हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम क्यों हो जाता है रिजेक्ट? पॉलिसी खरीदने से पहले गांठ बांध लें ये 4 जरूरी बातें

MoneySutraHub Team

 Health Insurance Claim Rejection: क्या आपका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम भी अटक जाता है? जानिए क्लेम रिजेक्ट होने के असली कारण और पॉलिसी लेते समय किन 4 बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

Health Insurance Claim Rejection

Health Insurance Claim Rejection: आजकल इलाज का खर्च इतना बढ़ गया है कि शहरों और कस्बों में हर कोई अपने परिवार की सुरक्षा के लिए हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) ले रहा है। बीमा लेना एक समझदारी भरा फैसला है, लेकिन समस्या तब आती है जब जरूरत के समय क्लेम (Claim) अटक जाता है या खारिज हो जाता है। अक्सर लोगों को लगता है कि बीमा कंपनी ने मनमानी की है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके पीछे अक्सर जानकारी की कमी या पॉलिसी की शर्तें होती हैं।


अगर आप भी चाहते हैं कि मुसीबत के समय आपका क्लेम बिना किसी झंझट के पास हो जाए, तो आपको कुछ जरूरी बातें जान लेनी चाहिए।


क्लेम रिजेक्ट होने की असली वजह क्या है?


बीमा विशेषज्ञों के मुताबिक, क्लेम खारिज करना कंपनियों का कोई मनमाना फैसला नहीं होता। यह पूरी तरह से पॉलिसी के नियमों पर निर्भर करता है। सबसे ज्यादा दिक्कतें 'पहले से मौजूद बीमारियों' (Pre-existing diseases) और 'वेटिंग पीरियड' (Waiting Period) को लेकर आती हैं। ये नियम पूरे इंश्योरेंस सेक्टर में लगभग एक जैसे होते हैं और इन्हें सख्ती से रेगुलेट किया जाता है ताकि काम में पारदर्शिता बनी रहे।


बीमारी छिपाना पड़ सकता है भारी


विवाद की सबसे बड़ी जड़ ‘अधूरी जानकारी' है। इंश्योरेंस सेक्टर के जानकारों का कहना है कि पॉलिसी खरीदते समय फॉर्म में सही जानकारी देना बेहद जरूरी है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति ने पॉलिसी लेने से पहले डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर का इलाज कराया है और फॉर्म भरते समय इसका जिक्र नहीं किया, तो बाद में क्लेम मिलने में बड़ी दिक्कत आ सकती है।


याद रखें, बीमारी बताने का मतलब यह नहीं है कि आपको बीमा नहीं मिलेगा। कई बार कंपनियां कुछ शर्तें या वेटिंग पीरियड लगाकर आपको कवरेज दे देती हैं। लेकिन अगर आप सच बताएंगे, तो आपको और कंपनी दोनों को पता होगा कि क्लेम के दायरे में क्या आता है और क्या नहीं।


क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?


स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, अमिताभ जैन बताते हैं कि हर क्लेम की जांच एक तय प्रक्रिया के तहत होती है। उन्होंने कहा, "क्लेम का फैसला इस बात पर होता है कि पॉलिसी लेते समय आपने क्या जानकारी दी थी। पूरी और ईमानदार जानकारी देना बहुत जरूरी है।"


उन्होंने आगे समझाया कि अगर मेडिकल रिकॉर्ड में कोई ऐसी पुरानी बीमारी निकलती है जो आपने छिपाई थी, तो पॉलिसी की शर्तों और वेटिंग पीरियड के हिसाब से क्लेम रोका जा सकता है। अगर आपके डॉक्यूमेंट्स और जानकारी सही है, तो ज्यादातर क्लेम आसानी से पास हो जाते हैं। अब तो तकनीक की मदद से क्लेम प्रोसेस करने की रफ्तार भी काफी तेज हो गई है।


पॉलिसीधारकों के लिए 4 जरूरी सलाह


अगर आप चाहते हैं कि आपका क्लेम कभी न अटके, तो इन 4 बातों का हमेशा ध्यान रखें:


पॉलिसी को ध्यान से पढ़ें: दस्तावेजों में लिखी हर शर्त को समय निकालकर जरूर पढ़ें।


ईमानदारी बरतें: अगर आप कोई दवा ले रहे हैं या पहले कोई इलाज करवाया है, तो उसकी जानकारी कंपनी को जरूर दें।


वेटिंग पीरियड चेक करें: पता करें कि किस बीमारी के लिए कितने साल का वेटिंग पीरियड (प्रतीक्षा अवधि) है।


रिकॉर्ड संभाल कर रखें: अपने सभी मेडिकल रिकॉर्ड और दस्तावेज सुरक्षित रखें ताकि जरूरत पड़ने पर दिखाए जा सकें।


बीमा आपकी सुरक्षा के लिए है। थोड़ी सी समझदारी और पारदर्शिता से आप न सिर्फ क्लेम रिजेक्शन से बच सकते हैं, बल्कि मुश्किल समय में अपने परिवार को आर्थिक तनाव से भी दूर रख सकते हैं।


यह भी पढेंः- Tata MF Report: क्या AI पलटेगा IT सेक्टर की बाजी? हार्डवेयर के बाद अब सर्विस की बारी, निवेशकों के लिए बड़े संकेत


#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top