ट्रंप के ‘टेरिफ साम्राज्य' को हिलाने वाले भारतीय वक़ील: जानिए कौन हैं नील कात्याल

MoneySutraHub Team

 Neal Katyal: अमेरिका में भारतीय मूल के वकील नील कात्याल ने सुप्रीम कोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप के टेरिफ फैसले को चुनौती देकर ऐतिहासिक जीत हासिल की है। जानिए कौन हैं ओबामा के खास रहे नील कात्याल।

Neal Katyal, Donald Trump, US Supreme Court

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका की राजनीति और अदालतों के इतिहास में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करारा झटका देते हुए उनके टेरिफ (आयात शुल्क) थोपने के फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इस ऐतिहासिक जीत के पीछे जिस शख्स का दिमाग और दलीलें काम कर रही थीं, वे कोई और नहीं बल्कि भारतीय मूल के दिग्गज वकील नील कात्याल (Neal Katyal) हैं।


नील कात्याल ने कोर्ट में ऐसी ज़बरदस्त दलीलें पेश कीं कि कोर्ट को यह मानना पड़ा कि जनता पर टैक्स या टेरिफ लगाने का अधिकार किसी राष्ट्रपति का नहीं, बल्कि सिर्फ वहां की संसद (कांग्रेस) का है।


नाना व्यापारियों की आवाज़ बने नील कात्याल


यह लड़ाई सिर्फ एक कानूनी दांव-पेच नहीं थी, बल्कि छोटे व्यापारियों के हक की लड़ाई थी। छोटे व्यापारियों ने एकजुट होकर इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचाया था। नील कात्याल ने कोर्ट में 1977 के 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' का हवाला दिया।



उन्होंने जजों को समझाया कि ट्रंप प्रशासन ने इस एक्ट का गलत इस्तेमाल किया है और उनका फैसला संविधान के खिलाफ है। कात्याल की दलीलें इतनी सटीक थीं कि कोर्ट ने संविधान की मर्यादा को सबसे ऊपर रखा। जीत के बाद कात्याल ने गर्व से कहा, "आज अमेरिका में कानून का राज सबसे ऊपर साबित हुआ है। राष्ट्रपति चाहे कितने भी ताकतवर क्यों न हों, वे संविधान से ऊपर नहीं हो सकते।"


जानिए कौन हैं भारतीय मूल के नील कात्याल?


नील कात्याल अमेरिका के कानून जगत में एक बड़ा नाम हैं। उनकी कहानी काफी प्रेरणादायक है:


भारतीय जड़ें: नील के माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। उनका जन्म अमेरिका के शिकागो शहर में हुआ था।


करियर का चुनाव: उनके माता-पिता डॉक्टर और इंजीनियर थे, लेकिन नील ने अपने लिए वकालत का रास्ता चुना।


शिक्षा: उन्होंने दुनिया की प्रतिष्ठित येल लॉ स्कूल (Yale Law School) से पढ़ाई की है।


ओबामा कनेक्शन: साल 2010 में बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान उन्हें 'कार्यकारी सॉलिसिटर जनरल' (Acting Solicitor General) बनाया गया था। वे जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के साथ भी काम कर चुके हैं।


दुनिया के सबसे असरदार वकीलों में गिनती


नील कात्याल की उपलब्धियों की लिस्ट बहुत लंबी है। वे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में सबसे ज़्यादा केस लड़ने वाले पहले अल्पसंख्यक वकील हैं। इससे पहले वे 'वोटिंग राइट्स एक्ट' और ट्रंप के विवादित 'ट्रैवल बैन' के खिलाफ भी मज़बूती से लड़ चुके हैं। कानून के क्षेत्र में उनकी शानदार सेवाओं के लिए उन्हें अमेरिका के न्याय विभाग (Justice Department) की ओर से नागरिक सम्मान भी मिल चुका है।फोर्ब्स (Forbes) जैसी बड़ी मैगजीन ने उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली वकीलों की लिस्ट में शामिल किया है।


नील कात्याल की यह जीत साबित करती है कि अगर इरादे मज़बूत हों और कानून की समझ गहरी हो, तो सत्ता के बड़े से बड़े फैसले को भी चुनौती दी जा सकती है।


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