US-Iran War, Anthropic Claude AI: ट्रंप सरकार ने जिस एंथ्रॉपिक के 'क्लॉड' (Claude AI) पर बैन लगाया था, अमेरिकी सेना ने ईरान पर हवाई हमले में उसी का इस्तेमाल किया। जानें इस एआई और अमेरिकी सरकार के बीच के विवाद की पूरी कहानी।

US-Iran War, Anthropic Claude AI
अमेरिका: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह युद्ध के मैदान में भी अहम भूमिका निभा रहा है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए तनाव में एक बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है। अमेरिकी सेना ने ईरान पर हवाई हमले करने के लिए सैन फ्रांसिस्को के स्टार्टअप 'एंथ्रॉपिक' (Anthropic) के एआई सॉफ्टवेयर 'क्लॉड' (Claude) का इस्तेमाल किया है। यह खबर इसलिए हैरान करती है क्योंकि कुछ समय पहले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कंपनी के सिस्टम पर पूरी तरह से बैन लगा दिया था।
ईरान पर हमले में कैसे हुआ AI का इस्तेमाल?
वाल स्ट्रीट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना और मिडिल ईस्ट में स्थित यूएस सेंट्रल कमांड दुनिया भर में कई ऑपरेशंस के लिए 'Claude AI' पर निर्भर है। इस एआई टूल का इस्तेमाल मुख्य रूप से इन कामों में किया गया:
खुफिया आकलन (Intelligence Assessment): दुश्मनों की सटीक जानकारी जुटाना।
टारगेट की पहचान: हवाई हमले के लिए सही ठिकानों को मार्क करना।
वॉर सिमुलेशन: युद्ध जैसे हालात का पहले से आकलन करके रणनीति बनाना।
हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक सेना या सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
Trump ने क्यों लगाया था Anthropic पर बैन?
इस पूरे विवाद की जड़ एंथ्रॉपिक और अमेरिकी रक्षा विभाग के बीच एआई के इस्तेमाल की शर्तों को लेकर हुई अनबन है। रक्षा विभाग चाहता था कि सेना को क्लॉड एआई का इस्तेमाल सभी "वैध" और कानूनी सैन्य कामों में बिना किसी रोक-टोक के करने दिया जाए। लेकिन, कंपनी के सीईओ डारियो एमोदेई (Dario Amodei) ने इसे अपनी 'नैतिक सीमा' बताते हुए सुरक्षा उपायों को हटाने से साफ इनकार कर दिया।
इसके बाद डिफेंस सेक्रेटरी ने कंपनी को अल्टीमेटम दिया और बात न बनने पर ट्रंप प्रशासन ने सभी सरकारी एजेंसियों को एंथ्रॉपिक के साथ काम बंद करने का आदेश दे दिया। साथ ही इसे अमेरिका की सुरक्षा और डिफेंस सप्लाई चेन के लिए 'खतरा' भी घोषित कर दिया।
क्या अब सेना के पास है कोई दूसरा विकल्प?
इस विवाद के बाद अमेरिकी रक्षा विभाग ने अन्य एआई डेवलपर्स की तरफ रुख किया है। अब सेना ने गोपनीय प्रोजेक्ट्स के लिए ओपनएआई (OpenAI) के चैटजीपीटी (ChatGPT) और एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी xAI के साथ डील की है। हालांकि, सैन्य अधिकारियों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि सेना के सिस्टम में 'क्लॉड' पूरी तरह रचा-बसा है। ऐसे में क्लॉड को हटाकर नया सिस्टम सेट करने में कई महीनों का समय लग सकता है।
आखिर ‘Claude AI' में ऐसा क्या खास है?
एंथ्रॉपिक उन चुनिंदा एआई लैब्स में से एक है, जिसे अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट से करीब $200 मिलियन (करीब 20 करोड़ डॉलर) का बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला था।
अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) और Palantir Technologies की साझेदारी के जरिए सिर्फ 'क्लॉड' को ही खुफिया मिलिट्री ऑपरेशंस में इस्तेमाल की मंजूरी मिली थी।
इसकी अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस साल जनवरी में वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेने वाले ऑपरेशन में भी इसी एआई का इस्तेमाल किया गया था।
यह मामला साफ दिखाता है कि भविष्य के युद्ध अब हथियारों के साथ-साथ 'डेटा' और 'एआई' के दम पर लड़े जा रहे हैं। एक तरफ टेक कंपनियों की अपनी नैतिक नीतियां हैं, तो दूसरी तरफ सेना की ज़रूरतें। क्लॉड एआई भले ही आज विवादों में है, लेकिन अमेरिकी सैन्य ऑपरेशंस में इसकी गहरी पैठ को रातों-रात खत्म करना ट्रंप प्रशासन के लिए भी आसान नहीं होगा।
