Corporate Bonds 2026: बॉन्ड मार्केट को लगा झटका! अप्रैल-मई में बॉन्ड जारी करने में 58% की भारी गिरावट, बैंक लोन की तरफ भागी कंपनियां

Keyur Raval

Corporate Bonds 2026: अप्रैल-मई 2024 में कॉर्पोरेट बॉन्ड जारी करने में 58% की बड़ी गिरावट आई है। महंगा कर्ज होने के कारण कंपनियां अब बॉन्ड के बजाय बैंक लोन लेना ज्यादा पसंद कर रही हैं।


Corporate Bonds 2026
Corporate Bonds 2026

मुंबई, 4 जून: आज के समय में किसी भी कंपनी को अपना कारोबार बढ़ाने के लिए पैसों की जरूरत होती है। इसके लिए कंपनियां मुख्य रूप से दो रास्ते अपनाती हैं- या तो वे बाजार में बॉन्ड जारी करती हैं, या फिर बैंकों से लोन लेती हैं। लेकिन, इन दिनों कॉर्पोरेट जगत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कंपनियां बॉन्ड मार्केट से मुंह मोड़कर बैंकों की तरफ दौड़ लगा रही हैं।


हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष (2024) के शुरुआती दो महीनों यानी अप्रैल और मई में कंपनियों द्वारा बॉन्ड जारी करने में भारी कमी आई है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि मौजूदा समय में बॉन्ड के जरिए पैसा जुटाना कंपनियों को काफी महंगा पड़ रहा है।


आंकड़े क्या कहते हैं?


बॉन्ड में गिरावट: अप्रैल-मई में भारतीय कंपनियों ने बॉन्ड के जरिए केवल 1.07 ट्रिलियन रुपये जुटाए हैं। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में यह आंकड़ा 58% कम है। यह पिछले 3 सालों का सबसे निचला स्तर है।


बैंक लोन में उछाल: दूसरी तरफ, बैंक से कर्ज लेने की रफ्तार तेजी से बढ़ी है। 15 मई को खत्म हुए पखवाड़े में बैंक क्रेडिट ग्रोथ (बैंक ऋण वृद्धि) 16.20% दर्ज की गई, जो पिछले 2 सालों के उच्चतम स्तर (Top) पर है।


बॉन्ड क्यों हो रहे हैं महंगे?


मार्केट एक्सपर्ट्स और विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहा युद्ध और तनाव है। इस जियो-पॉलिटिकल टेंशन की वजह से बॉन्ड पर ब्याज दरें काफी बढ़ गई हैं।


युद्ध की शुरुआत के बाद से 10 साल के सरकारी बॉन्ड (G-Sec) पर यील्ड (प्रतिफल) करीब 35 बेसिस पॉइंट बढ़कर लगभग 7% के आसपास पहुंच गया है। दरें बढ़ने के कारण कंपनियों के लिए बॉन्ड से पैसा उठाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। यही वजह है कि ज्यादातर कंपनियां अब बैंकों से लोन लेने को ज्यादा आसान और फायदेमंद मान रही हैं।


आम आदमी (FD निवेशकों) के लिए क्या है खुशखबरी?


कंपनियों द्वारा बैंक लोन की मांग अचानक बढ़ने से बैंकों पर भी दबाव पड़ा है। लोन बांटने के लिए बैंकों को भी पैसों की जरूरत होती है। इसलिए, ग्राहकों से ज्यादा से ज्यादा डिपॉजिट (जमा राशि) हासिल करने के लिए बैंक अब फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर काफी आकर्षक और ऊंचे ब्याज दर ऑफर कर रहे हैं।


फिलहाल बॉन्ड मार्केट की नजरें पश्चिम एशिया के हालात पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक युद्ध की स्थिति शांत नहीं होती और मैक्रो-इकोनॉमिक (व्यापक आर्थिक) हालात में सुधार नहीं आता, तब तक कंपनियों का झुकाव बैंक लोन की तरफ ही बना रहेगा।


यह भी पढेंः- शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों का दबदबा: विदेशी निवेशक घबराए, लेकिन भारतीयों ने खरीदे 21,897 करोड़ के शेयर


डिस्क्लेमर: यहां पर दिए गए विचार और इन्वेस्टमेंट सलाह इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के अपने विचार और सलाह हैं। MoneysutraHub.in यूज़र्स को सलाह देता है कि कोई भी इन्वेस्टमेंट का फैसला लेने से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top