Global LNG export: मिडिल ईस्ट जंग से ग्लोबल LNG एक्सपोर्ट 6 महीने के निचले स्तर पर है। कतर प्लांट पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बड़ा गैस संकट।
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| Middle East conflict |
नई दिल्ली, 23 मार्चः पश्चिम एशिया में भड़कती आग अब दुनिया भर की रसोई और बड़े उद्योगों तक पहुंचने लगी है। ग्लोबल स्तर पर लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का एक्सपोर्ट बुरी तरह लड़खड़ा गया है और यह पिछले 6 महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गिरा है। अमेरिका और कनाडा जैसे देशों ने हाल ही में दुनिया की मांग पूरी करने के लिए सप्लाई बढ़ाने वाले कई नए प्रोजेक्ट शुरू किए थे। अब मिडिल ईस्ट में फैली जंग ने उन सारी कोशिशों पर पानी फेर दिया है।
यह पूरी उथल-पुथल 28 फरवरी को इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई सीधी लड़ाई का नतीजा है। यह टकराव अब सिर्फ दो देशों का मुद्दा नहीं रहा बल्कि एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले चुका है। इसका सीधा और सबसे खतरनाक असर दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है। यह संकरा समुद्री रास्ता पूरी दुनिया के लिए कच्चे तेल और गैस की सप्लाई की मुख्य लाइफलाइन माना जाता है और अब यह लगभग बंद होने की कगार पर है।
व्यापारिक यातायात पर सख्त पाबंदियां
ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग से होने वाले व्यापारिक यातायात पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं। तेहरान ने बिल्कुल साफ कर दिया है कि अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देशों के किसी भी जहाज को इस रास्ते से गुजरने की इजाजत नहीं मिलेगी। अन्य देशों के व्यापारिक जहाजों को पूरी तरह रोका तो नहीं गया है लेकिन उनके लिए भी नियम बेहद कड़े कर दिए गए हैं। अब किसी भी देश के जहाज को यहां से गुजरने के लिए सुरक्षा और आवाजाही के तालमेल के लिए सीधे तेहरान से संपर्क करना पड़ रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि ग्लोबल गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह से बाधित हो चुकी है।
बाजार के आंकड़ों पर नजर
बाजार के आंकड़ों पर नजर रखने वाली संस्था केप्लर (Kpler) के शिप-ट्रैकिंग डेटा और ब्लूमबर्ग की एनालिसिस ने इस संकट की गंभीरता को साबित कर दिया है। आंकड़े बताते हैं कि मार्च की शुरुआत से लेकर अब तक LNG शिपमेंट का 10 दिन का मूविंग एवरेज करीब 20 प्रतिशत तक नीचे गिर चुका है। अब यह एक्सपोर्ट आंकड़ा सिमट कर 1.1 मिलियन टन पर आ गया है। पिछले साल सितंबर के बाद से ऊर्जा बाजार में इतनी बड़ी गिरावट कभी नहीं देखी गई थी।
गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण
इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण कतर और कुछ हद तक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से होने वाली गैस सप्लाई का रुकना है। एशिया और यूरोप के बाजारों तक गैस पहुंचाने के लिए इन दोनों प्रमुख उत्पादक देशों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही होकर गुजरना पड़ता है। रास्ता बाधित होने से इनके जहाज सही समय पर ग्राहकों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
इस पूरी जंग में कतर को ऊर्जा के मोर्चे पर सबसे भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ईरान की तरफ से हुए हालिया हमलों के बाद कतर को रास लाफान में मौजूद अपना विशाल LNG एक्सपोर्ट प्लांट मजबूरन बंद करना पड़ा। यह दुनिया का सबसे बड़ा LNG प्लांट है और इसका बंद होना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ा झटका है।
प्लांट पर एक और बड़ा हमला
हालात तब और बिगड़ गए जब पिछले हफ्ते इस प्लांट पर एक और बड़ा हमला हुआ। इस झटके ने कतर की गैस उत्पादन और एक्सपोर्ट क्षमता को गहरा घाव दिया है। प्लांट में काम करने वाली कुल 14 प्रोडक्शन ट्रेनों में से दो पूरी तरह डैमेज हो गई हैं। स्थिति इतनी खराब है कि विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों ट्रेनों को दोबारा ठीक करके उत्पादन शुरू करने में कई साल लग जाएंगे।
पिछले एक साल से दुनिया भर में LNG का प्रोडक्शन काफी अच्छी रफ्तार से बढ़ रहा था। बाजार में एक स्थिरता आ रही थी। लेकिन कतर से आने वाली गैस की सप्लाई रुकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ब्लॉक होने की वजह से वह सारी बढ़त अब खत्म होती जा रही है।
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| Qatar LNG plant attack |
भविष्य की तस्वीर और भी डराने वाली
भविष्य की तस्वीर और भी डराने वाली लग रही है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने तनाव को चरम पर पहुंचाते हुए एक नई चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि अगर अमेरिका ने ईरान के किसी भी बिजली संयंत्र पर हमला करने की गलती की तो ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह और अनिश्चित काल के लिए बंद कर देगा। चेतावनी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जलमार्ग तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक कि बर्बाद हुए ईरानी बिजली संयंत्रों का दोबारा पूरी तरह निर्माण नहीं हो जाता। अगर यह नौबत आती है तो दुनिया को एक ऐसे ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा जिसकी कल्पना भी अभी मुश्किल है।


