Strait of Hormuz: डोनाल्ड ट्रंप का दावा: ईरान ने अमेरिका को 'तोहफे' के रूप में 10 पाकिस्तानी तेल टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने दिया। पढ़ें इस सीक्रेट डील की पूरी खबर।
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| Strait of Hormuz, Pakistan oil tankers |
USA, 26 मार्चः अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कब क्या हो जाए, इसका अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है। खासकर जब बात अमेरिका और ईरान की हो, तो हालात हमेशा तनावपूर्ण ही नजर आते हैं। लेकिन इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से 10 तेल टैंकरों को सुरक्षित गुजरने दिया है। ट्रंप ने इसे ईरान की तरफ से अमेरिका के लिए एक "तोहफा" (Present) करार दिया है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है। हालांकि, सीजफायर (संघर्ष विराम) और अन्य शर्तों को लेकर अभी भी भारी अनिश्चितता बनी हुई है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
ईरान का अमेरिका को 'तोहफा' और ट्रंप का बयान
हाल ही में हुई एक कैबिनेट बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरी घटना का जिक्र किया। ट्रंप ने बताया कि ईरान ने सद्भावना (Goodwill) दिखाते हुए इस हफ्ते होर्मुज जलडमरूमध्य से 10 तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी। ट्रंप के मुताबिक, ईरान का यह कदम यह दिखाने के लिए था कि वे बातचीत को लेकर गंभीर हैं।
ट्रंप ने बैठक में कहा, "ईरान ने यह कदम अमेरिका को यह जताने के लिए उठाया है कि हम असल में यहां हैं और हम एक ठोस बातचीत के लिए तैयार हैं।"
ट्रंप ने घटना का विवरण देते हुए बताया कि शुरुआत में तेल से भरे 8 बड़े जहाज इस समुद्री रास्ते से गुजरे और उसके कुछ समय बाद 2 और जहाज वहां से निकले। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि इनमें से कुछ जहाजों पर 'पाकिस्तान का झंडा' (Pakistani-flagged) लगा हुआ था।
पाकिस्तानी झंडे वाले जहाजों को देखकर ट्रंप ने टिप्पणी की, "मैंने कहा, खैर... मुझे लगता है कि हम सही लोगों के साथ डील कर रहे हैं।" ट्रंप का यह बयान साफ तौर पर इस बात की ओर इशारा करता है कि पाकिस्तान अब सिर्फ लॉजिस्टिक्स में ही नहीं, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच 'बैकचैनल डिप्लोमेसी' (पर्दे के पीछे की कूटनीति) में भी एक अहम भूमिका निभा रहा है।
समाचारों से मिली ट्रंप को भनक
इस पूरे घटनाक्रम में एक और रोचक बात यह रही कि ट्रंप को इन जहाजों की आवाजाही का पता न्यूज़ रिपोर्ट्स के जरिए चला। ट्रंप ने खुद इस बात को स्वीकार किया कि उन्होंने टीवी पर खबरों में कुछ असामान्य गतिविधि देखी थी।
उन्होंने बताया,
"मैं न्यूज़ देख रहा था और उन्होंने कहा कि कुछ अजीब हो रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बिल्कुल बीचों-बीच से 8 जहाज गुजर रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "8 बड़े तेल से लदे टैंकर वहां से सुरक्षित निकल गए। और तब मैंने कहा, मुझे लगता है कि वे (न्यूज़ वाले) सही कह रहे थे।"
ट्रंप ने साफ किया कि भले ही ईरान सीधे तौर पर बातचीत से इनकार कर रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि ईरान के साथ "बहुत ही अहम और ठोस बातचीत" चल रही है।
अमेरिका का 15 सूत्रीय फॉर्मूला और पाकिस्तान की भूमिका
इस कूटनीतिक प्रयास के पीछे अमेरिका के विशेष दूत (US Special Envoy) स्टीव विटकॉफ की बड़ी भूमिका है। विटकॉफ ने इस पूरी बातचीत को लेकर कई अहम खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि इस पूरे क्षेत्र और बाहरी देशों से भी कई लोग इस संघर्ष को शांतिपूर्ण ढंग से खत्म करने में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं।
स्टीव विटकॉफ ने इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका की तरफ से एक 15-पॉइंट का फ्रेमवर्क (15-point US framework) तैयार किया गया है, जिसे पाकिस्तान के जरिए ईरान तक पहुंचाया गया है।
उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा,
"मुझसे कहा गया है कि मैं इस डील की विशिष्ट शर्तों को लेकर गोपनीयता बनाए रखूं और न्यूज़ मीडिया के जरिए कोई मोलभाव (Negotiate) न करूं।" हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि, "मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि हम देखेंगे कि आने वाले समय में चीजें किस दिशा में जाती हैं।"
ईरान की शर्तें: होर्मुज जलडमरूमध्य पर संप्रभुता की मांग
एक तरफ जहां अमेरिका इसे शांति की दिशा में एक कदम मान रहा है, वहीं ईरान का रुख अभी भी काफी सख्त है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका द्वारा समर्थित सीजफायर प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इसके बजाय, ईरान ने अपनी खुद की कुछ शर्तें सामने रखी हैं।
ईरान की सबसे बड़ी मांग होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह से संप्रभुता (Sovereignty) हासिल करने की है। आपको बता दें कि यह समुद्री रास्ता पिछले लगभग 4 हफ्तों से प्रभावी रूप से बंद है।
इस रास्ते के बंद होने से पूरी दुनिया, खासकर एशिया-प्रशांत (Asia-Pacific) क्षेत्र में तेल की सप्लाई को लेकर भारी चिंता पैदा हो गई है। दुनिया भर का काफी कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। अगर यह रास्ता ज्यादा दिन तक बंद रहता है, तो ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
होर्मुज का रणनीतिक जोखिम और ट्रंप की चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप अच्छी तरह जानते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का गुजरना कितना जोखिम भरा हो सकता है। वहां के हालातों पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि इस रास्ते में 1 प्रतिशत का जोखिम भी उठाया नहीं जा सकता।
ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा,
"1% का रिस्क भी अस्वीकार्य है, क्योंकि 1% का मतलब है कि एक अरब डॉलर (Billion dollars) की कीमत वाले जहाज के पतवार (Hull) में मिसाइल का घुस जाना।"
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यानी ट्रंप का साफ कहना है कि जब तक पूरी सुरक्षा की गारंटी न हो, इस रास्ते का इस्तेमाल व्यापार के लिए करना बेहद खतरनाक है। हालांकि, इतने जोखिम के बावजूद ट्रंप ने विश्वास जताया कि यह पूरी स्थिति "बहुत जल्दी साफ और ठीक हो जाएगी।"
आगे क्या होगा?
इस पूरे घटनाक्रम से कुछ बातें बिल्कुल साफ हो जाती हैं। पहला, अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी के बावजूद, दोनों देश युद्ध को टालने और किसी बीच के रास्ते को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। 10 पाकिस्तानी तेल टैंकरों का सुरक्षित गुजरना इसी दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
दूसरा, पाकिस्तान इस पूरे मामले में एक साइलेंट प्लेयर (Silent Player) के रूप में उभरा है, जो अमेरिका और ईरान के बीच संदेशवाहक का काम कर रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या ईरान अमेरिका के 15 सूत्रीय फॉर्मूले पर सहमत होता है, या फिर होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने अधिकार की मांग पर अड़ा रहता है। दुनिया भर की नजरें फिलहाल इसी बात पर टिकी हैं, क्योंकि इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ने वाला है।

