Nirmala Sitharaman on Petrol Diesel Price Drop: वेस्ट एशिया संकट के बीच मोदी सरकार का आम आदमी को बड़ी राहत देने वाला फैसला। देश में पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर कम कर दी गई है। इसके साथ ही घरेलू सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए एक्सपोर्ट पर भी सख्ती की गई है। जानिए नई कीमतों और इस अहम फैसले से जुड़ी हर एक बारीक जानकारी।
![]() |
| Nirmala Sitharaman on Petrol Diesel Price Drop |
नई दिल्ली, 27 मार्च: लगातार बढ़ती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार की उठापटक के बीच आम आदमी के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। अगर आप भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर परेशान थे, तो आज की सुबह आपके लिए एक अच्छी खबर लेकर आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 27 मार्च 2026 की सुबह एक अहम घोषणा करते हुए बताया कि सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती की है।
In view of the West Asia crisis, the central excise duty on petrol and diesel for domestic consumption has been reduced by ₹10 per litre each. This will provide protection to consumers from rise in prices. Hon. PM @narendramodi has always ensured that citizens are protected from…
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) March 27, 2026
सीधे शब्दों में कहें तो अब आपके शहर के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल दोनों ही 10 रुपये प्रति लीटर सस्ते हो जाएंगे। यह फैसला सिर्फ कीमतों को कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे ग्लोबल राजनीति और देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने की एक बड़ी रणनीति भी काम कर रही है।
आखिर सरकार को अचानक क्यों लेना पड़ा यह फैसला?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी देते हुए इस फैसले के पीछे की सबसे बड़ी वजह 'वेस्ट एशिया संकट' को बताया है। हम सभी जानते हैं कि वेस्ट एशिया (मध्य पूर्व) कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत है। वहां जब भी कोई भू-राजनीतिक संकट या तनाव पैदा होता है, तो उसका सीधा असर दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर पड़ता है। सप्लाई बाधित होने के डर से कच्चे तेल के दाम आसमान छूने लगते हैं।
ऐसी स्थिति में अगर सरकार दखल न दे, तो तेल कंपनियां यह सारा बोझ सीधा ग्राहकों पर डाल देती हैं। इसी खतरे को भांपते हुए केंद्र सरकार ने समय रहते कदम उठाया और अपनी तरफ से वसूली जाने वाली एक्साइज ड्यूटी को 10 रुपये कम कर दिया। इसका मकसद एकदम साफ है—अंतरराष्ट्रीय बाजार में चाहे जो भी अस्थिरता हो, देश के आम नागरिक को उस महंगाई की मार से बचाना है।
पीएम मोदी का विजन: नागरिक सुरक्षा सबसे ऊपर
वित्त मंत्री ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि देश के नागरिकों को जरूरी सामानों की कीमतों में होने वाले अचानक बदलावों से सुरक्षित रखा जाए। पेट्रोल और डीजल सिर्फ गाड़ियां चलाने के काम नहीं आते। इन पर हमारी पूरी ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था टिकी है। जब डीजल 10 रुपये सस्ता होता है, तो ट्रकों का भाड़ा कम होता है। इसका सीधा असर आपकी रोजमर्रा की चीजों पर पड़ता है। सब्जियां, फल, अनाज और कारखानों में बनने वाला सामान—सब कुछ ट्रांसपोर्ट के जरिए ही बाजार तक पहुंचता है। इसलिए यह 10 रुपये की कटौती असल में पूरे बाजार की महंगाई को कंट्रोल करने का काम करेगी।
एक्सपोर्ट पर सख्ती: यह समझना भी है जरूरी
इस घोषणा का एक दूसरा हिस्सा भी है जो अर्थव्यवस्था के नजरिए से बहुत अहम है। सरकार ने सिर्फ घरेलू टैक्स कम नहीं किया है, बल्कि देश से बाहर जाने वाले तेल पर भारी टैक्स लगा दिया है।
वित्त मंत्री के मुताबिक, अब डीजल के एक्सपोर्ट (निर्यात) पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ (Aviation Turbine Fuel यानी हवाई जहाजों का ईंधन) के एक्सपोर्ट पर 29.5 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी लगा दी गई है।
यह भी पढेंः सोना-चांदी दोनों धड़ाम! 27 मार्च को दिल्ली में Gold 144690 रुपये, चांदी 249900 रुपये - जानें आपके शहर का ताजा भाव
शायद आप सोचें कि सरकार ने ऐसा क्यों किया? दरअसल, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बहुत ज्यादा होते हैं, तो देश की प्राइवेट रिफाइनरियां ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में अपना तेल भारत में बेचने के बजाय विदेशों में बेचना शुरू कर देती हैं। अगर ऐसा बड़े पैमाने पर होने लगे, तो हमारे अपने देश के पेट्रोल पंपों पर तेल की कमी हो सकती है।
इस स्थिति को रोकने के लिए ही सरकार ने एक्सपोर्ट पर 21.5 रुपये और 29.5 रुपये का तगड़ा टैक्स लगा दिया है। इससे कंपनियों के लिए विदेशों में तेल बेचना महंगा हो जाएगा और वे अपना तेल घरेलू बाजार में ही बेचेंगी। सरकार का सीधा संदेश है कि पहले देश की जरूरतें पूरी होनी चाहिए, उसके बाद ही विदेशी व्यापार के बारे में सोचा जाएगा। इस फैसले की आधिकारिक सूचना संसद को भी दे दी गई है।
आगे क्या उम्मीद की जाए?
कुल मिलाकर यह एक बेहद संतुलित और सोच-समझकर उठाया गया कदम नजर आता है। एक तरफ सरकार ने टैक्स का अपना हिस्सा छोड़कर आम आदमी को 10 रुपये की सीधी राहत दी है, तो दूसरी तरफ एक्सपोर्ट पर सख्ती करके यह सुनिश्चित किया है कि देश में ईंधन की कोई किल्लत न होने पाए।
आने वाले एक-दो दिनों में सभी पेट्रोल पंपों पर नई दरें पूरी तरह से लागू हो जाएंगी। अगर आप अपनी गाड़ी का टैंक फुल कराने का मन बना रहे थे, तो शायद आपको थोड़ा इंतजार कर लेना चाहिए ताकि आप इस नई और घटी हुई कीमत का पूरा फायदा उठा सकें।

