Explainer: ईरान-इजरायल युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट हुआ बंद, सऊदी अरब के ‘प्लान B' ने कैसे बचाई दुनिया भर की तेल सप्लाई?

MoneySutraHub Team

 Crude Oil Crisis: मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे भारी तनाव और युद्ध के हालात ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजार को हिला कर रख दिया है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर ईरान की नाकेबंदी के कारण ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसके चलते क्रूड ऑयल की कीमतें 40 प्रतिशत तक बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। ऐसे नाजुक और चुनौतीपूर्ण समय में सऊदी अरब का 'प्लान B' यानी उसकी 'ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन' (पेट्रोलाइन) दुनिया के लिए संकटमोचक बनकर उभरी है। इस विस्तृत रिपोर्ट में जानिए कि कैसे सऊदी अरब बिना होर्मुज को पार किए लाल सागर के रास्ते दुनिया भर में 70 लाख बैरल तेल पहुंचा रहा है, और इस नए रास्ते में यमन के हूती विद्रोहियों का क्या खतरा है।


Crude Oil Crisis

नई दिल्ली, 17 मार्चः अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति और अर्थव्यवस्था में इन दिनों भूचाल आया हुआ है। मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव ने पूरी दुनिया की धड़कनें तेज कर दी हैं। जब भी खाड़ी देशों में युद्ध के बादल मंडराते हैं, तो उसका सबसे पहला और सीधा असर कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई और उसकी कीमतों पर पड़ता है।


वर्तमान स्थिति यह है कि पेट्रोलियम की हेराफेरी के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz), लगभग बंद होने की कगार पर है। ईरान द्वारा इस संकरे लेकिन बेहद अहम जलमार्ग पर की गई नाकेबंदी ने खाड़ी देशों के तेल टैंकरों का रास्ता रोक दिया है। सप्लाई बाधित होने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 40 प्रतिशत तक का भारी उछाल आया है, और यह लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है।


अगर यह रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाए, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की हाहाकार मच सकती है। लेकिन इस भयानक संकट के बीच सऊदी अरब एक बड़ी उम्मीद और "संकटमोचक" बनकर उभरा है। सऊदी अरब ने अपने एक ऐसे मास्टरप्लान को एक्टिवेट कर दिया है, जिसके जरिए होर्मुज को पार किए बिना ही दुनिया तक तेल पहुंचाया जा रहा है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम और सऊदी के 'प्लान B' का गहराई से विश्लेषण करते हैं।


होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और वैश्विक प्रभाव


Strait of Hormuz

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा जलमार्ग है। दुनिया भर में समुद्री रास्ते से जितना भी कच्चा तेल भेजा जाता है, उसका लगभग 20 प्रतिशत से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर का ज्यादातर तेल और गैस इसी मार्ग से दुनिया भर में जाता है।


अब चूंकि ईरान ने इस इलाके में तनाव बढ़ा दिया है और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर खतरा मंडरा रहा है, इसलिए दुनिया भर की तेल कंपनियों ने अपने जहाजों को इस रास्ते से भेजने में रोक लगा दी है। सप्लाई रुकने का सीधा मतलब है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे हर देश में महंगाई (Inflation) बढ़ेगी। लेकिन सऊदी अरब ने इस परिस्थिति को भांपते हुए एक ऐसा रास्ता निकाला है, जो आज पूरी दुनिया की ऊर्जा जरूरतों को बचा रहा है।


क्या है सऊदी अरब का ‘प्लान B'?  


इस मुश्किल घड़ी में सऊदी अरब ने अपनी रणनीतिक 'ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन' (East-West Crude Oil Pipeline) का इस्तेमाल तेज कर दिया है। इसे आधिकारिक तौर पर 'पेट्रोलाइन' (Petroline) के नाम से जाना जाता है।


Saudi Aramco Pipeline

यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत (जहां तेल के बड़े-बड़े कुएं हैं) से शुरू होती है और लाल सागर (Red Sea) के तट पर स्थित यान्बू (Yanbu) बंदरगाह तक जाती है। इस पूरी पाइपलाइन की लंबाई 1201 किलोमीटर है। यह पाइपलाइन पूर्वी हिस्से में स्थित अबकैक (Abqaiq) के ऑयल प्रोसेसिंग प्लांट को सीधे पश्चिमी तट के यान्बू बंदरगाह से जोड़ देती है। इस बाईपास व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सऊदी अरब को अपना तेल बेचने के लिए ईरान के करीब स्थित होर्मुज की खाड़ी से गुजरने की जरूरत ही नहीं पड़ती। वह सीधे लाल सागर से अपना तेल यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों में भेज सकता है।


युद्ध ने रखी थी इस पाइपलाइन की नींव 


यह 'प्लान B' कोई रातों-रात तैयार की गई व्यवस्था नहीं है। इसके पीछे सऊदी अरब की दशकों पुरानी दूरदर्शी सोच है। 'ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन' का निर्माण 1981 में पूरा हुआ था। यह वह दौर था जब ईरान और इराक के बीच भयानक युद्ध चल रहा था और उस समय भी फारस की खाड़ी से तेल ले जाना सुरक्षित नहीं था।


सऊदी अरब के नीति-निर्माताओं ने समझ लिया था कि भविष्य में युद्ध या राजनीतिक अस्थिरता के समय समुद्री मार्ग पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है। इसलिए उन्होंने जमीन के रास्ते इस महाकाय पाइपलाइन का निर्माण किया।


शुरुआती क्षमता: जब यह पाइपलाइन शुरू हुई थी, तब इसमें से प्रतिदिन 18.5 लाख बैरल तेल गुजरने की क्षमता थी।


1990 का दशक: बाद में खाड़ी युद्ध के समय 1990 के दशक में इसकी क्षमता बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन कर दी गई।


वर्तमान क्षमता: लगातार तकनीकी सुधारों और विस्तार के बाद, आज यह पाइपलाइन प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल क्रूड ऑयल ट्रांसपोर्ट करने की क्षमता रखती है।


वर्तमान संकट में अरामको (Aramco) का त्वरित एक्शन 


जैसे ही होर्मुज जलमार्ग पर ईरान का खतरा बढ़ा और वह लगभग बंद होने की स्थिति में आ गया, सऊदी अरब की राष्ट्रीय तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) ने बिना समय गंवाए इस पाइपलाइन का इस्तेमाल अपने चरम पर पहुंचा दिया।


अरामको के सीईओ अमीन नासर (Amin Nasser) के कुशल नेतृत्व में कंपनी ने अद्भुत फुर्ती दिखाई।


सामान्य दिनों में इस पाइपलाइन से रोजाना सिर्फ 28 लाख बैरल तेल ही भेजा जाता था। लेकिन संकट को देखते हुए महज 2 दिनों (48 घंटों) के भीतर इसकी क्षमता को बढ़ाकर इसकी अधिकतम सीमा 70 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचा दिया गया। सीईओ अमीन नासर ने बताया कि अब तेल के विशालकाय टैंकरों को फारस की खाड़ी के बंदरगाहों पर भेजने के बजाय लाल सागर पर स्थित यान्बू बंदरगाह की तरफ मोड़ दिया गया है।


30 विशालकाय जहाजों का बदला गया रूट


सप्लाई चैन को सुचारू रखने के लिए लगभग 30 VLCC (Very Large Crude Carrier) जहाजों को पश्चिमी तट की ओर डाइवर्ट कर दिया गया है। एक VLCC में लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल आ सकता है। जहाजों के इस डायवर्जन के कारण अब यान्बू (Yanbu) रातों-रात दुनिया का एक बेहद महत्वपूर्ण ऑयल हब बन गया है।


वर्तमान सप्लाई और स्टोरेज की व्यवस्था (Important Data)


सऊदी अरब की यह पेट्रोलाइन वर्तमान में कैसे काम कर रही है, इसके आंकड़े बेहद चौंकाने वाले और राहत देने वाले हैं पाइपलाइन से प्रतिदिन 70 लाख बैरल कच्चा तेल बह रहा है। इसमें से लगभग 50 लाख बैरल तेल सीधे यान्बू बंदरगाह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात (Export) कर दिया जाता है। बाकी बचा लगभग 20 लाख बैरल तेल पश्चिमी तट पर स्थित रिफाइनरियों में भेजा जाता है। यहां इसे रिफाइन करके स्थानीय जरूरतों के लिए पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। इस शानदार इंजीनियरिंग और रणनीतिक व्यवस्था के कारण सऊदी अरब आज के इस भयानक युद्ध के माहौल में भी अपनी कुल तेल निर्यात क्षमता का 70 प्रतिशत हिस्सा चालू रखने में सफल रहा है।


इसके अलावा, इस पाइपलाइन ने सऊदी अरब के पूर्वी तट पर स्थित रास तनुरा (Ras Tanura) जैसे बड़े ऑयल सेंटर्स को भी एक बड़ी मुसीबत से बचाया है। अगर तेल की निकासी नहीं होती, तो वहां स्थित स्टोरेज टैंक ओवरफ्लो हो सकते थे, लेकिन पेट्रोलाइन ने तेल का बहाव पश्चिम की तरफ मोड़कर इस समस्या को खत्म कर दिया।


नये रास्ते में भी छिपे हैं बड़े जोखिम  


हालांकि सऊदी अरब का यह प्लान B दुनिया को होर्मुज के संकट से बचा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया रास्ता भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। यहां भी कई नई चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। यान्बू बंदरगाह से जो तेल जहाजों में लादा जाता है, उसे वैश्विक बाजार (विशेषकर एशिया) में पहुंचने के लिए लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित 'बाब अल-मंडेब' (Bab el-Mandeb Strait) जलडमरूमध्य से होकर गुजरना पड़ता है। यह इलाका पिछले कई महीनों से भयंकर अशांति का शिकार है। यमन के हूती (Houthi) विद्रोहियों ने इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इसलिए, तेल से भरे टैंकरों को इस रास्ते से ले जाना खतरे से खाली नहीं है।


इसके साथ ही, खुद यान्बू बंदरगाह पर दुश्मन देशों या आतंकी गुटों द्वारा ड्रोन या अन्य उन्नत हथियारों से हमला होने का खतरा हमेशा बना रहता है। तेल के ठिकानों पर एक भी सफल हमला दुनिया भर में तेल की कीमतों को फिर से आग लगा सकता है।


अन्य खाड़ी देशों के पास क्या हैं विकल्प?  


सऊदी अरब की तरह कुछ अन्य देशों ने भी अपने लिए वैकल्पिक पाइपलाइनों का निर्माण किया है, लेकिन उनकी क्षमता बहुत सीमित है।


UAE की अबू धाबी पाइपलाइन: संयुक्त अरब अमीरात के पास 'अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन' है। यह पाइपलाइन हबशान (Habshan) से शुरू होकर फुजैरा (Fujairah) बंदरगाह तक जाती है (जो ओमान की खाड़ी में है और होर्मुज के बाहर है)। लेकिन इसकी क्षमता केवल 18 लाख बैरल प्रतिदिन है।


डॉल्फिन गैस पाइपलाइन: यह पाइपलाइन कतर से शुरू होकर UAE और ओमान तक प्राकृतिक गैस पहुंचाती है। यह भी चालू हालत में है।


इराक-तुर्की पाइपलाइन: इराक से तुर्की जाने वाली पाइपलाइन वर्तमान में राजनीतिक और तकनीकी कारणों से बंद पड़ी है।


ट्रांस-अरेबियन पाइपलाइन: सीरिया और लेबनान तक जाने वाली यह पुरानी पाइपलाइन तो 1990 के दशक में ही हमेशा के लिए बंद हो चुकी है।


समस्या यह है कि...


इन सभी चालू वैकल्पिक पाइपलाइनों की कुल क्षमता मिला भी ली जाए, तो यह होर्मुज जलमार्ग के सामने कुछ भी नहीं है। सामान्य दिनों में होर्मुज से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ (20 Million) बैरल कच्चा तेल गुजरता है। पाइपलाइनें इसका सिर्फ एक छोटा हिस्सा ही संभाल सकती हैं।


भविष्य की संभावनाएं और निष्कर्ष  


सऊदी अरब की पेट्रोलाइन ने भले ही दुनिया को तत्काल एक बड़े ऊर्जा संकट और पेट्रोल की आसमान छूती कीमतों से बचा लिया है, लेकिन यह एक स्थायी समाधान नहीं है। पाइपलाइनों की अपनी एक सीमित क्षमता होती है और वे विशालकाय तेल टैंकरों की अबाध आवाजाही का पूरी तरह से विकल्प नहीं बन सकतीं।


वर्तमान में दुनिया भर के शेयर बाजार, अर्थव्यवस्थाएं और राजनेता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) के नेतृत्व में चल रहे कूटनीतिक प्रयासों पर नजर गड़ाए बैठे हैं। जब तक कूटनीति के जरिए खाड़ी देशों में शांति बहाल नहीं होती और होर्मुज का समुद्री मार्ग पूरी तरह से सुरक्षित होकर नहीं खुलता, तब तक वैश्विक तेल बाजार के लिए सऊदी अरब की पाइपलाइन एक लाइफलाइन बनी रहेगी।


अंततः, दुनिया को एक बड़े ऊर्जा और आर्थिक संकट से बचाने के लिए युद्ध को रोकना ही एकमात्र स्थायी विकल्प है। अगर तनाव और बढ़ता है, तो लाल सागर का रास्ता भी ब्लॉक हो सकता है, जिसके बाद दुनिया के पास कोई 'प्लान C' नहीं बचेगा।


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