दुनिया देखती रह गई! संकट के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था ने भरी उड़ान, Q4 में 7.8% रहा GDP ग्रोथ रेट

Keyur Raval

India GDP Growth: पूरी दुनिया के आर्थिक संकट और तनाव के बीच भारत का Q4 GDP ग्रोथ रेट 7.8% रहा है। जानें कैसे भारतीय अर्थव्यवस्था ने सभी एक्सपर्ट्स के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया।


India GDP Growth
India GDP Growth


नई दिल्ही, 5 जूनः जब पूरी दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट के तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मंदी के डर से कांप रही है, तब भारत ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था ने सारी चिंताओं को किनारे करते हुए एक ऐसी मजबूती दिखाई है कि बड़े-बड़े आर्थिक एक्सपर्ट्स भी सोच में पड़ गए हैं।


Q4 में अनुमान से कहीं ज्यादा रहा GDP ग्रोथ रेट


शुक्रवार को सरकार की तरफ से जारी किए गए नए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4 - जनवरी से मार्च) में भारत का GDP विकास दर 7.8% दर्ज किया गया है।


फेल हुए एक्सपर्ट्स के सारे अनुमान


यह आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि देश और दुनिया के ज्यादातर अर्थशास्त्रियों को इतनी बड़ी छलांग की उम्मीद नहीं थी। ज्यादातर रेटिंग एजेंसियों और जानकारों का मानना था कि Q4 में GDP ग्रोथ 7 से 7.2% के बीच रहेगी। लेकिन, भारत के शानदार प्रदर्शन ने इन सारे अनुमानों को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है।


पूरे साल का रिपोर्ट कार्ड: 7.7% रहा रियल GDP ग्रोथ


सिर्फ एक तिमाही नहीं, बल्कि पूरे साल का रिजल्ट भी शानदार रहा है। अगर हम पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो भारत का रियल GDP ग्रोथ रेट 7.7% रहा है। आपको बता दें कि इससे पिछले साल (2024-25) यह आंकड़ा 7.1% था।


यह साफ दिखाता है कि भारत के विकास की रफ्तार कम नहीं हो रही, बल्कि लगातार बढ़ रही है। इन शानदार आंकड़ों के साथ ही भारत ने दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह और भी पक्की कर ली है।


कहां से आ रही है अर्थव्यवस्था में इतनी ताकत?


भारत की इस सुपरफास्ट ग्रोथ के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:


सरकारी निवेश: सरकार की तरफ से इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क और रेलवे जैसे बड़े सेक्टर्स में जमकर पैसा लगाया जा रहा है।


बढ़ती डिमांड (खपत): लोकल मार्केट में आम लोगों की खरीदारी करने की क्षमता बढ़ी है और बाजार के ट्रेंड में काफी सुधार देखा जा रहा है।


मजबूत सर्विस सेक्टर: पूरी दुनिया के आर्थिक दबाव के बावजूद भारत का IT और सर्विस सेक्टर एकदम मजबूती के साथ खड़ा है।


आने वाले समय में लग सकता है 'स्पीड ब्रेकर'


एक तरफ जहां ये आंकड़े जोश भरते हैं, वहीं जानकारों ने आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुछ चेतावनियां भी जारी की हैं। ग्लोबल मार्केट में छाई अनिश्चितता और दुनियाभर में चीजों की कमजोर डिमांड के कारण आने वाले समय में भारत की विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है।


देश के सामने क्या हैं सबसे बड़ी चुनौतियां?


भारत के लिए सबसे बड़ा माइनस पॉइंट यह है कि हम अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदते हैं। अगर मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव और बढ़ता है और सप्लाई चेन में कोई भी रुकावट आती है, तो ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) के दाम आसमान छू सकते हैं। अगर ऐसा हुआ, तो इसका सीधा और निगेटिव असर भारत की महंगाई, व्यापार घाटे और देश की आर्थिक ग्रोथ पर देखने को मिल सकता है।


निष्कर्ष के तौर पर कहें तो भारत की अर्थव्यवस्था आज एक मजबूत स्थिति में है, लेकिन ग्लोबल मार्केट की हलचल पर सरकार को पैनी नजर बनाए रखनी होगी।


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