Cipla Share Price: LIC ने दिग्गज फार्मा कंपनी Cipla में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.09% कर ली है। जहां एक तरफ कमजोर नतीजों के कारण ब्रोकरेज ने रेटिंग घटाई है, वहीं LIC ने गिरावट में खरीदारी का मौका ढूंढा है। जानें पूरी खबर।
नई दिल्ली: शेयर बाजार में अक्सर कहा जाता है कि जब दूसरे डर रहे हों, तब बड़े निवेशक खरीदारी करते हैं। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) ने कुछ ऐसा ही किया है। दिग्गज फार्मा कंपनी Cipla Ltd के शेयरों में पिछले कुछ महीनों में गिरावट देखने को मिली है, लेकिन इसी दौरान LIC ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी में जोरदार इजाफा किया है।
LIC ने खरीदी 2% से ज्यादा हिस्सेदारी
ताजा आंकड़ों और एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, LIC ने पिछले 3 महीनों के भीतर सिप्ला में 2% से ज्यादा हिस्सेदारी खरीदी है। इस नई खरीद के बाद अब सिप्ला में LIC की कुल शेयरहोल्डिंग बढ़कर 9.09% हो गई है। यह खबर तब आई है जब कंपनी के शेयर दबाव में चल रहे हैं। इनफॉर्मिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, LIC लगातार इस फार्मा स्टॉक में अपना निवेश बढ़ा रही है और अब वह कंपनी की एक प्रमुख शेयरहोल्डर बन गई है।
कंपनी का मालिकाना हक (Shareholding Pattern)
सिप्ला के शेयरहोल्डिंग पैटर्न पर नजर डालें तो स्थिति कुछ इस प्रकार है:
प्रमोटर्स: 29.21%
पब्लिक शेयरहोल्डर्स (जिसमें LIC भी शामिल है): 70.79%
फिलहाल कंपनी का मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है और शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। BSE पर इसका मौजूदा भाव 1341.45 रुपये के आसपास चल रहा है।
क्यों गिरा है सिप्ला का शेयर?
बीते 3 महीनों में सिप्ला के शेयर में लगभग 12% की गिरावट आई है। इसका सबसे बड़ा कारण कंपनी के वित्तीय नतीजे और ब्रोकरेज हाउस की रिपोर्ट है। सिप्ला ने "अक्टूबर-दिसंबर 2025" तिमाही के लिए जो नतीजे पेश किए, वे बाजार की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे।
तिमाही मुनाफा: 6.76 अरब रुपये (कंसोलिडेटेड)।
रेवेन्यू: 70.74 अरब रुपये।
अमेरिका में बिक्री में कमी और कुछ खास दवाइयों की सप्लाई में रुकावट आने की वजह से निवेशकों का मूड थोड़ा खराब हुआ। इसी वजह से शेयर अपने 52 हफ्ते के हाई 1672.20 रुपये से फिसलकर नीचे आ गया है।
ब्रोकरेज हाउस ने दी सतर्क रहने की सलाह
उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन को देखते हुए कई बड़े ब्रोकरेज हाउस ने सिप्ला के शेयर को लेकर अपनी रेटिंग और टारगेट प्राइस में कटौती की है। मैनेजमेंट ने भी वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने EBITDA मार्जिन के अनुमान को घटाकर 21% कर दिया है, जो पहले 22.75% से 24% के बीच था।
ब्रोकरेज की राय:
Jefferies: स्टॉक को "अंडरपरफॉर्म" रेटिंग दी है और टारगेट प्राइस 1,170 रुपये तय किया है। उन्होंने अगले दो-तीन सालों के लिए EPS अनुमान में भी 19-21% की कटौती की है।
HSBC: रेटिंग को "होल्ड" कर दिया है और टारगेट घटाकर 1,285 रुपये कर दिया है।
Macquarie: हालांकि, मैक्वेरी ने अभी भी भरोसा बनाए रखा है और 1,490 रुपये के टारगेट के साथ "आउटपरफॉर्म" रेटिंग दी है।
जहां एक तरफ शॉर्ट टर्म की दिक्कतों और कमजोर नतीजों के कारण आम निवेशक और ब्रोकरेज सतर्क हैं, वहीं LIC जैसी बड़ी संस्थागत निवेशक (Institutional Investor) का हिस्सेदारी बढ़ाना यह संकेत देता है कि उन्हें कंपनी के लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर भरोसा है। अब देखना यह होगा कि सिप्ला आने वाले समय में सप्लाई की दिक्कतों को कैसे दूर करती है।
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