Stock Market News: GIFT Nifty में भारी उठापटक! ट्रंप के शांति के बयान से आई तेजी, पर ईरान-इजरायल के नए हमलों से बाजार सहम गया। जानें कच्चे तेल और सोने पर इसका क्या असर होगा, और अब निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए।
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नई दिल्ली, 24 मार्चः शेयर बाजार के निवेशकों के लिए पिछला 24 घंटा किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहा। एक पल में बाजार आसमान छूता दिखा तो दूसरे ही पल जमीन पर आ गया। इस पूरे खेल के केंद्र में रहा मिडिल ईस्ट का बढ़ता तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान, जिसने पहले तो उम्मीद जगाई लेकिन कुछ ही घंटों में वह उम्मीद धुंधली पड़ गई।
सोमवार शाम को जैसे ही खबर आई कि ट्रंप ने ईरान पर हमले रोकने और बातचीत की पहल की है, बाजार में मानो खुशी की लहर दौड़ गई। भारतीय बाजार के लिए शुरुआती संकेत देने वाले GIFT Nifty में देखते ही देखते 900 अंकों का भारी उछाल आ गया। निवेशकों को लगा कि मिडिल ईस्ट में शांति की पहल हो रही है और युद्ध का खतरा टल गया है। लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी।
एक बयान से आई तेजी, दो खबरों ने बिगाड़ा खेल मंगलवार की सुबह जब भारतीय निवेशक बाजार खुलने का इंतजार कर रहे थे, तब तक माहौल पूरी तरह बदल चुका था। सोमवार को जो GIFT Nifty 900 अंक ऊपर था, वह अपनी आधी से ज्यादा बढ़त गंवा चुका था। सुबह करीब 8:50 बजे यह 402 अंकों (1.79%) की बढ़त के साथ कारोबार तो कर रहा था, लेकिन वह शुरुआती उत्साह गायब था।
इसकी वजह बनी मिडिल ईस्ट से आईं दो बड़ी और चिंताजनक खबरें:
इजरायल का एक्शन: ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटों के अंदर इजरायल ने तेहरान पर नए हमले शुरू कर दिए। इजरायली सेना ने साफ कर दिया कि अमेरिका भले ही अपने ऑपरेशन रोक दे, लेकिन उनके हमले जारी रहेंगे। इस खबर ने शांति की उम्मीदों को सबसे बड़ा झटका दिया।
ईरान का इनकार: उधर ईरान की तरफ से भी किसी भी तरह की बातचीत की संभावना को खारिज कर दिया गया। ईरान के एक सांसद ने साफ कहा कि अमेरिका से कोई बातचीत नहीं होगी। इससे कूटनीतिक समाधान के सारे रास्ते बंद होते दिखे।
क्यों है GIFT Nifty इतना महत्वपूर्ण? कई नए निवेशकों के मन में सवाल होगा कि GIFT Nifty आखिर है क्या। दरअसल, यह सिंगापुर एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाला निफ्टी का ही एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट है। चूंकि यह भारतीय बाजार खुलने से काफी पहले ही ट्रेड होने लगता है, इसलिए इससे यह अंदाजा लग जाता है कि आज भारतीय बाजार (NSE और BSE) की शुरुआत कैसी हो सकती है तेजी के साथ या गिरावट के साथ। इसीलिए निवेशक इस पर पैनी नजर रखते हैं।
युद्ध में नए खिलाड़ियों की एंट्री का डर बाजार के डर को और बढ़ाने का काम 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) की एक रिपोर्ट ने किया। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फारस की खाड़ी में मौजूद अमेरिका के सहयोगी देश भी अब ईरान के खिलाफ इस लड़ाई में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो यह संघर्ष और ज्यादा बड़ा और खतरनाक हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इसी डर से निवेशक अपना पैसा निकालकर सुरक्षित जगहों पर लगाना चाहते हैं।
कच्चे तेल और सोने का क्या है हाल?
कच्चा तेल (Crude Oil): सोमवार को कच्चे तेल में 11% की बड़ी गिरावट आई थी, क्योंकि बाजार को लगा था कि तनाव कम होगा। लेकिन मंगलवार को जैसे ही माहौल बदला, तेल की कीमतों में आग लग गई। ब्रेंट क्रूड का भाव 3.5% उछलकर $103.50 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। इसकी सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का लगभग बंद हो जाना है। यह दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है और यहां से सप्लाई रुकने का मतलब है दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और महंगाई का बढ़ना।
सोना (Gold): हैरानी की बात यह है कि ऐसे तनाव के माहौल में भी सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। आमतौर पर जब भी बाजार में डर बढ़ता है, तो लोग सोने में निवेश करते हैं और उसकी कीमत बढ़ती है। लेकिन इस बार सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है, जो बाजार में फैली भारी अनिश्चितता और कन्फ्यूजन को दिखाता है।
वैश्विक बाजारों से भी मिल रहे कमजोर संकेत इस तनाव का असर सिर्फ भारतीय बाजारों पर ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर दिख रहा है।
अमेरिकी फ्यूचर्स बाजार: अमेरिका के S&P 500 फ्यूचर्स में 0.6% की गिरावट देखी गई, जो इस बात का संकेत है कि अमेरिकी बाजार भी आज कमजोरी के साथ खुल सकते हैं।
सप्लाई चेन का खतरा: होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है, जिससे सिर्फ तेल ही नहीं बल्कि बाकी सामानों की सप्लाई पर भी भारी खतरा मंडरा रहा है।
अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार इस समय बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ शांति की हल्की सी उम्मीद बनती है। तो दूसरी तरफ युद्ध का खतरा उसे खत्म कर देता है। ऐसे में निवेशकों के लिए "देखो और इंतजार करो" की रणनीति अपनाना ही सबसे बेहतर है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि जब तक मिडिल ईस्ट की स्थिति साफ नहीं हो जाती, तब तक बाजार में बड़ा निवेश करने से बचें। बाजार में उतार-चढ़ाव अभी जारी रह सकता है। किसी भी तरह का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर बात करें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। बाजार की नजरें अब पूरी तरह से ईरान, इजरायल और अमेरिका के अगले कदमों पर टिकी रहेंगी।
डिस्क्लेमर: यहां पर दिए गए विचार और इन्वेस्टमेंट सलाह इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के अपने विचार और सलाह हैं। MoneysutraHub.in यूज़र्स को सलाह देता है कि कोई भी इन्वेस्टमेंट का फैसला लेने से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

