सोने का ऐसा ‘बुखार' पहले नहीं देखा! 1.5 लाख के पार भाव, फिर भी रिकॉर्ड तोड़ खरीदारी से सरकार हैरान

MoneySutraHub Team

Gold Import in India: भारत में सोने की चमक सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चिंता बन गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 (अप्रैल से फरवरी) के बीच देश में सोने का आयात 29 प्रतिशत बढ़कर 69 अरब डॉलर को पार कर गया है। दिल्ली जैसे शहरों में सोने के दाम 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए हैं, लेकिन फिर भी लोग जमकर सोना खरीद रहे हैं। इस रिकॉर्ड तोड़ आयात की वजह से भारत का ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) 310 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। इसके अलावा, चांदी के आयात में भी 140 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया है। सरकार ने बढ़ते विदेशी मुद्रा खर्च को रोकने के लिए आयात पर कई सख्त पाबंदियां लगाई हैं। जानिए इस पूरी स्थिति का आपकी जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा।


Gold Import in India


अहमदाबाद, 5 अप्रैलः भारतीयों का सोने से प्यार किसी से छिपा नहीं है। चाहे शादी-ब्याह का मौका हो, कोई बड़ा त्योहार हो, या फिर भविष्य के लिए सुरक्षित निवेश की बात हो, सोना हमेशा हमारी पहली पसंद होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सोने के लिए हमारा यह अंधाधुंध प्यार देश की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकता है? जी हां, ऐसा ही कुछ इस वक्त हो रहा है।


बाजार में सोने के दाम आसमान छू रहे हैं। दिल्ली जैसे महानगरों में सोने की कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। आम तौर पर जब किसी चीज के दाम बढ़ते हैं, तो उसकी मांग कम हो जाती है। लेकिन सोने के मामले में अर्थशास्त्र का यह नियम भारत में पूरी तरह फेल हो गया है। महंगे सोने के बावजूद देश में इसकी डिमांड इस कदर बढ़ी है कि सरकार और आर्थिक जानकारों की नींद उड़ गई है। भारत का गोल्ड इंपोर्ट (सोने का आयात) एक झटके में 29% बढ़ गया है, जिसका सीधा असर देश के खजाने पर पड़ रहा है। आइए इस पूरी स्थिति को बिल्कुल आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं।


सोने से भारतीयों का पुराना रिश्ता


दुनिया भर में सोने की खपत के मामले में चीन के बाद भारत दूसरे नंबर पर आता है। भारत में सोना केवल एक धातु नहीं है; यह एक सामाजिक स्टेटस, परंपरा और बुरे वक्त के साथी के रूप में देखा जाता है। हमारे देश में हर साल होने वाली लाखों शादियों में सोने की भारी डिमांड होती है। इसके अलावा, गांवों से लेकर शहरों तक, लोग शेयर बाजार या बैंक में पैसा रखने के बजाय सोना खरीदना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं।


हालांकि, भारत के पास अपनी सोने की खदानें बहुत कम हैं। इसलिए हमारी घरेलू डिमांड को पूरा करने के लिए हमें दूसरे देशों से सोना खरीदना (Import) पड़ता है। जब हम बाहर से सोना मंगाते हैं, तो उसका पेमेंट हमें डॉलर में करना पड़ता है। यहीं से सारी आर्थिक कहानी शुरू होती है।


आयात के चौंकाने वाले ताजा आंकड़े


हाल ही में सामने आए ताजा आंकड़ों ने सबको हैरत में डाल दिया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान (खासकर अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच) देश में सोने का आयात लगभग 29% बढ़ गया है। यह आयात बढ़कर 69 अरब डॉलर के भारी-भरकम आंकड़े तक पहुंच गया है। यह तब हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू बाजार दोनों जगह सोने की कीमतें अपने लाइफटाइम हाई (सर्वोच्च स्तर) पर हैं। भारत के कुल आयात बिल में अब सोने की हिस्सेदारी 5% से ज्यादा हो गई है, जो कि एक बहुत बड़ा नंबर है।


आखिर कहां से आता है हमारा सोना?


क्या आपने कभी सोचा है कि जो सोना आप सुनार की दुकान से खरीदते हैं, वह आता कहां से है?


भारत दुनिया के कई देशों से सोना खरीदता है, लेकिन इसके कुछ प्रमुख सप्लायर हैं:


स्विट्जरलैंड (Switzerland): यह देश भारत का सबसे बड़ा गोल्ड सप्लायर है। हमारे कुल सोने के आयात का लगभग 40% हिस्सा अकेले स्विट्जरलैंड से आता है। वहां की रिफाइनरियां दुनिया भर में सबसे शुद्ध सोना तैयार करने के लिए जानी जाती हैं।


यूएई (United Arab Emirates): दुबई और यूएई के अन्य हिस्सों से भी भारत भारी मात्रा में सोना आयात करता है।


दक्षिण अफ्रीका (South Africa): यह देश अपनी सोने की खदानों के लिए मशहूर है और भारत का एक प्रमुख सप्लायर है।


महंगाई के बाद भी क्यों खरीद रहे हैं लोग?


आम जनता का रिएक्शन अर्थशास्त्रियों को भी हैरान कर रहा है। दिल्ली में सोने का भाव 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम होने के बावजूद, शोरूम्स पर भीड़ कम नहीं हो रही है। इसके मुख्य रूप से दो कारण हैं:


निवेश का डर (FOMO): लोगों को लगता है कि सोने के दाम आगे चलकर और भी ज्यादा बढ़ जाएंगे। इसलिए वे आज ही पैसा लगाकर भविष्य का मुनाफा पक्का करना चाहते हैं।


शादियों का सीजन: भारतीय शादियों में गहने देना एक अनिवार्य परंपरा है। चाहे भाव कुछ भी हो, परिवारों को शादियों के लिए सोना खरीदना ही पड़ता है।


अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ रहा है असर?


इस अंधाधुंध सोने की खरीदारी का सबसे बड़ा और नकारात्मक असर हमारे देश के ‘ट्रेड डेफिसिट' (व्यापार घाटे) पर पड़ा है।


ट्रेड डेफिसिट क्या है? सरल भाषा में समझें तो, जब हमारा देश दूसरे देशों को सामान बेचकर (Export) जो पैसा कमाता है, उससे कहीं ज्यादा पैसा दूसरे देशों से सामान खरीदने (Import) में खर्च कर देता है, तो उस अंतर को व्यापार घाटा कहते हैं। सोने के इस भारी आयात के कारण भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 310 अरब डॉलर के पार चला गया है। इसके साथ ही, करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) का खतरा भी मंडरा रहा है। CAD तब बढ़ता है जब हम विदेशी मुद्रा (मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर) का बहुत ज्यादा खर्च करते हैं। महंगे तेल और महंगे सोने का आयात हमारे विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव डालता है। अगर CAD बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो देश की करेंसी (रुपया) कमजोर होने लगती है और महंगाई बढ़ जाती है।


चांदी ने भी तोड़े सारे रिकॉर्ड 


कहानी सिर्फ सोने तक सीमित नहीं है। चांदी ने तो आयात के मामले में सोने को भी पीछे छोड़ दिया है। आंकड़ों के अनुसार, चांदी का आयात 140% से ज्यादा बढ़ गया है और यह 11 अरब डॉलर के स्तर को पार कर चुका है। कारण: चांदी की डिमांड सिर्फ गहनों या पायल तक सीमित नहीं है। आज के समय में चांदी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल इंडस्ट्रियल सेक्टर में हो रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम, स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल (खासकर इलेक्ट्रिक गाड़ियां) और फार्मा (दवा) सेक्टर में चांदी की बहुत जरूरत होती है। इंडस्ट्रियल ग्रोथ के कारण ही चांदी का आयात इतनी तेजी से बढ़ा है।


सरकार ने उठाया सख्त कदम


अर्थव्यवस्था पर बढ़ते इस खतरे को सरकार चुपचाप नहीं देख सकती थी। सोने और चांदी के इस बेतहाशा आयात को कंट्रोल करने और डॉलर को बाहर जाने से रोकने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं।


हाल ही में, सरकार ने सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर कुछ सख्त पाबंदियां (Restrictions) लगा दी हैं। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा के भंडार पर पड़ रहे दबाव को कम करना और घरेलू बाजार में एक संतुलन बनाए रखना है। सरकार चाहती है कि लोग सोने जैसी 'डेड एसेट' (जो अर्थव्यवस्था में सीधे उत्पादन नहीं करती) में पैसा लगाने के बजाय अन्य उत्पादक जगहों पर निवेश करें।


आगे क्या होगा?


आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सोने का आयात एक दोधारी तलवार है। एक तरफ, यह दिखाता है कि भारतीय बाजार में मांग बहुत मजबूत है और लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसा है। लेकिन दूसरी तरफ, यह मैक्रो-इकॉनमी (व्यापक अर्थव्यवस्था) के लिए एक चुनौती बन रहा है।


एक्सपर्ट्स के अनुसार भविष्य में निम्नलिखित चीजें हो सकती हैं अगर सरकार की पाबंदियां असर दिखाती हैं, तो आने वाले महीनों में सोने के आयात में थोड़ी कमी आ सकती है। घरेलू बाजार में सोने की सप्लाई कम होने से इसके दाम और भी ज्यादा बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर आम खरीदार की जेब पर पड़ेगा। चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड आगे भी मजबूत रहने की उम्मीद है, क्योंकि भारत मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में काम कर रहा है।


भारत में 2025-26 के दौरान सोने के आयात का 69 अरब डॉलर के पार जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीयों का सोने के प्रति आकर्षण किसी कीमत पर कम नहीं होने वाला है। दिल्ली में 1.5 लाख रुपये के भाव के बाद भी बढ़ती डिमांड एक तरफ भारतीय परंपरा और निवेश की ताकत दिखाती है, तो दूसरी तरफ यह देश के 310 अरब डॉलर के ट्रेड डेफिसिट के रूप में एक बड़ी चेतावनी भी दे रही है।


सरकार ने अपनी तरफ से आयात को काबू करने के लिए पाबंदियां लगाई हैं, लेकिन जब तक आम जनता में सोने के प्रति यह दीवानगी रहेगी, तब तक इसे पूरी तरह रोकना मुश्किल होगा। अर्थव्यवस्था की सेहत और हमारी परंपराओं के बीच संतुलन बनाना आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।


यह भी पढेंः- PF खाते में हुई ये 1 चूक? भूल जाइए अपना ही पैसा! आज ही ऐसे करें सुधार


#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top