अमेरिका-ईरान तनाव: कच्चे तेल की कीमतों में लग सकती है आग, 110 डॉलर तक पहुंच सकते हैं दाम; जानें एक्सपर्ट्स की राय

MoneySutraHub Team

 US Iran tension, Crude oil prices: अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। हालात बिगड़े तो ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Crude oil prices: अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

तेहरानः पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है। इस भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Tension) का सबसे बड़ा असर दुनिया भर के तेल बाजार पर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स और मार्केट एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा भूचाल आ सकता है।


हाल ही में अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाई है। इस खबर के आते ही कच्चे तेल के दामों में 10 प्रतिशत तक का उछाल आ चुका है। फरवरी महीने में तेल की कीमतें पहले से ही हाई लेवल पर हैं और शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो कुछ दिन पहले 72 डॉलर तक चला गया था।


हालात बिगड़े तो 110 डॉलर तक जाएगा तेल


इक्विरस सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह तनाव और गहराता है, तो कच्चे तेल की कीमत मौजूदा स्तर से करीब 57 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। ऐसे में ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकता है। वहीं, रैबोबैंक इंटरनेशनल के विशेषज्ञों का भी कहना है कि बाजार में इस वक्त डर का माहौल है। अगर अमेरिका और ईरान आमने-सामने आते हैं, तो तेल के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल तक आसानी से जा सकते हैं।


क्यों अहम है 'स्ट्रेट ऑफ होरमज'?


इस पूरे विवाद में 'स्ट्रेट ऑफ होरमज' (Strait of Hormuz) सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। अगर तनाव के कारण यह रास्ता बंद होता है, तो तेल की कीमतों में 20 से 40 डॉलर का 'रिस्क प्रीमियम' जुड़ जाएगा। इससे कीमतें 95 से 110 डॉलर के पार जा सकती हैं।


सप्लाई का मुख्य रास्ता: हर दिन करीब 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इसी रास्ते से पूरी दुनिया में जाते हैं।


गैस की सप्लाई: दुनिया की कुल गैस सप्लाई का 20 प्रतिशत हिस्सा भी यहीं से होकर गुजरता है। अगर ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है, तो दुनिया भर में त्राहिमाम मच सकता है।


राहत की बात: 60 डॉलर तक गिर सकते हैं दाम


हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। रैबोबैंक के एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अगर आने वाले कुछ हफ्तों में अमेरिका, ईरान पर कोई सैन्य हमला नहीं करता है और दोनों देशों के बीच कोई समझौता हो जाता है, तो बाजार की घबराहट खत्म हो जाएगी। ऐसा होने पर ब्रेंट क्रूड के दाम गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल तक नीचे आ सकते हैं।


क्या है लॉन्ग टर्म आउटलुक?


नोमुरा के विश्लेषकों के अनुसार, ईरान हर दिन करीब 3.3 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता है। अगर युद्ध हुआ तो शॉर्ट-टर्म में बाजार में उथल-पुथल मचेगी। लेकिन, दुनिया के पास अतिरिक्त तेल उत्पादन की क्षमता (Spare Capacity) मौजूद है, जो इस कमी को पूरा कर सकती है।


अगर भविष्य में अमेरिका, ईरान में एक स्थिर सरकार बनाने में कामयाब होता है और उस पर लगे प्रतिबंध (Sanctions) हटा लिए जाते हैं, तो ईरान खुले बाजार में अपना तेल बेच सकेगा। फिलहाल ईरान के पास रोजाना 0.3 से 0.4 मिलियन बैरल एक्स्ट्रा तेल पैदा करने की क्षमता है। यह तेल बाजार में आने से ग्लोबल सप्लाई बढ़ेगी, जिससे लंबे समय में तेल की कीमतें सस्ती होंगी।


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डिस्क्लेमर: यहां पर दिए गए विचार और इन्वेस्टमेंट सलाह इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के अपने विचार और सलाह हैं। MoneysutraHub.in यूज़र्स को सलाह देता है कि कोई भी इन्वेस्टमेंट का फैसला लेने से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

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