Rajesh Exports scam: 1200 रुपये से कंपनी शुरू कर किया 15.15 लाख करोड़ का 'खेला'? पढ़ें राजेश एक्सपोर्ट्स और SEBI विवाद की पूरी कहानी

Keyur Raval

Rajesh Exports scam: SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर पर 15.15 लाख करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया है। जानिए कैसे 1200 रुपये से शुरू हुई यह कंपनी इतने बड़े विवाद में फंसी और निवेशकों को क्या नुकसान हुआ।


Rajesh Exports scam
SEBI bans Rajesh Mehta



अहमदाबाद, 6 जून: एक समय था जब कॉर्पोरेट जगत में 'राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड' की सफलता की मिसालें दी जाती थीं। दुनिया की सबसे बड़ी स्विस रिफाइनरी खरीदकर इस कंपनी ने विश्व स्तर पर अपना डंका बजाया था। लेकिन आज यही कंपनी भारतीय शेयर बाजार के इतिहास के सबसे बड़े विवादों में से एक में फंस गई है।


बाजार नियामक SEBI (सेबी) ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर-चेयरमैन राजेश मेहता पर 15.15 लाख करोड़ रुपये की आय में हेराफेरी और धोखाधड़ी के आरोप में अंतरिम प्रतिबंध लगा दिया है। यह रकम इतनी बड़ी है कि कई छोटे देशों की कुल जीडीपी (GDP) भी इसके आगे फीकी पड़ जाए। सेबी के इस एक्शन के बाद कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट आई है। हालांकि, राजेश मेहता का लगातार यही कहना है कि, "मेरी कंपनी की आय बिल्कुल सही है, हमने कुछ भी गलत नहीं किया है।" आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर यह पूरा मामला क्या है।


कैसे शुरू हुई SEBI की जांच?


इस बड़े विवाद की शुरुआत 11 मार्च 2024 को हुई। तब सेबी को एक शेयरधारक से शिकायत मिली थी। शिकायत में कहा गया था कि कंपनी के पास 2 साल से ज्यादा समय से बहुत बड़ी मात्रा में ट्रेड रिसीवेबल्स (Trade Receivables) यानी बाजार से आने वाला पैसा बकाया है, जो सामान्य नहीं है। इसके बाद SEBI ने अक्टूबर 2024 में एक जांच अधिकारी और फॉरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति की।


15.15 लाख करोड़ की 'मायाजाल' का खुलासा


सेबी ने अपनी 109 पन्नों की अंतरिम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने अपनी कुल आय (Consolidated Revenue) में करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये की गलत जानकारी दी है।


आय में भारी गड़बड़ी: कंपनी ने अपनी 97% से 99% आय अपनी विदेशी सहायक कंपनियों (खासकर स्विस कंपनी 'वाल्कैम्बी') से आनी बताई थी। लेकिन फॉरेंसिक ऑडिट में सामने आया कि ग्रुप लेवल पर दिखाई गई आय और सहायक कंपनियों के असली रिकॉर्ड में कोई मेल ही नहीं है। यह गड़बड़ी कुल आय का लगभग 99.8% है।


जांच में सहयोग नहीं: सेबी का आरोप है कि कंपनी और उसके ऑडिटर्स ने जांच में बिल्कुल सहयोग नहीं किया। उन्होंने ऑडिट से जुड़े जरूरी कागजात और ग्राहकों-विक्रेताओं के अहम दस्तावेज भी नहीं सौंपे।


जांच में सामने आए अन्य शंकास्पद लेनदेन


सेबी को सिर्फ आय में ही नहीं, बल्कि कई अन्य मामलों में भी भारी हेराफेरी मिली है:


अफ्रीकी सोने की खदान का रहस्य: कंपनी ने बताया था कि उसने अफ्रीका में सोने की खदान में 1,035 करोड़ रुपये का निवेश किया है। लेकिन सेबी को इस निवेश के होने या इसकी सही कीमत का कोई भी सबूत नहीं मिला।


शेयरों की खरीद-बिक्री में झोल: राजेश एक्सपोर्ट्स ने 'एफ्लुएंस शेयर्स एंड स्टॉक्स प्रा. लि.' के साथ 11,487 करोड़ रुपये की बिक्री और 11,488 करोड़ रुपये की खरीद दिखाई थी। लेकिन जब जांच हुई, तो एफ्लुएंस कंपनी ने साफ कह दिया कि राजेश एक्सपोर्ट्स तो कभी उनका क्लाइंट रहा ही नहीं।


फंड डायवर्जन (पैसों की हेराफेरी): आरोप है कि बोर्ड की बिना मंजूरी लिए कंपनी के खाते से 7.4 करोड़ रुपये सीधे राजेश मेहता के निजी बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। इन पैसों का इस्तेमाल उन्होंने अपने पर्सनल ट्रेडिंग के लिए किया।


कंपनी की सफाई और बाजार का हाल


राजेश एक्सपोर्ट्स ने सेबी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि यह कोई अंतिम आदेश नहीं है। उनके मुताबिक, सेबी और कंपनी के बीच सिर्फ एक 'कम्युनिकेशन गैप' (बातचीत की कमी) है, जिसे जल्द ही सभी जरूरी दस्तावेज जमा करके दूर कर लिया जाएगा। लेकिन निवेशकों ने इस सफाई को नहीं माना और कंपनी के शेयर में 5% का लोअर सर्किट लग गया।


कभी 1200 रुपये उधार लेकर शुरू किया था बिजनेस


20 जून 1964 को बेंगलुरु के एक मध्यमवर्गीय जैन परिवार में जन्मे राजेश मेहता कभी डॉक्टर बनना चाहते थे। उनके पिता 1946 में गुजरात के मोरबी से बेंगलुरु आए थे और कीमती पत्थरों का छोटा व्यापार करते थे। 1980 के दशक में राजेश ने अपने बड़े भाई से सिर्फ 1200 रुपये उधार लेकर अपने भाई प्रशांत के साथ ज्वेलरी का बिजनेस शुरू किया। वे चेन्नई से गहने खरीदते और गुजरात-मुंबई में मुनाफा लेकर बेचते थे।


1989 में उन्होंने 10 कारीगरों के साथ 'राजेश एक्सपोर्ट्स' की नींव रखी। 1995 में कंपनी 10 करोड़ रुपये के IPO के साथ शेयर बाजार में लिस्ट हुई। 1998 में उन्होंने 'शुभ ज्वेलर्स' के नाम से रिटेल स्टोर खोले, जिनकी संख्या आज 81 है। 2015 में इस कंपनी ने तब पूरी दुनिया को चौंका दिया, जब इसने 400 मिलियन डॉलर में दुनिया की सबसे बड़ी स्विस गोल्ड रिफाइनरी 'वाल्कैम्बी' (Valcambi) को खरीद लिया। 2017 में फोर्ब्स ने राजेश मेहता को 2.6 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ भारत का 61वां सबसे अमीर व्यक्ति बताया था।


LIC और बैंकों को लगा तगड़ा झटका


LIC का भारी नुकसान: इस विवाद से सरकारी बीमा कंपनी LIC को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि LIC के पास इस कंपनी की 10.80% हिस्सेदारी है। सेबी के अनुमान के मुताबिक, इस पूरे मामले में शेयरधारकों के करीब 12,726 करोड़ रुपये डूब सकते हैं।


केनरा बैंक का एक्शन: शेयर बाजार के अलावा बैंकों ने भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। केनरा बैंक ने राजेश एक्सपोर्ट्स के 509 करोड़ रुपये के लोन को 'स्ट्रेस्ड एसेट' घोषित कर दिया है और पैसे वसूलने के लिए नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी है।


निवेशकों के लिए एक बड़ी सीख


मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह मामला आम निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक है। कंपनी चाहे कितनी भी बड़ी या मशहूर क्यों न हो, आंख मूंदकर पैसा नहीं लगाना चाहिए। सिर्फ बड़ी कमाई के आंकड़े देखने के बजाय, कंपनी के काम करने के तरीके (Corporate Governance), ऑडिटर्स की रिपोर्ट और पैसों की पारदर्शिता पर हमेशा नजर रखनी चाहिए।


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