Petrol diesel shortage in India: देश में पेट्रोल, डीजल और LPG की कोई कमी नहीं है। सरकार ने बताया कि भारत के पास 60 दिनों का फुल स्टॉक मौजूद है। सोशल मीडिया की अफवाहों पर ध्यान न दें।

Petrol diesel shortage in India
नई दिल्ली, 26 मार्चः आजकल सोशल मीडिया पर कब, कौन सी खबर वायरल हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। पिछले कुछ दिनों से आपके व्हाट्सएप या फेसबुक पर भी ऐसे मैसेज जरूर आए होंगे जिनमें दावा किया जा रहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) खत्म होने वाला है। पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनों के पुराने वीडियो शेयर करके लोगों के मन में डर पैदा किया जा रहा है। अगर आप भी ऐसी किसी खबर को पढ़कर घबरा गए हैं और एक्स्ट्रा फ्यूल या सिलेंडर स्टॉक करने की सोच रहे हैं, तो रुक जाइए!
भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को सामने आकर इन सभी दावों की हवा निकाल दी है। सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि देश में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई किल्लत नहीं है। यह सब केवल एक सोची-समझी साजिश के तहत फैलाई जा रही अफवाह है, ताकि लोग घबराहट में (Panic Buying) ज्यादा खरीदारी करें। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि देश में ईंधन का असली हाल क्या है और सरकार ने इन दावों पर क्या सच्चाई पेश की है।
हमारे पास मौजूद है 60 दिनों का पक्का जुगाड़
सरकार ने जनता को आश्वस्त करते हुए बताया है कि भारत के पास फिलहाल लगभग 60 दिनों का फ्यूल स्टॉक पूरी तरह से सुरक्षित है। देश के कोने-कोने में मौजूद सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त मात्रा में तेल भरा हुआ है और वहां कामकाज बिल्कुल सामान्य तरीके से चल रहा है।
अक्सर जब ऐसी अफवाहें उड़ती हैं, तो लोगों को लगता है कि तेल की राशनिंग शुरू हो जाएगी (यानी एक तय लिमिट से ज्यादा तेल नहीं मिलेगा)। लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत के किसी भी हिस्से में पेट्रोल या डीजल की कोई राशनिंग नहीं की जा रही है।
दुनिया में भारत का रुतबा: उत्पादन और निर्यात में आगे
क्या आप जानते हैं कि तेल के मामले में भारत दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में गिना जाता है? भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है (जहां कच्चे तेल को साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है)। इसके साथ ही, हम पेट्रोलियम उत्पादों के पांचवें सबसे बड़े निर्यातक (Exporter) भी हैं। हमारी घरेलू फ्यूल सप्लाई पूरी तरह से सुरक्षित है और हम आज भी दुनिया के 150 से अधिक देशों को फ्यूल एक्सपोर्ट कर रहे हैं। मंत्रालय के मुताबिक, देश की सभी रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता (100 प्रतिशत से अधिक) पर काम कर रही हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की जो जरूरत हमें पड़ने वाली है, उसकी सप्लाई पहले ही पक्की की जा चुकी है। इसलिए, सप्लाई में कोई भी गैप आने का सवाल ही नहीं उठता।
पश्चिम एशिया संकट का कोई असर नहीं: 74 दिनों की कुल क्षमता
इस समय पश्चिम एशिया (Middle East) में तनाव का माहौल है। आज इस संकट का 27वां दिन है, लेकिन भारत की तेल आपूर्ति पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। सरकार के पास कुल मिलाकर 74 दिनों की कच्चे तेल और फ्यूल स्टॉक रखने की क्षमता (Storage Capacity) है। वर्तमान में हमारे पास करीब 60 दिन का स्टॉक कवरेज मौजूद है। इस स्टॉक में कच्चा तेल, रिफाइनरियों में तैयार उत्पाद और भूमिगत रणनीतिक भंडार (Underground Strategic Reserves) शामिल हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि दुनिया में हालात चाहे जैसे भी हों, हर भारतीय नागरिक के लिए लगभग दो महीने की फ्यूल सप्लाई पूरी तरह से सुरक्षित है। अगले दो महीनों के लिए तेल की खरीदारी पहले ही फिक्स हो चुकी है, जो हमें आने वाले कई महीनों तक सुरक्षित रखती है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास चल रहे तनाव के बावजूद, भारत ने अलग-अलग देशों से तेल की आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है।
LPG (रसोई गैस): घबराने की जरूरत नहीं, उत्पादन बढ़ा
सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा डर रसोई गैस को लेकर फैलाया गया। लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं। सरकार के नए आदेश के बाद घरेलू रिफाइनरियों ने अपना एलपीजी उत्पादन 40 फीसदी तक बढ़ा दिया है।
अब देश में रोजाना करीब 50 TMT एलपीजी का उत्पादन हो रहा है। हमारी कुल जरूरत लगभग 80 TMT है, यानी हम अपनी जरूरत का 60 फीसदी से ज्यादा गैस खुद बना रहे हैं। खुद के उत्पादन के कारण अब हमें विदेशों से सिर्फ 30 TMT गैस आयात करने की जरूरत पड़ रही है। इसके अलावा, भविष्य की सुरक्षा के लिए 800 TMT एलपीजी की सप्लाई पहले ही सुनिश्चित की जा चुकी है। यह गैस अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े देशों से भारत के 22 TMT टर्मिनलों पर पहुंच रही है।
अफवाहों ने बढ़ाई थी डिमांड, अब स्थिति सामान्य
लगातार फैल रही झूठी खबरों के कारण अचानक एलपीजी की मांग बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। आम दिनों में तेल कंपनियां रोजाना करीब 50 लाख सिलेंडर डिलीवर करती हैं, लेकिन पैनिक के कारण यह मांग बढ़कर 89 लाख सिलेंडर प्रतिदिन तक पहुंच गई थी। हालांकि, अब लोगों को सच्चाई समझ आ गई है और मांग वापस घटकर 50 लाख के स्तर पर आ गई है। कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर कमर्शियल सिलेंडरों का आवंटन 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो।
PNG (पाइप्ड गैस) को बढ़ावा देना कोई संकट नहीं, भविष्य की योजना है
कई लोगों ने यह अफवाह फैलाई कि एलपीजी गैस खत्म हो रही है, इसलिए सरकार पाइप वाली गैस (PNG) लगवाने का दबाव बना रही है। सरकार ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। पीएनजी (PNG) को बढ़ावा देना किसी संकट का जवाब नहीं है, बल्कि यह एक लॉन्ग टर्म स्ट्रैटेजी है। पीएनजी रसोई गैस के मुकाबले ज्यादा सस्ती, सुरक्षित (Safe) और स्वच्छ (Clean) है। भारत को रोजाना 191 mmscmd गैस की जरूरत होती है, जिसमें से 92 mmscmd गैस हम खुद पैदा करते हैं। पीएनजी के विस्तार की बात करें तो 2014 में यह सुविधा केवल 57 क्षेत्रों में थी, जो अब बढ़कर 300 से ज्यादा क्षेत्रों में फैल चुकी है। वहीं, पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से छलांग लगाकर 1.5 करोड़ के पार पहुंच गए हैं। सरकार पीएनजी को इसलिए प्रमोट कर रही है क्योंकि यह एलपीजी का एक बेहतर और आधुनिक विकल्प है।
अफवाह फैलाने वालों को सरकार की सख्त चेतावनी
सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों पर कड़ी चिंता जताई है। कुछ शरारती तत्व जानबूझकर पुरानी कतारों की तस्वीरें, विदेशों के वीडियो और लॉकडाउन जैसी झूठी खबरें फैलाकर आम जनता में दहशत पैदा कर रहे हैं। यहां तक कि वे सरकारी आदेशों का गलत मतलब निकालकर उसे फ्यूल संकट बता रहे हैं।
सरकार ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि भारत के भंडार खत्म होने की बात 100 प्रतिशत झूठी है। इंटरनेट पर इस तरह की भ्रामक जानकारी फैलाना कानूनन अपराध है। जो लोग अनावश्यक घबराहट पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कुल मिलाकर लब्बोलुआब यह है कि भारत में ईंधन की कोई किल्लत नहीं है। हमारे पास पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का भरपूर भंडार मौजूद है। सरकार देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को लेकर पूरी तरह से मुस्तैद है। आम जनता से यही अपील है कि वे व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की झूठी खबरों और वीडियो पर विश्वास न करें। हमेशा सरकारी और आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। आपको अपना फ्यूल टैंक फुल कराने या एक्स्ट्रा सिलेंडर घर में जमा करने की कोई जरूरत नहीं है, देश सुरक्षित हाथों में है और सप्लाई चेन पूरी तरह से सुचारू रूप से चल रही है।

