Share Market Crash: शेयर बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 900 अंक धड़ाम, इन 6 बड़े कारणों से डूबे निवेशकों के पैसा

MoneySutraHub Team

 Share Market Crash: शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन हाहाकार। सेंसेक्स 900 अंक टूटकर 75121 पर और निफ्टी 23400 के नीचे पहुंचा। जानिए बाजार गिरने के 6 बड़े कारण।

Share Market Crash


नई दिल्ली, 13 मार्चः भारतीय शेयर बाजार में इस समय कोहराम मचा हुआ है। शुक्रवार, 13 मार्च को लगातार तीसरे दिन शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों में डर का माहौल है और सभी 16 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में डूब गए हैं।


दोपहर 2 बजे के करीब सेंसेक्स 1379.50 अंक (करीब 1.81 प्रतिशत) टूटकर 74,654.84 के स्तर पर आ गया। वहीं, निफ्टी भी 462.75 अंक (1.96 प्रतिशत) लुढ़क कर 23,176.30 पर पहुंच गया। इस पूरे हफ्ते में सेंसेक्स 4.5 प्रतिशत और निफ्टी 4.8 प्रतिशत गिर चुका है। दिसंबर 2024 के बाद यह बाजार की सबसे बड़ी वीकली गिरावट है।


आखिर बाजार में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आ रही है? आइए आसान भाषा में समझते हैं वो 6 मुख्य कारण, जिन्होंने बाजार का मूड बिगाड़ दिया है:


1. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आग


बाजार गिरने का सबसे बड़ा कारण कच्चा तेल है। खबर है कि ईरान ने दो ऑयल टैंकरों पर हमला किया है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली सप्लाई रुकने का डर है। इसके कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गई है। भारत अपना ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है, इसलिए महंगा तेल हमारी महंगाई और कंपनियों के मुनाफे दोनों पर बुरा असर डालता है।


2. कमजोर ग्लोबल संकेत और युद्ध का डर


दुनियाभर के बाजारों से बुरी खबरें आ रही हैं। एशिया में साउथ कोरिया, जापान, चीन और हांगकांग के बाजार भारी नुकसान में हैं। अमेरिका में भी डाउ जोन्स 700 अंकों से ज्यादा गिरकर इस साल पहली बार 47,000 के नीचे बंद हुआ। मिडिल ईस्ट में खत्म न होने वाली जंग ने पूरी दुनिया के निवेशकों को डरा दिया है।


3. विदेशी निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली


विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर भाग रहे हैं। अकेले गुरुवार को ही विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। मार्च के महीने में अब तक वे 39,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली कर चुके हैं। इससे बाजार पर भारी दबाव बन गया है।


4. रुपये का ऐतिहासिक निचला स्तर


डॉलर के मुकाबले हमारा रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। शुक्रवार को रुपया 12 पैसे गिरकर 92.37 प्रति डॉलर पर आ गया। डॉलर मजबूत होने और विदेशी पैसा बाहर जाने से रुपये की हालत खराब है। कमजोर रुपये का मतलब है कि भारत का इंपोर्ट (आयात) महंगा होगा, जिससे महंगाई और बढ़ेगी।


5. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी का डर


पूरी दुनिया की नजरें 17 मार्च को होने वाली अमेरिकी फेड (US Fed) की बैठक पर हैं। बाजार के जानकारों को डर है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव से महंगाई बढ़ती है, तो दुनिया भर के केंद्रीय बैंक लंबे समय तक ब्याज दरें कम नहीं करेंगे। अगर ब्याज दरें ऊंची रहीं, तो शेयर बाजार में तेजी आना मुश्किल है।


6. बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में भारी बिकवाली


आज के दिन बैंकों और ऑटो कंपनियों के शेयरों की जमकर पिटाई हुई। निफ्टी बैंक 1.75 प्रतिशत गिरकर 54,000 के आसपास आ गया। सरकारी बैंकों जैसे यूनियन बैंक, PNB और केनरा बैंक के शेयरों में 2.3 से 2.7 प्रतिशत तक की गिरावट आई। प्राइवेट सेक्टर में इंडसइंड बैंक 2.6 प्रतिशत टूटा। इसके अलावा कच्चा तेल महंगा होने के डर से निफ्टी ऑटो इंडेक्स भी 2 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया।


चार्ट्स क्या कहते हैं? 


बाजार के एक्सपर्ट आनंद जेम्स के मुताबिक, निफ्टी में अभी और कमजोरी आ सकती है। निफ्टी 23,820 के ऊपर टिक नहीं पाया, इसलिए अब यह 23,090 के स्तर तक गिर सकता है। हालांकि, 23,370 से 23,320 के बीच बाजार को थोड़ा सपोर्ट मिल सकता है। जब तक निफ्टी 23,670 के ऊपर मजबूती से बंद नहीं होता, तब तक बाजार में लंबी तेजी की उम्मीद करना मुश्किल है।


फिलहाल बाजार में चारो तरफ से निगेटिव खबरें हैं। चाहे वो युद्ध हो, कच्चा तेल हो या फिर रुपये की कमजोरी। ऐसे समय में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़ा दांव लगाने से बचना चाहिए और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए।


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