे साल से स्थिर चल रहा था।
क्रूड ऑयल में 12% का भारी उछाल
जंग का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। 2023 के बाद तेल की कीमतों में सबसे बड़ी तेजी देखी जा रही है। US क्रूड ऑयल फ्यूचर्स शुक्रवार को 12% से ज्यादा उछलकर $90 प्रति बैरल के पार निकल गया। इंटरनेशनल ब्रेंट क्रूड भी लगभग 8.5% की तेजी के साथ $92 प्रति बैरल तक पहुंच गया है। स्टेट स्ट्रीट इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट माइकल एरोन ने चेतावनी दी है, "हम हर दिन $100 प्रति बैरल तेल के करीब पहुंच रहे हैं, जिससे बाजार में भारी चिंता और वोलैटिलिटी पैदा हुई है।"
बाजार में बढ़ा ‘डर का मीटर'
वॉल स्ट्रीट में निवेशकों के डर को मापने वाला गेज, Cboe वोलैटिलिटी इंडेक्स (VIX) 5.74 पॉइंट उछलकर 29.49 पर पहुंच गया। यह अप्रैल 2022 के बाद इसका सबसे ऊंचा क्लोजिंग लेवल है।
तेल की बढ़ती कीमतें सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और इनपुट कॉस्ट पर डालेंगी। इससे महंगाई एक बार फिर बेकाबू हो सकती है, जो लेंडर्स और कंपनियों के लिए एक नेगेटिव संकेत है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और प्राइवेट फाइनेंस को लेकर भी निवेशकों के मन में कई सवाल हैं। फिलहाल, ग्लोबल मार्केट के लिए आने वाले दिन काफी चुनौती भरे नजर आ रहे हैं और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
( डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल मार्केट अपडेट्स और रिपोर्ट्स पर आधारित है। यह किसी भी प्रकार की वित्तीय सलाह या निवेश की राय नहीं है। क्रिप्टो मार्केट और शेयर बाजार जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से संपर्क जरूर करें।)

