China buying gold: चीन लगातार 15वें महीने सोना खरीदकर दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रहा है। अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड बेचकर वह अपनी डी-डॉलराइजेशन की नीति को मजबूती दे रहा है। जानें इसका वैश्विक बाजार पर क्या असर होगा।
China Gold Reserves: वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसका नेतृत्व चीन कर रहा है। चीन अपनी ‘डी-डॉलराइजेशन' (डॉलर पर निर्भरता कम करने) की रणनीति पर आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहा है। इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि चीन लगातार अमेरिकी बॉन्ड और डॉलर बेचकर सोने का विशाल भंडार खड़ा कर रहा है। यह सिलसिला पिछले 15 महीनों से बिना रुके जारी है, जिसने दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में हलचल मचा दी है।
लगातार 15वें महीने चीन ने खरीदा सोना
पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (चीन का केंद्रीय बैंक) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी महीने में भी चीन के सोने के भंडार में बढ़ोतरी हुई है। चीन का गोल्ड रिजर्व बढ़कर 74.19 मिलियन फाइन ट्रॉय औंस हो गया है, जो एक महीने पहले 74.15 मिलियन ट्रॉय औंस था। अगर मूल्य के हिसाब से देखें तो चीन के सोने के भंडार की कीमत एक महीने में 319.45 बिलियन डॉलर से बढ़कर 369.58 बिलियन डॉलर हो गई है। बढ़ते भू-राजनीतिक और आर्थिक जोखिमों के बीच, ड्रैगन की यह रणनीति सोने को एक सुरक्षित निवेश के रूप में और भी मजबूत बनाती है। चीन साफ तौर पर अपनी अर्थव्यवस्था को अमेरिकी डॉलर के प्रभाव से दूर ले जाना चाहता है।
सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव
चीन की इस आक्रामक खरीद और वैश्विक सट्टेबाजी के कारण जनवरी में सोने की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल आया। सोने का भाव 5600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, यह तेजी ज्यादा समय तक टिक नहीं पाई। जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले प्रमुख के रूप में केविन वॉर्श के नामांकन की खबर आई, तो बाजार का मूड बिगड़ गया। इसके बाद हाजिर बाजार में सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई और अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 4500 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी सोने में दिखा रहे रुचि
सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई केंद्रीय बैंक सोने को लेकर सतर्क लेकिन सकारात्मक रुख अपनाए हुए हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों के मुताबिक:
साल 2025 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने कुल 863 टन सोना खरीदा। यह आंकड़ा पिछले तीन सालों के मुकाबले कम है, जब हर साल 1000 टन से ज्यादा सोना खरीदा गया था। खरीदारी में इस कमी की मुख्य वजह सोने की आसमान छूती कीमतें रहीं, जिसके चलते बैंकों ने सावधानी बरती। WGC द्वारा किए गए एक सर्वे से पता चलता है कि 24 में से 22 केंद्रीय बैंकों ने अपने गोल्ड रिजर्व में वृद्धि की है। कई बड़े केंद्रीय बैंकों ने संकेत दिया है कि वे आने वाले वर्षों में जोखिम प्रबंधन के तहत अपने सोने के भंडार को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
चीन में घरेलू सोने की खपत घटी
एक तरफ जहां चीन का केंद्रीय बैंक रिकॉर्ड सोना खरीद रहा है, वहीं दूसरी ओर देश में आम लोगों के बीच सोने की खपत में थोड़ी कमी आई है। चीन गोल्ड एसोसिएशन के अनुसार, साल 2025 में चीन की कुल सोने की खपत 3.75% घटकर 950 मीट्रिक टन रह गई।
साफ है कि चीन वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में डॉलर के दबदबे को चुनौती देने के लिए सोने को एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। भले ही ऊंची कीमतों के कारण बाकी दुनिया के केंद्रीय बैंकों की खरीद की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई हो, लेकिन सोने पर उनका भरोसा बना हुआ है। यह ट्रेंड बताता है कि आने वाले समय में सोना वैश्विक अर्थव्यवस्था में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

