Share Market Down: 17 मार्च को भारतीय शेयर बाजार (Share Market) में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी ने शानदार बढ़त बनाई थी, लेकिन दोपहर होते-होते मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली, कमजोर रुपया और मध्य पूर्व में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण बाजार लाल निशान में आ गया। सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से 600 अंक नीचे गिर गया, जबकि निफ्टी 23400 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। आईटी और एफएमसीजी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। इस लेख में पढ़ें बाजार में अचानक आई इस बड़ी गिरावट के 7 सबसे बड़े कारण और जानें बाजार के जानकारों ने आम निवेशकों को इस मुश्किल समय में निवेश की क्या खास सलाह दी है।
नई दिल्ली, 17 मार्चः मार्च का महीना भारतीय शेयर बाजार (Share Market) के निवेशकों के लिए किसी रोलरकोस्टर राइड से कम साबित नहीं हो रहा है। आज 17 मार्च को भारतीय शेयर बाजारों में सुबह के समय जो हरियाली और तेजी नजर आई थी, वह ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। दोपहर होते-होते बाजार का मूड पूरी तरह बदल गया और हरे निशान में खुलने वाला बाजार लाल निशान में गोते लगाने लगा। मुनाफावसूली और ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितताओं ने निवेशकों के सेंटिमेंट पर पानी फेर दिया, जिससे सेंसेक्स (Sensex) अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब 600 अंक नीचे फिसल गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी भारी दबाव में दिखा और 23,400 के अहम सपोर्ट लेवल को तोड़कर नीचे चला गया।
Current Update: कैसा रहा आज बाजार का हाल?
अगर आज के कारोबारी सत्र पर नजर डालें, तो बाजार की शुरुआत काफी मजबूत हुई थी।
सेंसेक्स का हाल: कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स ने जोरदार छलांग लगाई। एक समय यह 511.46 अंक चढ़कर 76,014.31 के शानदार स्तर तक पहुंच गया था।
निफ्टी की उड़ान: इसी तरह निफ्टी ने भी सुबह 23,500 का मनोवैज्ञानिक स्तर पार करते हुए 23,577.55 का हाई बनाया।
दोपहर का क्रैश: हालांकि, सुबह 11:30 बजे के करीब बाजार की दिशा एकदम बदल गई। सेंसेक्स 104.93 अंक गिरकर 75,397.92 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। निफ्टी भी 16.90 अंक फिसलकर 23,391.90 पर आ गया।
हालांकि, इस भारी बिकवाली के बीच मिडकैप और स्मॉलकैप (Midcap and Smallcap) शेयरों ने निवेशकों को थोड़ी राहत दी। इनमें हल्की मजबूती बनी रही और ये इंडेक्स लगभग 0.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में टिके रहे।
शेयर बाजार में आज की गिरावट के 7 बड़े कारण
आखिर वो कौन से फैक्टर हैं जिन्होंने मजबूत शुरुआत के बावजूद बाजार को नीचे धकेल दिया? आइए इन 7 प्रमुख कारणों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं:
1. ऊपरी स्तरों पर भारी मुनाफावसूली
बाजार में सोमवार को एक जोरदार तेजी देखने को मिली थी। जब बाजार उच्च स्तर पर पहुंचता है, तो ट्रेडर्स और निवेशक अपना प्रॉफिट बुक करने लगते हैं। आज भी ठीक वैसा ही हुआ। निवेशकों ने ऊपरी स्तरों पर जमकर मुनाफावसूली की। सबसे ज्यादा बिकवाली आईटी (IT), एफएमसीजी (FMCG) और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में देखी गई। आईटी सेक्टर इस गिरावट में सबसे ज्यादा पिस गया और इसका इंडेक्स करीब 2% तक टूट गया।
2. विदेशी निवेशकों (FIIs) की आक्रामक बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं, जो शेयर बाजार के लिए एक बड़ा चिंता का विषय बन गया है। सोमवार को ही FIIs ने बाजार में करीब 9,365.52 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। अगर मार्च महीने के आंकड़ों पर गौर करें, तो अब तक विदेशी निवेशक 66,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की भारी बिकवाली कर चुके हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनवरी 2025 के बाद से विदेशी निवेशकों की सबसे बड़ी मासिक निकासी साबित हो सकती है।
3. भारतीय रुपये में लगातार कमजोरी
रुपये की सेहत में आती गिरावट भी शेयर बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर कर रही है। मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे कमजोर होकर 92.42 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। फॉरेक्स ट्रेडर्स और अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों द्वारा डॉलर की निकासी इसका मुख्य कारण हैं। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना भी रुपये पर भारी दबाव बना रहा है।
4. वीकली एक्सपायरी का बाजार पर असर
शेयर बाजार में मंगलवार का दिन निफ्टी के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स (F&O) की वीकली एक्सपायरी का दिन होता है। एक्सपायरी के दिन बड़े ट्रेडर्स और संस्थागत निवेशक अपनी पोजीशन को या तो एडजस्ट करते हैं या फिर स्क्वायर ऑफ (काटते) करते हैं। इस तकनीकी प्रक्रिया के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) अचानक बढ़ जाता है। आज की दोपहर की गिरावट में इस एक्सपायरी फैक्टर का भी बड़ा हाथ रहा।
5. बढ़ता ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव
वैश्विक स्तर पर युद्ध के हालात शेयर बाजार को डरा रहे हैं। ईरान बनाम अमेरिका-इजराइल के बीच जारी तनाव अब अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस युद्ध के जल्द शांत होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिल रहे हैं। मंगलवार को पश्चिम एशिया के कई प्रमुख हिस्सों में फिर से हमलों की खबरें सामने आईं। युद्ध और संघर्ष के ऐसे हालात दुनिया भर के बाजारों में अनिश्चितता और डर (Panic) का माहौल बनाते हैं। ऐसे में निवेशक जोखिम भरे शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित जगहों (जैसे सोना या बांड्स) पर ले जाने लगते हैं।
6. आसमान छूती कच्चे तेल की कीमतें
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 103 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर के आसपास बनी हुई हैं। इसका सबसे बड़ा कारण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से तेल की सप्लाई का बाधित होना है। आपको बता दें कि पूरी दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत क्रूड सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से होती है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। ऐसे में 103 डॉलर का क्रूड भारत में महंगाई (Inflation) बढ़ा सकता है और कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को कम कर सकता है, जो बाजार के लिए एक बड़ी नेगेटिव खबर है।
7. फेडरल रिजर्व की पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता
अमेरिका का केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व (US Fed) अपनी ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला लेगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। फेड की दो-दिवसीय अहम बैठक आज 17 मार्च से शुरू हो गई है। बाजार विशेषज्ञों को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरों को 3.50% से 3.75% के दायरे में बरकरार रख सकता है। लेकिन निवेशकों को इंतजार इस बात का है कि फेड के चेयरमैन आगे दरों में कटौती (Rate Cut) को लेकर क्या कमेंट्री करते हैं। इस अनिश्चितता के कारण बड़े निवेशक कोई भी नई दांव लगाने से बच रहे हैं।
Expert Analysis: निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?
बाजार के मौजूदा हालात पर दिग्गज मार्केट एक्सपर्ट्स की राय काफी महत्वपूर्ण है। जियोजित इनवेस्टमेंट सर्विस के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, वीके विजयकुमार ने इस स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि बाजार में हालिया दिनों में जो भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, उसकी जड़ में जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) तनाव है।
विजयकुमार के मुताबिक, मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति को लेकर बाजार में भारी कन्फ्यूजन बना हुआ है। माहौल इतना अनिश्चित है कि शेयर बाजार के बड़े-बड़े धुरंधर भी इस वक्त निवेश की कोई पक्की दिशा बताने में हिचकिचा रहे हैं।
आम निवेशकों को क्या करना चाहिए?
घबराहट (Panic) में आकर अपने अच्छे और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयर न बेचें। एक्सपर्ट्स की साफ सलाह है कि लॉन्ग टर्म निवेशक बाजार में डटे रहें। अपनी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को बिल्कुल न रोकें। गिरावट के समय SIP के जरिए कम भाव पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जो भविष्य में अच्छा रिटर्न देती हैं।
भारतीय शेयर बाजार का बुनियादी ढांचा अभी भी मजबूत है, लेकिन वैश्विक कारणों (जैसे कच्चा तेल, युद्ध और अमेरिकी नीतियां) का सीधा असर स्थानीय बाजार पर पड़ रहा है। सेंसेक्स का 600 अंक टूटना यह दर्शाता है कि बाजार अभी बहुत ज्यादा संवेदनशील है। जब तक विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली नहीं रुकती और जियोपॉलिटिकल मामलों में शांति नहीं आती, तब तक बाजार में ऐसा ही उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए सबसे बेहतर यही है कि वे क्वालिटी शेयरों पर फोकस करें और बाजार की हर बड़ी गिरावट को लंबी अवधि के निवेश के मौके के रूप में देखें।
डिस्क्लेमर: यहां पर दिए गए विचार और इन्वेस्टमेंट सलाह इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के अपने विचार और सलाह हैं। MoneysutraHub.in यूज़र्स को सलाह देता है कि कोई भी इन्वेस्टमेंट का फैसला लेने से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।








