फिजिकल गोल्ड की झंझट छोड़ें! Gold-Silver ETF में निवेश का ये है सही तरीका, जानिए फंड चुनने के 5 बड़े नियम

MoneySutraHub Team

 How to invest in ETF: गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेश करना चाहते हैं? जानिए सही ETF चुनने का तरीका, एक्सपेंस रेशियो, लिक्विडिटी और पोर्टफोलियो में इसके सही हिस्से की पूरी जानकारी।

How to invest in ETF

अहमदाबाद: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और ग्लोबल मार्केट में मचे उथल-पुथल के बीच निवेशक एक बार फिर 'सेफ हेवन' यानी सुरक्षित निवेश की तरफ भाग रहे हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ हफ्तों में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।


पहले के समय में लोग सुरक्षा के लिए तिजोरियों में सोने-चांदी के सिक्के या गहने रखते थे। लेकिन आज के डिजिटल दौर में फिजिकल गोल्ड को स्टोर करने और उसकी सुरक्षा की झंझट खत्म हो गई है। अब निवेशक ‘गोल्ड और सिल्वर ETF' (Exchange Traded Funds) को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। अगर आप भी इसमें पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो निवेश से पहले जान लीजिए कि सही फंड कैसे चुना जाता है।


गोल्ड और सिल्वर ETF क्या बला है?


आसान भाषा में समझें तो गोल्ड और सिल्वर ETF ऐसे म्यूचुअल फंड हैं जो सीधे सोने और चांदी की बाजार कीमत (Market Price) पर चलते हैं। आप इन्हें शेयर बाजार में किसी भी आम शेयर की तरह खरीद और बेच सकते हैं। आप ETF की जितनी यूनिट खरीदते हैं, उसके पीछे फंड हाउस उतनी ही कीमत का असली सोना या चांदी सुरक्षित रखता है। इसके भाव मार्केट के दौरान रियल टाइम में बदलते रहते हैं।


निवेश का क्या है प्रोसेस?


इसमें निवेश करना बहुत ही आसान है:


  • सबसे पहले आपके पास एक एक्टिव डीमैट (Demat) और ट्रेडिंग अकाउंट होना चाहिए।
  • अपने ब्रोकर के ऐप पर जाएं और गोल्ड या सिल्वर ETF सर्च करें।
  • अपनी पसंद का ETF चुनें, यूनिट्स की संख्या तय करें और मार्केट या लिमिट ऑर्डर लगाकर खरीद लें।
  • कुछ ही समय में ये यूनिट्स आपके डीमैट खाते में जमा हो जाएंगी।


सही ETF कैसे चुनें? 


ज्यादातर लोग सिर्फ पिछला रिटर्न देखकर पैसा लगा देते हैं, जो कि गलत तरीका है। Mirae Asset Investment Managers के एक्सपर्ट सिद्धार्थ श्रीवास्तव के अनुसार, सही ETF चुनते वक्त इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:


1) कम एक्सपेंस रेशियो: यह वह फीस है जो फंड हाउस आपसे मैनेजमेंट के लिए लेता है। यह जितना कम होगा, आपका मुनाफा उतना ही ज्यादा होगा।


2) ट्रैकिंग एरर (Tracking Error): आपका ETF असली सोने-चांदी की कीमत को कितनी सटीकता से फॉलो कर रहा है, उसे ट्रैकिंग एरर कहते हैं। यह हमेशा कम होना चाहिए।


3) लिक्विडिटी (Liquidity): उस फंड में ट्रेडिंग वॉल्यूम अच्छा होना चाहिए। ताकि जब आप इसे बेचना चाहें, तो आपको तुरंत सही कीमत पर खरीदार मिल जाए।


4) बड़ा AUM (Asset Under Management): जिस फंड में ज्यादा पैसा लगा हो (बड़ा AUM), वह निवेशकों के भरोसे का प्रतीक होता है।


5) फंड हाउस की साख: हमेशा किसी जानी-मानी और पुरानी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) का ETF ही चुनें।


गोल्ड और सिल्वर ETF में क्या है अंतर?


सोने को हमेशा से एक सुरक्षित संपत्ति माना गया है, खासकर संकट के समय इसकी मांग तेजी से बढ़ती है। वहीं चांदी का इस्तेमाल इंडस्ट्रीज में बहुत ज्यादा होता है, इसलिए इसकी कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव (Volatility) देखा जाता है।


अगर आप कम रिस्क लेना चाहते हैं, तो गोल्ड ETF आपके लिए बेस्ट है। लेकिन अगर आप थोड़ा ज्यादा रिस्क उठाकर अच्छा रिटर्न चाहते हैं, तो पोर्टफोलियो में कुछ हिस्सा सिल्वर ETF का भी रख सकते हैं।


पोर्टफोलियो में कितना हिस्सा रखें?


फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की मानें तो आपके कुल निवेश (Portfolio) का 5 से 15 प्रतिशत हिस्सा ही सोने या चांदी में होना चाहिए। हालांकि, यह पूरी तरह से आपकी उम्र, आपके लक्ष्य और रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर करता है।


लंबी रेस के घोड़े बनें


गोल्ड और सिल्वर ETF रातों-रात अमीर बनने की मशीन नहीं हैं। इनका असली काम शेयर बाजार क्रैश होने पर आपके पोर्टफोलियो को भारी नुकसान से बचाना और स्थिरता देना है। इसलिए, बाजार में तेजी देखकर एकदम से सारा पैसा न लगाएं और न ही थोड़ी सी गिरावट आने पर घबराकर बेचें।


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(Disclaimer: यहाँ दी गई जानकारी केवल ज्ञान बढ़ाने के लिए है। किसी भी तरह का निवेश करने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।)


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