सोने-चांदी की चमक से म्युचुअल फंड्स हुए गुलजार: 18 महीने में सबसे ज्यादा नए निवेशक जुड़े, इक्विटी को भी पछाड़ा

MoneySutraHub Team

 Mutual Fund Investment: जनवरी में म्युचुअल फंड्स में 12 लाख नए निवेशक जुड़े, जो 18 महीनों का रिकॉर्ड है। जानिए कैसे सोने-चांदी की तेजी ने गोल्ड ETFs को इक्विटी से ज्यादा लोकप्रिय बना दिया।

Mutual Fund Investment: सोने-चांदी की चमक ने बदली निवेश की तस्वीर


Mutual Fund Investment: क्या आपने गौर किया है कि पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी के भाव किस तरह आसमान छू रहे हैं? यह सिर्फ खबर नहीं है, बल्कि इसने भारत में लोगों के निवेश करने के तरीके को भी बदल दिया है। जनवरी का महीना भारतीय म्युचुअल फंड (Mutual Fund) इंडस्ट्री के लिए बेहद खास रहा। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि जनवरी में म्युचुअल फंड में नए निवेशकों की संख्या में जो उछाल आया है, वह पिछले 18 महीनों में सबसे ज्यादा है।


अक्सर हम सुनते हैं कि लोग शेयर बाजार या इक्विटी फंड्स के पीछे भाग रहे हैं, लेकिन इस बार कहानी थोड़ी अलग है। इस बार निवेशकों को जिस चीज ने सबसे ज्यादा आकर्षित किया है, वह है सोना और चांदी। कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने लोगों को पारंपरिक गहनों से हटाकर 'पेपर गोल्ड' यानी गोल्ड ईटीएफ (ETF) और फंड ऑफ फंड्स (FoF) की तरफ मोड़ा है।


आंकड़े क्या कहते हैं? 12 लाख नए साथी


जनवरी का महीना म्युचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए बंपर साबित हुआ। सिर्फ एक महीने के भीतर 12 लाख नए निवेशक इस बाजार से जुड़े। यह आंकड़ा छोटा नहीं है। अगर हम इसकी तुलना साल 2025 से करें, तो यह उछाल हैरान करने वाला है। 2025 में हर महीने औसतन 5 लाख नए निवेशक जुड़ रहे थे, लेकिन जनवरी में यह संख्या दोगुनी से भी ज्यादा हो गई।


इस भारी बढ़ोतरी के साथ ही देश में म्युचुअल फंड निवेशकों की कुल संख्या अब 6.02 करोड़ के पार पहुंच गई है। यह दर्शाता है कि अब आम भारतीय भी अपनी बचत को बैंक खाते में रखने के बजाय उसे बाजार में निवेश कर बढ़ाना चाहता है।


इक्विटी नहीं, इस बार गोल्ड है हीरो


आमतौर पर जब म्युचुअल फंड की बात होती है, तो लोगों का ध्यान एक्टिव इक्विटी स्कीम्स (Active Equity Schemes) पर जाता है। लेकिन जनवरी में बाजी सोने और चांदी ने मार ली। गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (Exchange Traded Funds) ने न सिर्फ नए खाते खोलने (फोलियो ग्रोथ) में, बल्कि शुद्ध निवेश (Net Investment) के मामले में भी इक्विटी योजनाओं को पीछे छोड़ दिया।


आंकड़े बताते हैं कि जनवरी में जितने भी नए फोलियो (निवेशकों के खाते) खुले, उनमें से 55 फीसदी हिस्सा गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ का था। इसका सीधा मतलब है कि आधे से ज्यादा नए निवेशक शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बजाय सोने की चमक पर भरोसा जता रहे हैं।


निवेश की रकम भी इस रुझान की गवाही देती है। कीमती धातुओं से जुड़े फंड ऑफ फंड्स (FoF) में कुल मिलाकर 33,503 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। यह रकम एक्टिव इक्विटी योजनाओं में आए शुद्ध निवेश से करीब 40 फीसदी ज्यादा थी। यह स्पष्ट संकेत है कि निवेशक अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित करने के लिए कमोडिटी की तरफ भाग रहे हैं।


क्यों हो रहा है ऐसा? एक्सपर्ट की राय


आखिर अचानक सोने और चांदी के फंड्स में इतनी दिलचस्पी क्यों जगी? इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है 'रिटर्न'। पिछले कुछ समय में सोने और चांदी की कीमतों में जो तेजी आई है, उसने निवेशकों को जबरदस्त मुनाफा दिया है। चाहे वो छोटे समय के लिए निवेश करने वाले हों या लंबी अवधि के लिए, दोनों को ही अच्छा रिटर्न मिला है।


मिरे ऐसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) के वाइस चेयरमैन और सीईओ, स्वरूप आनंद मोहंती ने इस पर बहुत ही दिलचस्प बात कही है। उनका मानना है कि गोल्ड स्कीम्स में फंड इंडस्ट्री के लिए 'कस्टमर एक्विजिशन' यानी नए ग्राहक जोड़ने का सबसे बड़ा जरिया बनने की ताकत है।


इसके पीछे वजह बहुत साफ और भावनात्मक है। भारत में सोना सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि एक संस्कृति है। हर भारतीय परिवार का सोने से गहरा जुड़ाव होता है। जब लोगों को यह विकल्प मिलता है कि वे बिना लॉकर की चिंता किए, कम पैसों में और सुरक्षित तरीके से सोने में निवेश कर सकते हैं, तो वे इसे हाथों-हाथ लेते हैं। मोहंती के अनुसार, गोल्ड ईटीएफ की यह स्वीकार्यता इसे लंबी अवधि में इंडस्ट्री के लिए एक प्रमुख आकर्षण बना सकती है।


नए और पुराने, दोनों निवेशकों की पसंद


बाजार के जानकारों का कहना है कि यह तेजी सिर्फ नए निवेशकों तक सीमित नहीं है। जो लोग पहले से म्युचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं, वे भी अपने पोर्टफोलियो को बैलेंस करने के लिए सोने-चांदी की तरफ मुड़ रहे हैं। वहीं, जो लोग पहली बार निवेश की दुनिया में कदम रख रहे हैं (First Time Investors), उनके लिए शेयर बाजार की जटिलता के मुकाबले गोल्ड ईटीएफ में निवेश करना ज्यादा आसान और सुरक्षित लगता है।


सोने की कीमतों में स्थिरता और भविष्य में इसके और बढ़ने की उम्मीद ने इसे 'सेफ हेवन' (Safe Haven) बना दिया है। जब भी दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता होती है या महंगाई बढ़ती है, सोना चमकने लगता है, और यही ट्रेंड अभी हम देख रहे हैं।


जनवरी के ये आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि भारतीय निवेशक अब ज्यादा स्मार्ट हो रहे हैं। वे अब सिर्फ एफडी (FD) या बचत खातों तक सीमित नहीं हैं, और न ही वे आंख मूंदकर शेयर बाजार में पैसा लगा रहे हैं। वे वहां जा रहे हैं जहां मुनाफा और सुरक्षा दोनों है।


12 लाख नए निवेशकों का जुड़ना और गोल्ड ईटीएफ का इक्विटी को पछाड़ना यह बताता है कि आने वाले समय में कमोडिटी आधारित म्युचुअल फंड्स भारतीय बाजार में एक बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं। अगर आपने अभी तक अपने निवेश में विविधता (Diversification) नहीं लाई है, तो शायद यह सही समय है कि आप भी सोने-चांदी की इस डिजिटल चमक पर गौर करें।


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Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। MoneysutraHub.in अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

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