Iran Israel war impact on India: ईरान द्वारा होर्मुज खाड़ी बंद करने से भारत का व्यापार ठप हो गया है। दुबई में 1000 कृषि कंटेनर फंसे हैं और 23000 भारतीय नाविकों की जान खतरे में है। पढ़ें पूरी खबर।

Iran Israel war impact on India
नई दिल्लीः अमेरिका-इजरायल के हमलों और ईरान के आक्रामक पलटवार ने अब पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत की टेंशन भी बढ़ा दी है। युद्ध की इस आग का सीधा असर भारत के व्यापार और हमारे लोगों की सुरक्षा पर पड़ रहा है। समुद्री व्यापार के लिए सबसे अहम मानी जाने वाली ‘होर्मुज खाड़ी' (Strait of Hormuz) को ईरान ने बंद कर दिया है। इसके चलते भारत का निर्यात और आयात पूरी तरह से ब्रेक लग गया है।
दुबई में फंसे 1000 से ज्यादा कंटेनर, किसान परेशान
होर्मुज खाड़ी बंद होने से दुबई के जेबल अली पोर्ट पर भारत के 1000 से ज्यादा कृषि उत्पादों के कंटेनर फंस गए हैं। पिछले एक हफ्ते से व्यापार पूरी तरह रुका हुआ है।
क्या-क्या फंसा है: इन कंटेनरों में केले, अंगूर, अनार, तरबूज और प्याज जैसी चीजें हैं।
खराब हो रहा माल: 28 फरवरी से ये माल फंसा हुआ है और अब इसके खराब होने का डर सता रहा है।
रमजान के महीने में खाड़ी देशों में फलों की बहुत डिमांड होती है, लेकिन माल न पहुंचने से भारतीय किसानों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि ईरान ने इस रास्ते से चीन और रूस के जहाजों को निकलने की छूट दी है।
अंगूर किसानों को सबसे बड़ा झटका
इस समय जिन किसानों ने अंगूर की फसल तैयार कर ली है, वे भारी टेंशन में हैं। अलग-अलग बंदरगाहों पर करीब 5000 से 6000 टन अंगूर फंसा हुआ है। अगर निर्यात नहीं हुआ, तो 10000 टन अंगूर बहुत कम कीमत पर बेचना पड़ेगा। मुंबई के जेएनपीटी (JNPT) पोर्ट पर निर्यात के लिए लाए गए 80 कंटेनर खाली पड़े हैं। किसानों ने अब सरकार से मदद और मुआवजे की गुहार लगाई है।
आयात पर भी पड़ा असर, खजूर और सेब अटके
बात सिर्फ हमारे सामान के बाहर जाने की नहीं है, बल्कि बाहर से आने वाला माल भी फंस गया है। ईरान के द्वीपों पर सेब, कीवी और खजूर के 600 से 700 कंटेनर रुके पड़े हैं। एक कीवी के कंटेनर की कीमत 30 से 32 लाख रुपये और खजूर के कंटेनर की कीमत 45 लाख रुपये तक होती है। वहीं, केंद्र सरकार ने इस साल 20 लाख टन चीनी के निर्यात की छूट दी थी, लेकिन युद्ध के कारण अब सिर्फ 5 लाख टन चीनी ही बाजार तक पहुंचने की उम्मीद है।
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| India export import crisis |
23000 भारतीय नाविकों की जान पर मंडराया खतरा
समुद्र में सिर्फ माल नहीं, बल्कि इंसानी जानें भी फंसी हैं। पश्चिमी एशिया के समुद्री क्षेत्रों में करीब 23000 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं, जिनकी जान इस समय युद्ध क्षेत्र में जोखिम में है।
पिछले कुछ दिनों में भारतीय जहाजों और क्रू पर हमले बढ़े हैं। अब तक 3 भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है। 5 मार्च को ‘सोनांगोल नामीबे' नामक जहाज पर फायरिंग हुई थी, जिसमें 10 भारतीय सवार थे।
सरकार और नेवी से रेस्क्यू की अपील
सुरक्षा एजेंसियों ने होर्मुज खाड़ी, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को 'हाई रिस्क जोन' घोषित कर दिया है। इस इलाके में भारतीय झंडे वाले 36 जहाज मौजूद हैं (24 पश्चिम में और 12 पूर्व में)। अदन की खाड़ी में भी 3 जहाज फंसे हैं। भारतीय नाविकों के संगठन 'फॉरवर्ड सीमेन यूनियन' ने मुंबई में अधिकारियों से मुलाकात की है। उन्होंने विदेश मंत्रालय और भारतीय नौसेना (Indian Navy) से अपील की है कि वे युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीय नाविकों को तुरंत रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकालें।
ईरान और इजरायल के बीच का यह तनाव अब भारत की अर्थव्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट बन चुका है। अब सबकी नज़रें भारत सरकार पर हैं कि वह किसानों को नुकसान से बचाने और अपने नाविकों को सुरक्षित घर लाने के लिए क्या कूटनीतिक कदम उठाती है।

