NSE IPO listing details: NSE का बहुप्रतीक्षित IPO जल्द आ रहा है, लेकिन यह अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं होगा। जानिए CEO आशीष चौहान ने इसके पीछे क्या बड़ी वजह बताई है।
नई दिल्ली: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक बड़ी खबर है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) का बहुप्रतीक्षित IPO जल्द ही बाजार में दस्तक दे सकता है। 8 साल के लंबे इंतजार के बाद इसके रास्ते खुल रहे हैं। लेकिन इसमें एक बड़ा ट्विस्ट है। जब यह IPO आएगा, तो NSE अपने खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं होगा। आखिर ऐसा क्यों? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
खुद के प्लेटफॉर्म पर क्यों नहीं होगी लिस्टिंग?
NSE के MD और CEO आशीष चौहान ने हाल ही में साफ किया है कि भारतीय नियमों के मुताबिक, कोई भी स्टॉक एक्सचेंज खुद के प्लेटफॉर्म पर अपने शेयर लिस्ट नहीं कर सकता।
इसके पीछे ‘कॉन्फ्लिक्ट-ऑफ-इंटरेस्ट' (हितों का टकराव) का नियम लागू होता है। चूंकि NSE खुद एक रेगुलेटरी संस्था है, इसलिए वह खुद पर निगरानी नहीं रख सकती। भारत में नियमों का पालन करना अनिवार्य है, इसलिए NSE को लिस्टिंग के लिए किसी दूसरे एक्सचेंज (जैसे BSE) का रुख करना होगा।
सिर्फ OFS होगा यह IPO
आशीष चौहान ने बताया कि यह IPO पूरी तरह से 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) होगा। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी कोई नए शेयर जारी करके बाजार से नया फंड नहीं जुटाएगी। इसमें पहले से मौजूद निवेशक ही अपने शेयर बेचेंगे।
कंपनी पहले से ही काफी मुनाफे में है और उसे अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए नए पैसों की जरूरत नहीं है। इस लिस्टिंग का मुख्य मकसद पारदर्शिता बढ़ाना और मौजूदा शेयरधारकों को लिक्विडिटी (नकदी) देना है।
NSE IPO से जुड़ी कुछ खास और अहम बातें:
मौजूदा शेयरधारक: अभी NSE में करीब 195000 शेयरधारक हैं। इनके पास कुल मिलाकर एक्सचेंज का 100 प्रतिशत हिस्सा है।
DRHP फाइलिंग: कंपनी को अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार करने और SEBI के पास फाइल करने में अभी कुछ महीने लगेंगे। इसके बाद SEBI इसकी समीक्षा करेगा।
एडवाइजर की नियुक्ति: ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 तक IPO के लिए एडवाइजर चुनने का प्लान है। लिस्टिंग प्रोसेस के लिए 'रॉथ्सचाइल्ड एंड कंपनी' को इंडिपेंडेंट एडवाइजर बनाया गया है।
IPO कमेटी: NSE ने फरवरी की शुरुआत में ही एक IPO कमेटी बना दी है, जिसकी अध्यक्षता LIC के पूर्व MD तबलेश पांडेय कर रहे हैं।
8 साल का लंबा इंतजार: NSE का IPO पिछले 8 सालों से ज्यादा समय से अटका हुआ था। दिसंबर 2016 में इसके लिए पहली बार प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया गया था। अब हाल ही में SEBI से इसे 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) मिल गया है।
NSE का IPO भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का एक बड़ा कदम होने वाला है। हालांकि कंपनी को कोई नई पूंजी नहीं मिलेगी, लेकिन पब्लिक लिस्टिंग से एक्सचेंज के कामकाज में और ज्यादा पारदर्शिता आएगी। निवेशकों को अब बस SEBI की अंतिम मंजूरी और DRHP फाइल होने का इंतजार है।
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