क्रूड ऑयल में 4 साल का सबसे बड़ा उछाल, भाव $80 के पार; अमेरिका-ईरान जंग से शेयर बाजार में हाहाकार

MoneySutraHub Team

 Crude Oil Prices: कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 4 साल की सबसे बड़ी तेजी। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण भाव 80 डॉलर के पार। जानें शेयर बाजार और महंगाई पर इसका सीधा असर।

Crude Oil Prices: कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 4 साल की सबसे बड़ी तेजी।

नई दिल्ली: सोमवार, 2 मार्च को कच्चे तेल (Crude Oil) के बाजार में पिछले 4 सालों का सबसे बड़ा भूचाल देखने को मिला। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच भड़कती जंग ने क्रूड ऑयल की कीमतों में आग लगा दी है। हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि कच्चा तेल एक झटके में 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। दुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक नसों में से एक 'स्ट्रेट ऑफ होरमुज' के जरिए ऑयल टैंकरों की आवाजाही रुकने की खबरों ने ग्लोबल मार्केट में दहशत फैला दी है। इसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों और आम आदमी की जेब (महंगाई) पर पड़ता दिख रहा है।


ब्रेंट और WTI क्रूड में आया ऐतिहासिक उछाल


युद्ध की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों ने आसमान छू लिया:


ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): इसमें 13% का भयंकर उछाल आया और यह 82.37 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह जनवरी 2025 के बाद इसका सबसे उच्चतम स्तर है। हालांकि, बाद में यह थोड़ी नरमी के साथ 8.88% की बढ़त लेकर 79.34 डॉलर पर कारोबार कर रहा था।


WTI क्रूड: वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 8% चढ़कर 72.38 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। ट्रेडिंग के दौरान इसने 75.33 डॉलर का हाई भी छुआ था।


क्यों लगी कच्चे तेल में आग? 


पिछले 2 दिनों से मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में भारी सैन्य टकराव चल रहा है। रविवार को इजराइल ने ईरान पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइलें दागीं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि खाड़ी तट के पास उनके 3 तेल टैंकरों को नुकसान पहुंचा है और 1 नाविक की जान चली गई है। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के 9 नौसैनिक जहाजों को तबाह कर दिया है और आगे भी ईरान पर "भारी और सटीक बमबारी" जारी रहेगी।


ग्लोबल सप्लाई पर मंडराया 'एनर्जी क्राइसिस' का खतरा


ईरान के दक्षिणी तट के पास स्थित 'स्ट्रेट ऑफ होरमुज' दुनिया की सबसे क्रिटिकल जगह बन गई है। पूरी दुनिया की लगभग 20% क्रूड सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से होती है। सऊदी अरब और कुवैत जैसे बड़े खाड़ी देश अपना तेल यहीं से भेजते हैं।


हर दिन इस रास्ते से लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और भारी मात्रा में प्राकृतिक गैस गुजरती है। हालांकि ईरान का कहना है कि यह मार्ग तकनीकी रूप से अभी खुला है, लेकिन जानकारों की मानें तो अगर यहाँ रुकावट लंबी चली, तो दुनिया को एक भयंकर 'एनर्जी क्राइसिस' का सामना करना पड़ सकता है।


शेयर बाजार धड़ाम, इन कंपनियों को हुआ फायदा


तेल की कीमतों में इस आग का सीधा असर ग्लोबल शेयर बाजारों पर दिखा:


  • अमेरिका में S&P 500, नैस्डैक (Nasdaq) और डाउ जोंस (Dow Jones) के फ्यूचर्स 1% से ज्यादा टूट गए।

  • दूसरी तरफ, तेल के दाम बढ़ने से ExxonMobil और Chevron जैसी एनर्जी कंपनियों के शेयरों में 2% की तेजी दर्ज की गई।

  • युद्ध के कारण Northrop Grumman और Lockheed Martin जैसी हथियार और डिफेंस कंपनियों के शेयर भी चढ़ गए।


ईंधन के दाम और भारत पर असर


अमेरिका में इस समय पेट्रोल की औसत रिटेल कीमत 2.98 डॉलर प्रति गैलन हो गई है, जो दिसंबर 2025 में 3 डॉलर से नीचे के स्तर के मुकाबले थोड़ी ज्यादा है।

वहीं, ईरान हर दिन करीब 33 लाख बैरल तेल निकालता है (जो ग्लोबल सप्लाई का 3% है)। OPEC के मुताबिक, ईरान के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार है और वह भारत-चीन जैसे देशों को भारी मात्रा में तेल बेचता है। एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह जंग जल्द नहीं रुकी, तो कच्चा तेल महंगा ही रहेगा, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई और आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ जाएगा।


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(डिस्क्लेमर: बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी तरह का निवेश करने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंसियल एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।)

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