Stock Market Crash: 27 मार्च को शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। मुनाफावसूली, कमजोर रुपया और कच्चे तेल में उबाल समेत इन 7 कारणों से निवेशकों में मची है अफरातफरी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
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नई दिल्ली, 27 मार्च: शेयर बाजार का मूड और मिजाज कब बदल जाए, यह कह पाना बड़े-बड़े दिग्गजों के लिए भी मुश्किल होता है। पिछले दो दिनों से बाजार में जो हरियाली छाई थी, वह 27 मार्च को लाल रंग में बदल गई। दलाल स्ट्रीट पर आज फिर से मायूसी का माहौल है। निवेशकों को उम्मीद थी कि 24 और 25 मार्च को आई शानदार रिकवरी आगे भी जारी रहेगी, लेकिन ग्लोबल संकेतों और घरेलू चिंताओं ने बाजार को फिर से नीचे धकेल दिया है।
अगर आप भी शेयर बाजार में पैसा लगाते हैं और आज अपनी पोर्टफोलियो को लाल निशान में देखकर परेशान हैं, तो आपको यह समझना बहुत जरूरी है कि आखिर बाजार में यह भूचाल आया क्यों? एक सीनियर मार्केट एडिटर के तौर पर, मैं आपको उन 7 प्रमुख वजहों के बारे में विस्तार से बताने जा रहा हूं, जिन्होंने आज बाजार का गणित बिगाड़ दिया है।
1. मुनाफवसूली (Profit Booking): ऊपरी स्तरों पर निकलने की होड़
बाजार गिरने की सबसे पहली और तकनीकी वजह है 'प्रॉफिट बुकिंग'। दरअसल, 24 मार्च और 25 मार्च को बाजार ने एक शानदार कमबैक किया था। इन दो दिनों में प्रमुख सूचकांकों में करीब 3.5 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली थी। जब बाजार इतने कम समय में इतना चल जाता है, तो निचले स्तरों पर खरीदारी करने वाले निवेशक अपना मुनाफा घर ले जाना पसंद करते हैं।
एक्सपर्ट्स का साफ तौर पर कहना है कि 27 मार्च को जो गिरावट दिखी, उसमें उन निवेशकों का बड़ा हाथ है जो काफी समय से 'फंसे' हुए महसूस कर रहे थे। ये वो लोग हैं जिन्होंने पहले हाई लेवल पर शेयर खरीदे थे और बाजार गिरने पर अटक गए थे। जैसे ही बाजार में थोड़ी रिकवरी आई, इन निवेशकों ने अपना पैसा निकालने (बिकवाली करने) में ही भलाई समझी। इसे बाजार की भाषा में "Sell on Rise" यानी उछाल पर बेचने की रणनीति कहा जाता है।
2. भू-राजनीतिक तनाव: ट्रंप की चेतावनी और ईरान का अड़ियल रुख
बाजार को अनिश्चितता बिल्कुल पसंद नहीं है, और इस समय दुनिया में अनिश्चितता का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच का तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों को लेकर जो रोक लगाई थी, उसे 6 अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया है। यह एक तरह की राहत थी, लेकिन ईरान का रुख अभी भी नरम नहीं हुआ है।
ईरान झुकने को तैयार नहीं है और यह तनातनी खत्म होती नहीं दिख रही। शेयर बाजार के लिए यह 'जियो-पॉलिटिकल टेंशन' किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। निवेशकों को डर है कि अगर 6 अप्रैल के बाद स्थिति बिगड़ी, तो इसका सीधा असर ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ेगा। यही डर आज बाजार में बिकवाली के रूप में साफ दिखाई दिया।
3. ग्लोबल बाजारों का 'पैनिक' (Global Sell-off)
हम एक ग्लोबलाइज्ड दुनिया में रहते हैं, जहां अमेरिका में अगर छींक आती है, तो बाकी दुनिया को जुकाम हो जाता है। 26 मार्च को अमेरिकी शेयर बाजारों में कोहराम मच गया। वॉल स्ट्रीट (अमेरिकी बाजार) के प्रमुख सूचकांक लगभग 2% तक टूट गए। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह रही कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में उछाल आया है।
10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US Treasury Yield) 4.4% के पार निकल गई है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो इक्विटी मार्केट के लिए यह बुरा संकेत होता है क्योंकि पैसा शेयर बाजार से निकलकर सुरक्षित बॉन्ड की तरफ भागता है। अमेरिकी बाजार सितंबर के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। इसका सीधा 'डोमिनो इफेक्ट' 27 मार्च को एशियाई बाजारों पर पड़ा।
- दक्षिण कोरिया: यहां का बाजार 2.7% टूट गया।
- ताइवान: यहां के शेयरों में 1.4% की गिरावट दर्ज की गई।
- भारत भी इस ग्लोबल बिकवाली की लहर से अछूता नहीं रह सका।
4. कच्चा तेल: महंगाई की आग में घी
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चा तेल (Crude Oil) हमेशा से एक विलेन रहा है। कुछ समय तक कीमतें शांत रहने के बाद, अब क्रूड ऑयल फिर से उफान पर है। 27 मार्च को ब्रेंट क्रूड का भाव 108 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
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भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है। ऐसे में जब तेल 108 डॉलर पर पहुंचता है, तो देश का आयात बिल (Import Bill) बढ़ जाता है, महंगाई बढ़ती है और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आता है। क्रूड में आई यह तेजी बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है और इसने निवेशकों का सेंटिमेंट खराब कर दिया है।
5. रुपये की ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के आगे बेबस रुपया
शुक्रवार का दिन भारतीय करेंसी के लिए काले अक्षरों में लिखा जाएगा। डॉलर के मुकाबले रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर (Record Low) पर पहुंच गया है। रुपया गिरकर 94.44 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया है। यह आंकड़ा डराने वाला है।
28 फरवरी से जब से इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात बने हैं और संघर्ष शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक रुपये में लगभग 4% की गिरावट आ चुकी है। बाजार को डर है कि मध्य-पूर्व (Middle East) में चल रहा यह युद्ध लंबा खिंच सकता है। अगर ऐसा हुआ तो ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) का संकट पैदा होगा। भारत जैसी अर्थव्यवस्था, जो ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर है, उसके लिए कमजोर रुपया और महंगा तेल 'दोहरी मार' जैसा है।
6. विदेशी निवेशकों (FIIs) की बेरुखी
शेयर बाजार में तेजी लाने के लिए विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का पैसा बहुत मायने रखता है। लेकिन फिलहाल वे भारतीय बाजार से अपना हाथ खींच रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले दो सत्रों में जब बाजार में 3.5% की तेजी आई थी, तब भी विदेशी निवेशक खुश नहीं थे।
आंकड़े बताते हैं कि तेजी के उन दोनों दिनों में भी विदेशी निवेशक 'शुद्ध विक्रेता' (Net Sellers) ही बने रहे। यानी उन्होंने खरीदारी से ज्यादा बिकवाली की। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक FIIs की तरफ से बिकवाली का दबाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में कोई भी तेजी टिकाऊ नहीं होगी। वे हर उछाल का इस्तेमाल अपने शेयर बेचने के लिए कर रहे हैं।
7. India VIX में उछाल: खतरे की घंटी
बाजार में डर कितना है, इसे नापने का पैमाना है 'India VIX'। इसे वोलैटिलिटी इंडेक्स भी कहते हैं। 27 मार्च को VIX में 7.5% की जोरदार तेजी देखी गई और यह 26.53 के स्तर पर पहुंच गया।
आम भाषा में समझें तो VIX का 20 से ऊपर जाना ही खतरे का संकेत होता है, और अब यह 26 के पार है। इसका सीधा मतलब है कि बाजार में अस्थिरता बहुत ज्यादा है। ट्रेडर और निवेशक डरे हुए हैं और उन्हें लग रहा है कि आने वाले दिनों में बाजार में और भी बड़ी उठापटक या गिरावट देखने को मिल सकती है। जब VIX बढ़ता है, तो यह संकेत देता है कि 'बिकवाली का दबाव' निकट भविष्य में बढ़ सकता है।
कुल मिलाकर देखें तो बाजार इस समय चौतरफा मार झेल रहा है। एक तरफ ग्लोबल संकेत कमजोर हैं, युद्ध का डर बना हुआ है और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है। वहीं दूसरी तरफ घरेलू मोर्चे पर कमजोर रुपया और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की कमर तोड़ दी है। एक्सपर्ट्स की राय है कि जब तक VIX नीचे नहीं आता और वैश्विक स्थिति में सुधार नहीं होता, छोटे निवेशकों को बहुत संभलकर रहने की जरूरत है। बाजार में अभी 'वेट एंड वॉच' (Wait and Watch) की रणनीति अपनाना ही सबसे समझदारी भरा कदम हो सकता है।
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