पैसों के मामले में आत्मनिर्भर हुईं महिलाएं: 71% खुद संभाल रहीं बैंक खाता, 38% हर हफ्ते कर रहीं UPI पेमेंट

MoneySutraHub Team

 Women Financial Independence: भारत की महिलाएं अब पैसों के मामले में आत्मनिर्भर हैं। 71% अपना बैंक खाता खुद चला रही हैं और 38% हर हफ्ते UPI कर रही हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Women Financial Independence

मुंबईः भारत में डिजिटल पेमेंट की तस्वीर बहुत तेज़ी से बदल रही है और इस बदलाव की सबसे बड़ी हीरो देश की महिलाएं हैं। अब महिलाएं घर चलाने के साथ-साथ अपने पैसों का हिसाब-किताब भी स्मार्ट तरीके से कर रही हैं। हाल ही में आई ‘PayNearby Women Financial Index (PWFI) 2026' की रिपोर्ट ने कुछ ऐसे आंकड़े पेश किए हैं, जो बताते हैं कि ग्रामीण और छोटे शहरों की महिलाएं अब आर्थिक रूप से कितनी सशक्त हो चुकी हैं।


UPI और बैंकिंग में महिलाओं का बढ़ता दबदबा


आज के समय में 38% महिलाएं हर हफ्ते कम से कम एक बार UPI का इस्तेमाल कर रही हैं। राशन की दुकान हो, बिजली का बिल भरना हो या मोबाइल रिचार्ज करना हो, अब ये सब काम मोबाइल से ही हो रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि 71% महिलाएं अपना बैंक अकाउंट खुद ऑपरेट कर रही हैं। 18 से 40 साल की उम्र की महिलाओं में यह आत्मविश्वास सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। वे अब अपने वित्तीय कामों के लिए परिवार पर निर्भर नहीं हैं।


सर्वे में यह भी सामने आया कि 85% महिलाएं खुद को अपने परिवार की मुख्य बचतकर्ता मानती हैं।


महिला एजेंटों पर ज्यादा भरोसा


पैसे के लेन-देन के मामले में 78% महिलाएं 'महिला एजेंटों' के पास जाना ही पसंद करती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण भरोसा और खुलकर अपनी बात कहने की आज़ादी है। यही महिला एजेंट उन्हें लंबी अवधि की बचत और सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने में मदद कर रही हैं।


गोल्ड SIP और FD पर है सबसे ज्यादा फोकस


निवेश को लेकर भी महिलाओं की सोच बदल रही है:


गोल्ड SIP: लगभग 44% महिलाएं छोटे-छोटे SIP के जरिए सोने (Gold) से जुड़े सेविंग प्लान में पैसा लगाना चाहती हैं। सोने पर उनका भरोसा आज भी कायम है।


FD और RD: सुरक्षित निवेश के तौर पर 98% महिलाओं की पहली पसंद फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) है।


हालांकि, म्यूचुअल फंड के बारे में अभी जागरूकता कम है; सिर्फ 10% से भी कम महिलाएं ही इसके बारे में जानती हैं।


कैश की ज़रूरत और इमरजेंसी फंड


डिजिटल पेमेंट बढ़ने के बावजूद कैश की अहमियत खत्म नहीं हुई है। घर खर्च के लिए 54% महिलाएं पैसा निकालने के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन (जैसे फेस लॉक) का सहारा लेती हैं। ये महिलाएं अमूमन 1,000 से 2,500 रुपये के बीच नकद निकालती हैं।


मुसीबत के समय के लिए महिलाएं नियमित रूप से थोड़ी-थोड़ी बचत करती हैं। उनके लिए बच्चों की पढ़ाई, मेडिकल इमरजेंसी और घर का सामान सबसे बड़ी प्राथमिकता है।


इंश्योरेंस और लोन लेने में भी नहीं हैं पीछे


अब महिलाएं लोन और इंश्योरेंस लेने में भी नहीं हिचकिचा रही हैं। 26% महिलाओं ने इंश्योरेंस लिया है, जिसमें हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस सबसे ज्यादा शामिल हैं। 73% महिलाएं मेडिकल, बच्चों की पढ़ाई या छोटे बिज़नेस के लिए बैंक से लोन लेने की इच्छा रखती हैं। वहीं, गोल्ड लोन भी उनकी पसंद बन रहा है।


पैसे के साथ-साथ सेहत पर भी ध्यान


कम्युनिटी सर्विस सेंटर (CSC) पर अब सिर्फ पैसे का लेन-देन नहीं हो रहा है। 37% महिलाएं वहां जाकर टेलीहेल्थ कंसल्टेशन और सैनिटरी पैड जैसी स्वास्थ्य सेवाओं का भी लाभ उठा रही हैं। इससे पता चलता है कि वे अपनी सेहत को लेकर भी जागरूक हो रही हैं।


विशेषज्ञों का कहना है कि यह रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं अब सिर्फ लेन-देन तक सीमित नहीं हैं। वे एक व्यवस्थित तरीके से वित्तीय योजनाएं बना रही हैं। भरोसेमंद महिला सेवा प्रदाताओं के जरिए भारत की महिलाएं आज सही मायनों में सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं।

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