PF खाते में हुई ये 1 चूक? भूल जाइए अपना ही पैसा! आज ही ऐसे करें सुधार

MoneySutraHub Team

How to update PF details: EPFO Alert! अगर आपके PF खाते में जॉइनिंग या एग्जिट डेट गलत है, तो आपका पैसा और पेंशन अटक सकती है। जानें घर बैठे इसे ऑनलाइन सुधारने का सबसे आसान तरीका।


How to update PF details


अहमदाबाद, 5 अप्रैल: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पीएफ खाताधारकों के लिए एक बहुत बड़ा अलर्ट जारी किया है। जब हम नौकरी बदलते हैं, तो अक्सर पुरानी कंपनी के पीएफ खाते में 'डेट ऑफ जॉइनिंग' (Date of Joining) या 'डेट ऑफ एग्जिट' (Date of Exit) की जानकारी अपडेट करना भूल जाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि जरूरत के समय हमारा ही पैसा अटक जाता है। गलत तारीखों की वजह से पीएफ अकाउंट इनएक्टिव हो सकता है, ब्याज मिलना बंद हो सकता है और पेंशन क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। 1 अक्टूबर 2017 के बाद बने UAN वाले कर्मचारी अब बिना किसी कंपनी के अप्रूवल के घर बैठे पोर्टल पर अपनी जानकारी आसानी से ठीक कर सकते हैं। इस आर्टिकल में हमने विस्तार से बताया है कि कैसे आप ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीके से अपने पीएफ खाते की गलतियों को चुटकियों में सुधार सकते हैं।


आज के दौर में करियर ग्रोथ और अच्छी सैलरी के लिए नौकरी बदलना एक बहुत ही आम बात हो गई है। लोग नई नौकरी मिलते ही पुरानी कंपनी को छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। नई कंपनी का माहौल, नया काम और नई सैलरी इन सबके बीच हम अक्सर एक बहुत ही जरूरी काम करना भूल जाते हैं। वह काम है अपने पुराने ईपीएफ (EPF) खाते को अपडेट करना और उसे नए खाते में ट्रांसफर करना।


अक्सर कर्मचारियों को लगता है कि जब उन्हें पैसों की जरूरत होगी, तब वे आसानी से पीएफ का पैसा निकाल लेंगे। लेकिन, मुसीबत तब खड़ी होती है जब वे अपना क्लेम फॉर्म भरते हैं और वह रिजेक्ट हो जाता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने इस बड़ी समस्या को देखते हुए करोड़ों पीएफ खाताधारकों (PF Account Holders) के लिए एक सख्त अलर्ट जारी किया है। ईपीएफओ के अनुसार, अगर आपके पीएफ खाते में आपके काम शुरू करने की तारीख (Date of Joining) और काम छोड़ने की तारीख (Date of Exit) गलत है, तो आप अपने ही पैसे को नहीं निकाल पाएंगे। यह एक छोटी सी गलती आपको भविष्य में बहुत भारी पड़ सकती है। इस लेख में हम इसी समस्या की गहराई में जाएंगे और आपको बताएंगे कि कैसे आप घर बैठे इस गलती को सुधार सकते हैं।


नौकरी बदलने की जल्दबाजी और पीएफ की अनदेखी


पीएफ (Provident Fund) नौकरीपेशा लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह सिर्फ एक बचत नहीं है, बल्कि यह हमारे बुढ़ापे का सहारा और मुश्किल वक्त का साथी है। पीएफ खाते में हमारी सैलरी का एक हिस्सा जमा होता है और उतना ही हिस्सा कंपनी भी मिलाती है। इसमें से कुछ हिस्सा हमारे पेंशन फंड (EPS) में भी जाता है।


जब कोई कर्मचारी कंपनी छोड़ता है, तो पुरानी कंपनी की जिम्मेदारी होती है कि वह ईपीएफओ पोर्टल पर कर्मचारी के नौकरी छोड़ने की तारीख (Date of Exit) दर्ज करे। लेकिन कई बार कंपनियां यह काम करना भूल जाती हैं या फिर गलत तारीख दर्ज कर देती हैं। दूसरी तरफ, कर्मचारी भी इस बात पर ध्यान नहीं देते। जब सालों बाद बेटी की शादी, घर बनाने या किसी मेडिकल इमरजेंसी के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है, तब पता चलता है कि ईपीएफओ के रिकॉर्ड में तो जानकारी ही गलत है और पैसा फंस गया है।


EPFO का नया अलर्ट क्या है?


ईपीएफओ ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और पोर्टल के जरिए साफ शब्दों में कहा है कि पीएफ खाते में सटीक जानकारी का होना अनिवार्य है। अगर आपकी जॉइनिंग डेट या एग्जिट डेट आपके असली दस्तावेजों या पीएफ में जमा हुए पैसों के समय से मेल नहीं खाती है, तो ईपीएफओ के सिस्टम द्वारा आपका क्लेम तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा।


अपडेट ना होने के 3 सबसे बड़े नुकसान


अगर आपको लगता है कि तारीख गलत होने से कोई खास फर्क नहीं पड़ता, तो आपको इन गंभीर नुकसानों के बारे में जरूर जानना चाहिए:


अकाउंट हो जाएगा इनएक्टिव (Inactive Account): अगर आपने नौकरी छोड़ दी है और 3 साल तक आपके खाते में कोई पैसा जमा नहीं हुआ है, और साथ ही आपकी 'डेट ऑफ एग्जिट' अपडेट नहीं है, तो ईपीएफओ आपके खाते को इनएक्टिव (निष्क्रिय) मान सकता है।


ब्याज का नुकसान (Loss of Interest): खाते में कोई भी विसंगति (Mismatch) होने पर, जो सालाना ब्याज ईपीएफओ की तरफ से मिलता है, वह आपके खाते में क्रेडिट होना बंद हो सकता है।


क्लेम और पेंशन का रिजेक्शन (Claim Rejection): सबसे बड़ा नुकसान यह है कि जब आप अपना पीएफ का पूरा पैसा या पेंशन (EPS) निकालने के लिए आवेदन करेंगे, तो तारीखों के मेल न खाने के कारण आपका फॉर्म रिजेक्ट कर दिया जाएगा। पेंशन के लिए आपकी कुल सर्विस के सालों की गिनती इन्ही तारीखों के आधार पर होती है।


अपनी डिटेल्स घर बैठे कैसे सुधारें?


ईपीएफओ ने कर्मचारियों की सुविधा के लिए इस प्रक्रिया को बहुत आसान बना दिया है। हालांकि, सुधार की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि आपका यूएएन (UAN - Universal Account Number) कब बना था। ईपीएफओ ने इसे 2 मुख्य हिस्सों में बांटा है:


1. 1 अक्टूबर 2017 के बाद वाले अकाउंट्स के लिए नियम 


यह उन करोड़ों कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत है जिनका यूएएन 1 अक्टूबर 2017 के बाद जनरेट हुआ है।


नियम क्या है: अगर आपका यूएएन इस तारीख के बाद बना है और आपके आधार कार्ड (Aadhaar Card) से पूरी तरह लिंक है, तो आपको अपनी कंपनी (Employer) के पास जाने की जरूरत नहीं है।


क्या-क्या बदल सकते हैं: आप अपना नाम, जन्म तिथि (Date of Birth), जेंडर (Gender), और जॉइनिंग या एग्जिट डेट सीधे ईपीएफओ के मेंबर पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन अपडेट कर सकते हैं।


सबसे बड़ा फायदा: इसके लिए आपको कोई भी दस्तावेज (Document) अपलोड नहीं करना पड़ता और शुरुआत में ईपीएफओ की मंजूरी का लंबा इंतजार भी नहीं करना पड़ता। सिस्टम इसे आधार डेटाबेस से वेरिफाई कर लेता है।


2. 1 अक्टूबर 2017 के पहले वाले खातों के लिए नियम 


जिन कर्मचारियों का पीएफ खाता काफी पुराना है और यूएएन 1 अक्टूबर 2017 से पहले बना था, उनके लिए प्रक्रिया थोड़ी लंबी है।


नियम क्या है: आप ऑनलाइन सुधार के लिए रिक्वेस्ट तो डाल सकते हैं, लेकिन यह रिक्वेस्ट सबसे पहले आपकी कंपनी (Employer) के पोर्टल पर जाएगी।


कंपनी की मंजूरी: जब तक आपकी पुरानी या मौजूदा कंपनी उस बदलाव को अप्रूव (Approve) नहीं करेगी, तब तक ईपीएफओ उसमें कोई सुधार नहीं करेगा।


कंट्रिब्यूशन का मिलान: अगर आपकी जॉइनिंग या एग्जिट डेट उस महीने से मेल नहीं खाती है जिस महीने में आपके पीएफ का पैसा कटा था, तो यह मामला ईपीएफओ अधिकारी के पास जाएगा। अधिकारी पूरी जांच करेगा और हो सकता है कि आपको जरूरी दस्तावेजों के साथ ईपीएफओ ऑफिस के चक्कर भी लगाने पड़ें।


जॉइंट डिक्लेरेशन (Joint Declaration) का इस्तेमाल कब करें?


कई बार परिस्थितियां ऐसी होती हैं जहां ऑनलाइन काम नहीं हो पाता।


मान लीजिए आपका यूएएन आपके आधार से लिंक नहीं है। या फिर किसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में पीएफ मेंबर की मृत्यु हो चुकी है और उसके परिवार (Nominee) को पैसा निकालना है। ऐसी स्थिति में ‘फिजिकल जॉइंट डिक्लेरेशन फॉर्म' (Physical Joint Declaration Form) काम आता है। यह एक कागज का फॉर्म होता है जिसे कर्मचारी (या उसके परिवार) और कंपनी दोनों मिलकर भरते हैं। दोनों के हस्ताक्षर और कंपनी की मुहर के बाद, इसे कंपनी अपने पोर्टल पर अपलोड करती है या ईपीएफओ ऑफिस में जमा किया जाता है। इसके बाद ईपीएफओ के अधिकारी मैन्युअल रूप से दस्तावेजों की जांच करते हैं और जानकारी को सही करते हैं।


एक नज़र में जरूरी बातें


UAN की शुरुआत: ईपीएफओ ने 2014 में यूएएन की शुरुआत की थी, ताकि कर्मचारी जीवन भर एक ही पीएफ नंबर का इस्तेमाल कर सकें।


कट-ऑफ डेट: 1 अक्टूबर 2017 वह तारीख है, जो तय करती है कि आपको सुधार के लिए कंपनी की जरूरत पड़ेगी या नहीं।


पेंशन का नियम: अगर आपकी कुल नौकरी 10 साल से ज्यादा हो जाती है, तो आप आजीवन पेंशन के हकदार हो जाते हैं। यह 10 साल की गिनती आपकी जॉइनिंग और एग्जिट डेट के आधार पर ही ईपीएफओ का सिस्टम कैलकुलेट करता है।


आधार लिंकिंग: आज के समय में पीएफ खाते से पैसे निकालने के लिए उसका आधार कार्ड से लिंक होना 100% अनिवार्य है।


आम जनता की परेशानियां


अगर हम सोशल मीडिया और ईपीएफओ के शिकायत पोर्टल (EPFiGMS) पर नज़र डालें, तो पाएंगे कि सबसे ज्यादा शिकायतें क्लेम रिजेक्ट होने की ही आती हैं। लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि उन्होंने 2 साल पहले कंपनी छोड़ दी थी, लेकिन कंपनी ने एग्जिट डेट मार्क नहीं की। कई बार एचआर (HR) विभाग की लापरवाही के कारण कर्मचारी का पैसा महीनों तक फंसा रहता है। अब नए ऑनलाइन सिस्टम से कर्मचारियों को कंपनियों के एचआर के चक्कर काटने से बहुत हद तक आजादी मिल गई है।


फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?


वित्तीय सलाहकारों (Financial Advisors) का स्पष्ट मानना है कि पीएफ खाते को बैंक खाते की तरह ही सीरियसली लेना चाहिए। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं:


तुरंत अपडेट: जैसे ही आप किसी कंपनी में अपना आखिरी वर्किंग डे (Last Working Day) पूरा करते हैं, उसके 2 महीने बाद आप खुद ईपीएफओ पोर्टल पर जाकर अपनी एग्जिट डेट दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए कंपनी के भरोसे न बैठें।


लगातार ट्रैक करें: हर 6 महीने में अपना पीएफ पासबुक (PF Passbook) डाउनलोड करके चेक करें कि पैसा जमा हो रहा है या नहीं।


पुरानी गलतियों को सुधारें: अगर आपकी पुरानी कंपनियों का पैसा अलग-अलग मेंबर आईडी में पड़ा है, तो उसे तुरंत अपने वर्तमान खाते में ट्रांसफर (PF Transfer) कर लें। ऐसा करते समय ही जॉइनिंग और एग्जिट डेट की गलती सामने आ जाती है।


भविष्य की संभावनाएं


ईपीएफओ लगातार खुद को डिजिटलाइज कर रहा है। भविष्य में ऐसी तकनीक आने की पूरी संभावना है जहां किसी भी कर्मचारी के इस्तीफे (Resignation) और फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (FnF) के साथ ही कंपनियों का पेरोल सॉफ्टवेयर सीधे ईपीएफओ के सर्वर को सिग्नल भेज देगा, जिससे एग्जिट डेट अपने आप दर्ज हो जाएगी। इससे मानवीय गलतियों (Human Errors) की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। साथ ही, आधार आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) से फ्रॉड के मामले भी पूरी तरह बंद हो जाएंगे।


पीएफ का पैसा आपकी खून-पसीने की कमाई है। नौकरी की आपाधापी में अपनी इस गाढ़ी कमाई को लावारिस ना छोड़ें। ईपीएफओ ने 1 अक्टूबर 2017 के बाद वाले यूएएन धारकों के लिए नियमों को बहुत लचीला बना दिया है। आज ही अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर ईपीएफओ का मेंबर पोर्टल खोलें, अपना यूएएन और पासवर्ड डालकर लॉग-इन करें और अपनी सर्विस हिस्ट्री (Service History) चेक करें। अगर वहां जॉइनिंग या एग्जिट डेट में कोई भी गड़बड़ी दिखे, तो उसे बताए गए ऑनलाइन तरीके से तुरंत सुधार लें। सही जानकारी ही भविष्य में बिना किसी रुकावट के पैसा निकालने की एकमात्र चाबी है।


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