शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों का दबदबा: विदेशी निवेशक घबराए, लेकिन भारतीयों ने खरीदे 21,897 करोड़ के शेयर

Keyur Raval

Retail investors: ईरान युद्ध के बीच विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, लेकिन रिटेल निवेशकों ने 21,897 करोड़ रुपये का निवेश कर बाजार को मजबूती दी है। पढ़ें पूरी खबर।


Retail investors
Indian stock market


मुंबई, 4 जून: शेयर बाजार में इन दिनों एक बेहद दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिल रहा है। पश्चिमी एशिया में तनाव और ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) शेयर बाजार से दूरी बनाए हुए हैं। लेकिन दूसरी तरफ, भारत के आम रिटेल निवेशक बिना घबराए लगातार शेयर खरीद रहे हैं।


आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च से अब तक आम रिटेल निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगभग 21,897 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश किया है। वहीं, इसी समय सीमा के दौरान विदेशी निवेशकों (FPI) ने बाजार से कुल 2.3 लाख करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की है।


अप्रैल में हुई बंपर खरीदारी


अकेले अप्रैल महीने की बात करें तो छोटे निवेशकों ने 19,664 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यह अक्टूबर 2024 के बाद से उनकी सबसे बड़ी मासिक खरीदारी रही है। हालांकि, मई के महीने में ट्रेंड थोड़ा बदला और वे 607 करोड़ रुपये के नेट सेलर (बिकवाल) रहे।


बाजार में क्यों बढ़ा रिटेल निवेशकों का भरोसा?


भले ही विदेशी निवेशक डरे हुए हों, लेकिन भारतीय निवेशकों का आत्मविश्वास चरम पर है। इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हैं:


गिरावट में मौका: शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि SIP (सिप) के जरिए निवेश करना अब भारतीयों की आदत बन चुका है। निवेशक अब समझ गए हैं कि जब बाजार गिरता है, तो वह निवेश का सबसे बेहतरीन समय होता है। घबराहट का दौर हमेशा नहीं रहता और बाजार अंततः रिकवर कर ही लेता है।


आकर्षक शेयर: बाजार में आए करेक्शन (गिरावट) की वजह से कई शानदार मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयर काफी आकर्षक भाव पर आ गए हैं, जिसे निवेशक हाथों-हाथ ले रहे हैं।


शानदार नतीजे: मार्च तिमाही की कमाई के नतीजों में कोई भी नकारात्मक (नेगेटिव) खबर नहीं आई है। इससे निवेशकों का विश्वास और भी मजबूत हुआ है।


घरेलू संस्थाओं ने भी दिया बड़ा सहारा


सीधे तौर पर शेयर खरीदने के अलावा, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी मार्च से अब तक इक्विटी मार्केट में 2.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। इन संस्थाओं में मुख्य रूप से म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और पेंशन फंड शामिल हैं। ये संस्थाएं SIP, इंश्योरेंस प्रीमियम और रिटायरमेंट प्लान के जरिए आम जनता की बचत का ही पैसा बाजार में लगाती हैं।


आगे कैसा रहेगा बाजार?


मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि विदेशी निवेशक (FPI) अपना पैसा आसानी से एक देश से निकालकर दूसरे देश में लगा सकते हैं। लेकिन, भारतीय निवेशकों के पास स्थानीय स्तर पर ही बेहतरीन मौके तलाशने का विकल्प होता है। इसलिए, वे बाजार के निचले स्तरों पर जमकर खरीदारी करते हैं।


करीब 18 से 20 महीनों के लंबे इंतजार के बाद अब स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों ने फिर से शानदार प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। हाल ही में आई कंपनियों की कमाई के नतीजे भी काफी अच्छे रहे हैं। ऐसे में अगर इन शेयरों का प्रदर्शन आगे भी ऐसा ही रहा, तो रिटेल निवेशकों का निवेश और उनका भरोसा बाजार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।


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