US-Iran War: ट्रंप का बड़ा ऐलान, ईरान को दी थी पूरी सभ्यता मिटाने की धमकी; 2 हफ्ते के लिए थमा युद्ध का तांडव!

MoneySutraHub Team

US Iran War Ceasefire: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 2 हफ्ते के सीजफायर का ऐलान किया। धमकी दी थी कि सभ्यता मिटा देंगे। क्या है पूरा मामला और आगे क्या होगा? जानें विस्तृत रिपोर्ट।


US Iran War Ceasefire



नई दिल्ली, 8 अप्रैलः पश्चिम एशिया में पिछले कुछ समय से चल रहे तनाव और विनाशकारी युद्ध के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण जंग पर फिलहाल के लिए लगाम लग गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 सप्ताह के लिए सीजफायर (युद्धविराम) का ऐलान किया है। यह घोषणा उस वक्त की गई, जब ईरान को दी गई डेडलाइन खत्म होने में महज 2 घंटे का समय बचा था।


धमकी का असर या शांति की नई शुरुआत?


कुछ घंटों पहले तक हालात बेहद तनावपूर्ण थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी दी थी कि अगर मंगलवार तक कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स, पुलों और सभी मुख्य नागरिक ठिकानों को बर्बाद कर देगा। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक बेहद सख्त पोस्ट में कहा था कि "आज रात एक पूरी सभ्यता मर जाएगी और उसे कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा।" इस धमकी ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी थी।


लेकिन, डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले ट्रंप का रुख नरम पड़ा। उन्होंने बताया कि ईरान की ओर से 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव मिला है, जो काम करने योग्य है। इसके बाद ही युद्धविराम पर सहमति बनी है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के साथ इस युद्ध की शुरुआत हुई थी।


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अभी भी सस्पेंस बरकरार


सीजफायर भले ही लागू हो गया हो, लेकिन इसकी राह पूरी तरह आसान नहीं है। ट्रंप ने अपनी शर्तों में स्पष्ट कर दिया है कि यह युद्धविराम तभी कायम रहेगा, जब ईरान 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) समुद्री रास्ते को पूरी तरह सुरक्षित करे और इसे बिना किसी रोक-टोक के खोलने के लिए तैयार हो।



हालांकि, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के एक बयान ने अभी भी सस्पेंस बनाए रखा है। अराघची ने साफ कर दिया है कि जलमार्ग फिलहाल ईरानी सेना के प्रबंधन में ही रहेगा। इस विरोधाभास के बीच, दोनों देशों के प्रतिनिधि शुक्रवार को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में आमने-सामने बैठकर बातचीत करेंगे। अब सबकी निगाहें इसी मीटिंग पर टिकी हैं।


ईरान की मांगें: क्या अमेरिका मानेगा?


ईरान ने शांति के बदले एक लंबी और जटिल मांगों की लिस्ट सामने रखी है। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:


  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण ईरान का बना रहे।
  • अमेरिकी सेना इस क्षेत्र को छोड़कर पूरी तरह बाहर जाए।
  • ईरान पर लगाए गए तमाम कड़े प्रतिबंध हटाए जाएं।
  • ईरान की जब्त की गई संपत्ति को वापस लौटाया जाए।


जानकारों का मानना है कि अमेरिका के लिए इन शर्तों को मानना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। एक तरफ वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें हैं, जो इस युद्ध के कारण आसमान छू रही थीं, दूसरी तरफ अमेरिका की अपनी साख और नीतियां हैं।


ग्लोबल इकोनॉमी के लिए राहत भरी सांस


युद्ध रुकने की खबर आते ही ग्लोबल मार्केट में थोड़ी राहत देखी गई है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने का डर था, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा था। हालांकि, सीजफायर की खबर ने निवेशकों और आम जनता को फिलहाल के लिए बड़ी राहत दी है। लेकिन यह राहत स्थायी होगी या केवल 14 दिनों का एक पड़ाव, यह शुक्रवार को इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता तय करेगी।


ईरान और अमेरिका का यह संघर्ष न केवल इन दो देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो रहा था। ट्रंप का 'हृदय परिवर्तन' और ईरान की '10-सूत्रीय शांति योजना' यह संकेत देते हैं कि दोनों देश अब सीधे विनाश से बचना चाहते हैं। हालांकि, इतिहास गवाह है कि मध्य-पूर्व के मामले इतने आसान नहीं होते। शुक्रवार की बैठक में होने वाले फैसले ही तय करेंगे कि दुनिया एक बड़े युद्ध की ओर फिर से बढ़ेगी या शांति का नया युग शुरू होगा।


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