Women's Day 2026: भारतीय महिला निवेशक अब FD छोड़ Mutual Funds (32%) में निवेश कर रही हैं। Equirus Wealth की रिपोर्ट में जानिए उनकी स्मार्ट निवेश रणनीति।

Women's Day 2026, Mutual Funds for Women
अहमदाबादः Women's Day 2026 के अवसर पर सामने आई Equirus Wealth की एक नई रिपोर्ट यह साबित करती है कि भारतीय महिला निवेशकों का नजरिया अब पूरी तरह बदल चुका है। अब वे केवल 'सेफ्टी-फर्स्ट' यानी पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या सोने तक सीमित नहीं हैं। पिछले 5 सालों में महिलाओं का FD में निवेश 45% से गिरकर 20% रह गया है, जबकि इक्विटी म्यूचुअल फंड (MF) में यह 10% से उछलकर 32% हो गया है। 55,000 महिला निवेशकों पर हुई यह स्टडी बताती है कि आज की महिलाएं बाजार गिरने पर घबराकर पैसा निकालने के बजाय, सही समय पर और ज्यादा निवेश करने में यकीन रखती हैं। AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल वे सिर्फ रिसर्च के लिए कर रही हैं, जबकि फैसले खुद की समझदारी से ले रही हैं। यह रिपोर्ट महिलाओं की वित्तीय आजादी और स्मार्ट इन्वेस्टमेंट का एक नया अध्याय पेश करती है।
एक दौर था जब भारतीय महिलाएं अपनी बचत का पैसा सिर्फ बैंक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), सोने या फिर जमीन में लगाना सबसे सुरक्षित मानती थीं। इसे ‘सेफ्टी-फर्स्ट’ अप्रोच कहा जाता था। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। आज की महिला निवेशक रिस्क को समझ रही हैं और शानदार रिटर्न के लिए शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड की तरफ अपने कदम तेजी से बढ़ा रही हैं।
Equirus Wealth की हालिया रिपोर्ट महिलाओं के निवेश से जुड़ा एक बहुत ही दिलचस्प और मजबूत ट्रेंड सामने लाई है। यह रिपोर्ट करीब 55,000 महिला निवेशकों और 100 से ज्यादा रिलेशनशिप मैनेजरों के 5 सालों के डेटा पर तैयार की गई है।
FD से दूरी, म्यूचुअल फंड में दिखाया दम
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 5 सालों में महिलाओं के निवेश पोर्टफोलियो में एक बड़ा बदलाव आया है।
FD में गिरावट: महिलाओं का FD में आवंटन लगभग 45% से घटकर अब सिर्फ 20% रह गया है।
म्यूचुअल फंड में उछाल: इक्विटी म्यूचुअल फंड में उनका निवेश करीब 10% से बढ़कर सीधा 32% तक पहुंच गया है।
नए विकल्पों में दिलचस्पी: इसके अलावा पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIFs) जैसे नए निवेश विकल्पों में भी उनकी हिस्सेदारी 3% से बढ़कर 7% हो गई है।
बाजार गिरने पर घबराहट नहीं, बल्कि स्मार्ट निवेश
अक्सर माना जाता है कि शेयर बाजार गिरते ही निवेशक घबरा जाते हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि 75 से 90% महिला निवेशक मार्केट क्रैश होने पर अपना पैसा नहीं निकालतीं, बल्कि धैर्य बनाए रखती हैं। वहीं, करीब 55% महिलाएं तो इतनी स्मार्ट हैं कि बाजार की गिरावट का फायदा उठाकर अच्छे फंड्स में अतिरिक्त पैसा लगा देती हैं।
AI पर है नजर, लेकिन आंख मूंदकर भरोसा नहीं
आजकल हर जगह Artificial Intelligence (AI) की चर्चा है। लेकिन 35 से 50% महिला निवेशक AI टूल्स का इस्तेमाल बहुत ही सीमित तरीके से कर रही हैं। वे AI का उपयोग मार्केट रिसर्च, नई चीजें सीखने और निवेश की निगरानी के लिए करती हैं। लेकिन जब बात फाइनल डिसीजन की आती है, तो वे रोबोटिक सलाह के बजाय इंसानी समझ और अपने वित्तीय सलाहकारों पर ही भरोसा जताती हैं।
क्या है ‘बकेट थिंकिंग' (Bucket Thinking)?
इस रिपोर्ट में एक और शानदार ट्रेंड सामने आया है, जिसे 'बकेट थिंकिंग' कहा गया है। आज महिलाएं सिर्फ कोई भी रैंडम प्रोडक्ट नहीं खरीद रहीं। वे अपने पोर्टफोलियो को अलग-अलग जरूरतों यानी ‘बकेट्स' में बांट रही हैं। जैसे सुरक्षा, ग्रोथ, लिक्विडिटी (जब पैसे की तुरंत जरूरत हो) और भविष्य की विरासत (Legacy)। अब वे पूछती हैं, "यह निवेश मेरे पूरे पोर्टफोलियो में क्या काम करेगा?"
इसके साथ ही, अपनी आने वाली पीढ़ी को एक मजबूत वित्तीय विरासत (Intergenerational wealth transfer) सौंपना भी महिलाओं की बड़ी प्राथमिकता बन गया है। लगभग 75 से 90% महिलाएं इसके लिए अभी से प्लानिंग कर रही हैं।
विशेषज्ञों की राय
Equirus Wealth के एमडी और बिजनेस हेड अंकुर पुंज कहते हैं, "भारतीय महिलाएं अपने फाइनेंशियल फ्यूचर को लेकर अब बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंट और रणनीतिक हो गई हैं। वे अब सिर्फ प्रोडक्ट नहीं खरीद रहीं, बल्कि अपने लंबे समय के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर एक मजबूत पोर्टफोलियो बना रही हैं।"
Women's Day 2026 के ये आंकड़े चीख-चीख कर कह रहे हैं कि भारतीय महिला अब वित्तीय मामलों में किसी पर निर्भर नहीं है। वह अब रिस्क लेना जानती है, मार्केट को समझती है और अपने भविष्य की डोर मजबूती से अपने हाथों में थाम चुकी है।
Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। MoneysutraHub.in अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।
