Share Market Crash: 12 मार्च को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 950 अंक टूटा और निफ्टी 24600 के नीचे आ गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली समेत जानिए शेयर बाजार में मचे इस हाहाकार के 6 सबसे बड़े कारण।
मुंबईः शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों के लिए 12 मार्च का दिन बहुत ही निराशाजनक रहा। भारतीय शेयर बाजारों में लगातार दूसरे दिन जबरदस्त बिकवाली का दबाव दिखा। हालात ऐसे रहे कि कारोबार के दौरान सेंसेक्स 950 अंकों से ज्यादा लुढ़क गया। वहीं निफ्टी ने भी लगभग 300 अंकों का गोता लगाया और यह 24600 के अहम स्तर से नीचे खिसक गया।
सुबह बाजार खुलते ही लाल निशान हावी हो गया था। करीब 9:17 बजे सेंसेक्स 946 अंक यानी 1.2 प्रतिशत टूटकर 75918 के स्तर पर आ गया। निफ्टी भी 296 अंकों की भारी गिरावट के साथ 23571 पर कारोबार कर रहा था। बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों ने बाजार को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। निफ्टी के 16 में से 14 सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में थे। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी निवेशकों को खून के आंसू रुला रहे थे और इनमें 1.5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में इतनी बड़ी गिरावट किसी एक वजह से नहीं आई है। इसके पीछे कई ग्लोबल और घरेलू कारण एक साथ काम कर रहे हैं। आइए उन 6 मुख्य कारणों को समझते हैं जिन्होंने बाजार का पूरा मूड बिगाड़ दिया।
1) कच्चे तेल की कीमतों में आग
बाजार को नीचे खींचने में सबसे बड़ा हाथ कच्चे तेल का है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 9 प्रतिशत की छलांग लगाकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच चुका है। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 95 डॉलर के करीब है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे ऑयल टैंकरों पर ईरान के हमले की खबरों ने तेल की सप्लाई को लेकर दुनिया भर में डर का माहौल बना दिया है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने आपातकालीन तेल भंडार जारी करने की बात कही है फिर भी कीमतें काबू में नहीं आ रही हैं।
2) विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार बाजार से अपना पैसा निकाल रहे हैं। बुधवार को लगातार 9वें दिन इन्होंने बिकवाली की और करीब 6267 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। सिर्फ मार्च के महीने में ही विदेशी निवेशक 39100 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी कर चुके हैं। हालांकि घरेलू निवेशकों ने 4965 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को संभालने की कोशिश की लेकिन विदेशी बिकवाली का दबाव इतना भारी था कि बाजार टिक नहीं पाया।
3) कमजोर ग्लोबल संकेत
दुनिया भर के बाजारों से भी कोई अच्छी खबर नहीं आई। गुरुवार को एशियाई शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुले। होर्मुज स्ट्रेट और इराकी समुद्री क्षेत्र में जहाजों पर हमले की खबरों से ग्लोबल स्तर पर सप्लाई रुकने और महंगाई बढ़ने का डर सताने लगा है। इसका असर अमेरिकी बाजारों पर भी दिखा। पिछली रात डाउ जोन्स करीब 0.61 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। एसएंडपी 500 में भी सुस्ती रही और नैस्डैक में बस नाममात्र की बढ़त दिखी।
4) ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी का डर
अमेरिका की नई व्यापार नीतियों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका ने भारत समेत 16 देशों के खिलाफ अनफेयर ट्रेड की नई जांच शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी को सख्ती से लागू करने का हिस्सा है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता काफी बढ़ गई है जिससे निवेशकों का भरोसा टूट रहा है।
5) रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। गुरुवार को रुपया 30 पैसे टूटकर 92.34 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया जो इसके अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर हमारी करेंसी पर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है। महंगा तेल आयात करने से देश का चालू खाता घाटा और महंगाई दोनों बढ़ने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
6) डर के इंडेक्स ‘इंडिया विक्स' में उछाल
शेयर बाजार में कितनी घबराहट है इसका अंदाजा इंडिया विक्स से लगाया जाता है। गुरुवार के कारोबार में यह इंडेक्स करीब 6 प्रतिशत बढ़कर 22.32 तक पहुंच गया। इंडिया विक्स का बढ़ना साफ तौर पर बता रहा है कि निवेशकों के बीच काफी डर है और वे आने वाले समय में बाजार में और ज्यादा अस्थिरता की उम्मीद कर रहे हैं।
कच्चे तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंताएं और ग्लोबल अनिश्चितता फिलहाल भारतीय बाजार पर बुरी तरह हावी है। जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते और विदेशी निवेशकों की बिकवाली नहीं रुकती तब तक बाजार में गिरावट का यह दौर जारी रह सकता है। ऐसे समय में निवेशकों को बहुत ही संभलकर और बाजार की हर चाल पर नजर रखकर ही अपने फैसले लेने चाहिए।
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