US Supreme court tariff decision: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका! अमेरिकी कोर्ट ने रद्द किए गए टैरिफ के रिफंड का आदेश दिया है। सरकार को 175 अरब डॉलर वापस लौटाने पड़ सकते हैं।
अमेरिकाः डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के लिए एक बहुत बुरी खबर सामने आई है। न्यूयॉर्क के एक फेडरल जज ने ट्रंप सरकार को करारा झटका देते हुए रद्द किए जा चुके टैरिफ का पैसा वापस (रिफंड) करने का आदेश दिया है। इस फैसले का सीधा असर अमेरिकी खजाने पर पड़ेगा, जिसे अब रिफंड के तौर पर लगभग 175 अरब डॉलर चुकाने पड़ सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
U.S. कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जज रिचर्ड ईटन ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया। उन्होंने अपने आदेश में साफ लिखा है कि जिन कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए टैरिफ का पेमेंट किया था, वे सभी अपना पैसा वापस पाने की हकदार हैं। यह फैसला उन तमाम इंपोर्टर्स के लिए एक बड़ी जीत है, जो अपने पैसों की वापसी का इंतजार कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में किया था रद्द
आपको बता दें कि पिछले साल ट्रंप सरकार ने भारत समेत लगभग 60 देशों के खिलाफ भारी-भरकम टैरिफ लागू किए थे। इसके लिए उन्होंने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल किया था। लेकिन इस साल 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इन टैरिफ को गैर-कानूनी बताते हुए खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि राष्ट्रपति ने इतने बड़े लेवी लगाकर अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया है। हालांकि, उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं कहा था।
कितना पैसा देना होगा वापस?
जज ईटन के इस नए फैसले ने रिफंड की तस्वीर पूरी तरह साफ कर दी है। पेन व्हार्टन बजट मॉडल के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी सरकार ने दिसंबर के मध्य तक इन अवैध टैरिफ से 130 अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई की थी। अब अनुमान है कि सरकार को रिफंड के रूप में 175 अरब डॉलर तक की भारी रकम चुकानी पड़ सकती है।
जज ईटन ने यह खास फैसला टेनेसी की 'एटमस फिल्ट्रेशन' नामक कंपनी के मामले की सुनवाई करते हुए दिया। यह कंपनी फिल्टर बनाती है और लंबे समय से अपने रिफंड की मांग कर रही थी।
ट्रंप प्रशासन की चाल हुई नाकाम
ट्रंप सरकार ने इस रिफंड प्रोसेस को धीमा करने और टालने की बहुत कोशिश की, लेकिन इस हफ्ते की शुरुआत में एक और फेडरल कोर्ट ने उनकी इस अपील को सिरे से खारिज कर दिया। U.S. कोर्ट ऑफ अपील्स ने रिफंड प्रोसेस का अगला चरण शुरू करने की अनुमति दे दी है और न्यूयॉर्क ट्रेड कोर्ट को मामला जल्द सुलझाने का निर्देश दिया है।
अब सबसे बड़ी चुनौती ‘U.S. कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी' के सामने है, जिसे इतनी बड़ी रकम वापस करने का सही और सुरक्षित तरीका खोजना होगा।

