केंद्र सरकार ने गेहूं पर लगी स्टॉक लिमिट हटा दी है। बाजार में बढ़ती सप्लाई और गिरती कीमतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। जानिए अब व्यापारियों और किसानों पर इसका क्या असर होगा।
Wheat Stock Limit: केंद्र सरकार ने आम जनता और बाजार के हित में गेहूं को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। सरकार ने गेहूं पर लगी 'स्टॉक लिमिट' (Stock Limit) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। इसके तहत, 27 May 2025 को जारी किए गए उस आदेश को वापस ले लिया गया है, जिसके जरिए व्यापारियों और रिटेलर्स पर गेहूं जमा करने की सीमा तय की गई थी।
सरकार का कहना है कि अब बाजार में गेहूं की उपलब्धता पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में है, इसलिए इस पाबंदी की अब कोई जरूरत नहीं है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस फैसले के पीछे क्या वजह है और इसका बाजार पर क्या असर पड़ेगा।
क्यों हटाई गई स्टॉक लिमिट?
सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि बाजार में गेहूं की सप्लाई बढ़ी है और कीमतों में गिरावट का रुख देखा जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, गेहूं की कीमतों में हाल ही में करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई है।
आपको बता दें कि मई 2025 में सरकार ने जमाखोरी रोकने और बढ़ती कीमतों को कंट्रोल करने के लिए ट्रेडर्स, होलसेलर्स और रिटेलर्स पर स्टॉक लिमिट लगाई थी। लेकिन अब जब दाम गिर रहे हैं और सप्लाई चेन सुचारू रूप से चल रही है, तो सरकार ने व्यापारियों को राहत देने का फैसला किया है।
हर शुक्रवार को देनी होगी जानकारी
भले ही स्टॉक लिमिट हटा दी गई है, लेकिन सरकार ने निगरानी कम नहीं की है। जमाखोरी को रोकने के लिए बनाए गए नियम अभी भी कड़े हैं। मार्केट में शामिल सभी पार्टिसिपेंट्स (व्यापारियों और होलसेलर्स) को हर हफ्ते अपने स्टॉक की जानकारी सरकार को देनी होगी। हर शुक्रवार को 'फूड स्टॉक पोर्टल' (Food Stock Portal) पर यह अपडेट देना अनिवार्य होगा।
सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लिमिट हटने का गलत फायदा उठाकर कोई जमाखोरी न शुरू कर दे।
गोदामों में गेहूं का बंपर स्टॉक
आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल गेहूं का स्टॉक काफी मजबूत स्थिति में है। अभी व्यापारियों के पास करीब 81 लाख टन का स्टॉक मौजूद है। यह पिछले साल की तुलना में 30 लाख टन ज्यादा है। यह बढ़ा हुआ स्टॉक साफ दर्शाता है कि देश में गेहूं की कोई कमी नहीं है।
किसानों ने बढ़ा दी गेहूं की खेती
इस साल रबी सीजन के दौरान किसानों ने गेहूं की बुआई में जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई है। एमएसपी (MSP) की गारंटी और सरकारी खरीद की बेहतर उम्मीदों के चलते किसानों ने गेहूं को अपनी प्राथमिकता बनाया है।
* इस साल का रकबा: 334.17 लाख हेक्टेयर
* पिछले साल का रकबा: 328.04 लाख हेक्टेयर
इस बार पिछले साल के मुकाबले करीब 6 लाख हेक्टेयर ज्यादा क्षेत्र में गेहूं की बुआई हुई है, जो आने वाले समय में बंपर पैदावार का संकेत है।
एक्सपोर्ट और नियमों पर क्या है अपडेट?
सरकार ने पिछले महीने ही 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं के एक्सपोर्ट (Export) को मंजूरी दी थी। हालांकि, एक्सपोर्ट को लेकर नियम अभी भी काफी सख्त हैं। WPPS के चेयरमैन अजय गोयल का कहना है कि सरकार ने एक्सपोर्ट पर ऐसे नियम लगाए हैं, जिनका पालन करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उनका मानना है कि अगर सरकार चाहती है कि एक्सपोर्ट हो, तो नियमों को आसान बनाना होगा।
अजय गोयल ने आगे कहा कि लिमिट लगने का बाजार पर निगेटिव असर पड़ता है। सरकार लगातार स्टॉक पर नजर बनाए हुए है। उम्मीद जताई जा रही है कि जून के मध्य तक सरकार गेहूं के एक्सपोर्ट पालिसी की समीक्षा कर सकती है।
डिमांड में आई कमी
बाजार के जानकारों का कहना है कि भले ही आम खपत (Consumption) बढ़ी हो, लेकिन पिछले एक साल में गेहूं के प्रोडक्ट्स की इंडस्ट्रियल डिमांड में गिरावट आई है। अजय गोयल के मुताबिक, देश में फसल अच्छी है, लेकिन इंडस्ट्रियल ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है।
कुल मिलाकर, स्टॉक लिमिट हटने से व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। उम्मीद है कि बंपर बुआई और स्टॉक की अच्छी उपलब्धता के चलते आने वाले दिनों में गेहूं और आटे के दाम काबू में रहेंगे, जिससे आम आदमी की जेब को राहत मिलेगी।

