Make in India के तहत शिपबिल्डिंग सेक्टर में 70,000 करोड़ का बड़ा निवेश हो रहा है। जानिए MDL, GRSE और CSL जैसे 3 डिफेंस स्टॉक्स कैसे करा सकते हैं तगड़ी कमाई।
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नई दिल्ली, 26 मार्चः Defence Stocks: भारत का शेयर बाजार इन दिनों नई ऊंचाइयों को छू रहा है, और इसमें सबसे बड़ा योगदान डिफेंस सेक्टर का है। देश की शिपबिल्डिंग (जहाज निर्माण) इंडस्ट्री अब विदेशी निर्भरता को पीछे छोड़कर 'आत्मनिर्भरता' की राह पर बहुत तेजी से दौड़ रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारा करीब 90 प्रतिशत समुद्री व्यापार आज भी विदेशी जहाजों के जरिए ही होता है। यही कारण है कि ग्लोबल सप्लाई चेन में जब भी कोई दिक्कत आती है, तो भारत पर इसका सीधा असर पड़ता है।
लेकिन अब कहानी बदल रही है। भारत सरकार ने 'मेक इन इंडिया' (Make in India) पहल के तहत एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। घरेलू जहाज निर्माण को रफ्तार देने के लिए 70,000 करोड़ रुपये के बंपर निवेश की तैयारी हो चुकी है। इस बड़े निवेश से भारतीय शिपयार्ड कंपनियों के लिए आने वाले कई सालों तक बंपर कमाई के दरवाजे खुल गए हैं।
अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है। आइए विस्तार से जानते हैं कि सरकार के इस कदम से किन 3 सरकारी डिफेंस कंपनियों (PSU Defence Stocks) को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है और उनका मौजूदा हाल कैसा है।
1. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (Mazagon Dock Shipbuilders - MDL)
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) भारत सरकार की एक 'नवरत्न' (Navratna) कंपनी है। यह देश का इकलौता ऐसा सरकारी डिफेंस शिपयार्ड है, जिसके पास डेस्ट्रॉयर (विध्वंसक जहाज) और पारंपरिक पनडुब्बियां (Submarines) बनाने की महारत हासिल है। इस कंपनी की ताकत का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि यह एक ही समय में 11 पनडुब्बियां और 10 युद्धपोत बनाने की शानदार क्षमता रखती है।
क्या-क्या बनाती है कंपनी?
MDL सिर्फ सेना के लिए ही नहीं, बल्कि कमर्शियल सेक्टर के लिए भी जहाज बनाती है।
डिफेंस पोर्टफोलियो: इसमें डेस्ट्रॉयर, पनडुब्बियां, स्टील्थ फ्रिगेट, कॉर्वेट और मिसाइल बोट शामिल हैं।
कमर्शियल पोर्टफोलियो: कंपनी कार्गो वेसल, टग, ड्रेजर, वाटर टैंकर और मल्टीपर्पज सपोर्ट वेसल भी तैयार करती है।
ऑर्डर बुक और भविष्य के प्रोजेक्ट
तेल और गैस सेक्टर में भी इस कंपनी की मजबूत पकड़ है। ओएनजीसी (ONGC) के लिए चल रहे प्रोजेक्ट्स कंपनी की कुल ऑर्डर बुक का करीब 18 प्रतिशत हिस्सा हैं। 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, MDL की कुल ऑर्डर बुक 23,758 करोड़ रुपये थी। हालांकि, यह आंकड़ा पिछले कुछ सालों (FY21 में 49,700 करोड़) के मुकाबले थोड़ा कम हुआ है, लेकिन भविष्य बहुत उज्जवल है।
आने वाले बड़े मौके
सरकार ने Project-75I को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत 6 नई पनडुब्बियां बननी हैं। इसका बजट करीब 70,000 करोड़ रुपये है। इसके अलावा P-17B फ्रिगेट प्रोजेक्ट (70,000 करोड़ रुपये) और P-18 डेस्ट्रॉयर प्रोजेक्ट (85,000 करोड़ रुपये) जैसे विशाल प्रोजेक्ट्स भी जल्द ही कंपनी की झोली में आ सकते हैं। कमर्शियल सेगमेंट में भी कंपनी को NAVI MERCHANTS से 715 करोड़ रुपये का नया कॉन्ट्रैक्ट मिला है। वित्तीय स्थिति (Financials): मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में कंपनी का रेवेन्यू 11 प्रतिशत बढ़कर 9,156 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध लाभ (Net Profit) 2,081 करोड़ रुपये के आसपास स्थिर बना हुआ है।
2. गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (Garden Reach Shipbuilders & Engineers - GRSE)
गार्डेन रीच (GRSE) रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली एक बेहद अहम सरकारी कंपनी है। इसका मुख्य काम भारतीय नौसेना (Indian Navy) और तटरक्षक बल (Coast Guard) के लिए बेहतरीन युद्धपोत और सपोर्ट जहाज बनाना है।
ऑर्डर बुक और रक्षा प्रोजेक्ट्स
31 दिसंबर 2025 तक कंपनी की ऑर्डर बुक 18,482 करोड़ रुपये थी। इसमें 10 अलग-अलग प्रोजेक्ट और 42 प्लेटफॉर्म शामिल हैं। कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि ऑर्डर बुक का 20,000 करोड़ से नीचे आना कोई बुरी बात नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि कंपनी बहुत तेजी से अपने प्रोजेक्ट पूरे कर रही है। कंपनी की कमाई का 77 प्रतिशत हिस्सा सीधे डिफेंस प्रोजेक्ट्स से आता है, जिसमें P-17 Alpha फ्रिगेट प्रोजेक्ट का अकेले 46 प्रतिशत का बड़ा योगदान है।
भविष्य की संभावनाएं और विस्तार
GRSE का मानना है कि अगले 12 से 18 महीनों में डिफेंस और कमर्शियल सेक्टर में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के नए ऑर्डर आने वाले हैं। कंपनी ने हाल ही में 33,000 करोड़ रुपये के पांच जहाजों के एक बड़े प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली (Lowest Bidder) लगाई है। उम्मीद है कि FY26 के अंत तक यह डील पक्की हो जाएगी। अगर ऐसा होता है, तो कंपनी की ऑर्डर बुक सीधे 50,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच सकती है। अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए GRSE कोलकाता और गुजरात में नए प्रोजेक्ट लगा रही है। अभी कंपनी एक साथ 28 जहाज बना सकती है, जिसे 2026 तक बढ़ाकर 35 करने का लक्ष्य है।
वित्तीय स्थिति (Financials): मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों में कंपनी ने कमाल का प्रदर्शन किया है। इसका रेवेन्यू 42 प्रतिशत के शानदार उछाल के साथ 4,883 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, शुद्ध मुनाफा 57 प्रतिशत बढ़कर 445 करोड़ रुपये रहा।
3. कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited - CSL)
कोचीन शिपयार्ड (CSL) भारत की एक और दिग्गज सरकारी कंपनी है। यह जहाज बनाने, उनकी मरम्मत करने और मरीन इंजीनियरिंग से जुड़ी सेवाएं देने में माहिर है। यह कंपनी भी डिफेंस और कमर्शियल, दोनों ही मोर्चों पर शानदार काम कर रही है।
कमर्शियल मार्केट का बेताज बादशाह
भारत का कमर्शियल शिपबिल्डिंग बाजार हर साल लगभग 12,000 से 15,000 करोड़ रुपये के मौके पैदा करता है। अनुमान है कि 2047 तक भारतीय कंपनियां कुल 437 नए जहाज खरीदेंगी, जिनकी कीमत 2.23 लाख करोड़ रुपये के करीब होगी। CSL इस मौके को भुनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
विदेशी साझेदारी और नई तकनीक
CSL ने दुनिया की बेहतरीन तकनीक हासिल करने के लिए दक्षिण कोरिया की 'HD Hyundai Heavy Industries' के साथ हाथ मिलाया है। इससे कंपनी LNG जैसे हाई-टेक जहाज बना सकेगी। भविष्य में कंपनी KSOE के साथ 50:50 की पार्टनरशिप में एक बिल्कुल नया शिपयार्ड बनाने की भी तैयारी कर रही है।
मजबूत ऑर्डर बुक
CSL की मौजूदा ऑर्डर बुक लगभग 23,000 करोड़ रुपये की है। कंपनी को CMA से छह LNG पावर्ड कंटेनर जहाज बनाने का 3,240 करोड़ रुपये का भारी-भरकम ऑर्डर मिला है। इसके अलावा, भारतीय नौसेना के लिए पांच 'नेक्स्ट जेनरेशन सर्वे वेसल' बनाने के 5,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में भी कंपनी सबसे आगे (Lowest Bidder) है। यह ऑर्डर मिलते ही कंपनी की ऑर्डर बुक 28,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। कंपनी की नजर आगे आने वाले 94,000 करोड़ रुपये के बड़े ऑर्डर्स पर है।
वित्तीय स्थिति (Financials)
मौजूदा वित्त वर्ष के पहले 9 महीने में कंपनी का रेवेन्यू 8 प्रतिशत बढ़कर 3,093 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, इस दौरान मुनाफे में थोड़ी गिरावट आई है और शुद्ध लाभ 23 प्रतिशत घटकर 427 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
भारत का 70,000 करोड़ रुपये का 'शिपबिल्डिंग मिशन' अब केवल कागजों पर नहीं है, बल्कि जमीन पर उतरता हुआ साफ दिखाई दे रहा है। इन तीनों कंपनियों के पास ऑर्डर्स की कोई कमी नहीं है, वे लगातार अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रही हैं और 'मेक इन इंडिया' का सीधा फायदा उठा रही हैं।
हालांकि, शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि इन शेयरों के मौजूदा वैल्युएशन (Valuation) में भविष्य की उम्मीदें पहले से ही जुड़ चुकी हैं। इसलिए, इन शेयरों में एकतरफा तेजी आ चुकी है। एक समझदार निवेशक के तौर पर आपको इन तीनों स्टॉक्स (Mazagon Dock, GRSE, Cochin Shipyard) को अपनी वॉचलिस्ट (Watchlist) में रखना चाहिए। जब भी बाजार में कोई गिरावट आए या करेक्शन हो, तब सही कीमत पर इनमें निवेश करने का मौका खोजना एक फायदे का सौदा साबित हो सकता है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से सलाह जरूर लें।)

