Mutual Fund Investment: सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स का क्रेज घट रहा है। जनवरी 2026 में इसमें निवेश 88% तक गिर गया। जानें इस बड़ी गिरावट का कारण और निवेशकों के लिए एक्सपर्ट की क्या है सलाह।
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अहमदाबादः क्या आप भी म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं? अगर आपने सेक्टोरल या थीमैटिक फंड्स (Sectoral and Thematic Funds) में निवेश किया है, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। पिछले कुछ सालों से इन फंड्स में जो अंधाधुंध पैसा आ रहा था, अब उस पर ब्रेक लग गया है। ICRA एनालिटिक्स के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 में इन फंड्स में होने वाले निवेश में सालाना आधार पर 88 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
जनवरी 2025 में जहां इन फंड्स में 9016.60 करोड़ रुपये का नेट निवेश (Inflow) हुआ था, वहीं जनवरी 2026 में यह आंकड़ा सिकुड़कर मात्र 1042.56 करोड़ रुपये रह गया है। आइए समझते हैं कि आखिर निवेशकों का मोह इन फंड्स से क्यों भंग हो रहा है और आपके लिए अब सही रणनीति क्या होनी चाहिए।
क्यों घट रहा है सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स का क्रेज?
इन फंड्स में आई इस भारी गिरावट के पीछे कुछ मुख्य कारण हैं:
कमजोर रिटर्न: बाजार में उपलब्ध लगभग 248 सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स में से कई अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करने में नाकाम रहे हैं।
बदलते ट्रेंड्स: ये फंड्स बहुत चक्रीय (cyclical) होते हैं। जैसे ही किसी खास सेक्टर का दौर खत्म होता है, इन फंड्स का रिटर्न भी तेजी से गिरने लगता है।
बाजार का उतार-चढ़ाव: मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में बढ़ती अस्थिरता, रुपये की कमजोरी और ग्लोबल मार्केट की चिंताओं ने निवेशकों को डरा दिया है।
मुनाफावसूली: जिन रिटेल निवेशकों ने बिना रिस्क समझे इनमें पैसा लगाया था, वे अब रिकवरी आते ही अपना पैसा निकालकर बाहर निकल रहे हैं।
डायवर्सिफिकेशन की तरफ भाग रहे निवेशक
आंकड़े साफ गवाही दे रहे हैं कि लोग अब रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं। मई 2024 में इक्विटी फंड्स के कुल नेट फ्लो में सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स का हिस्सा 55.37 फीसदी था, जो जनवरी 2026 में गिरकर महज 4.34 फीसदी रह गया है। इसका सीधा मतलब है कि निवेशक अब किसी एक खास सेक्टर में पैसा फंसाने के बजाय अलग-अलग जगह (Diversification) निवेश करना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं।
AUM में बढ़त, लेकिन रिटर्न का क्या?
भले ही नए निवेश में कमी आई हो, लेकिन इन फंड्स का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) अभी भी बढ़ रहा है। जनवरी 2026 में यह 13.63 फीसदी बढ़कर 5.24 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अगर रिटर्न की बात करें, तो इन 248 फंड्स ने औसतन 1 साल में 6.28 फीसदी, 3 साल में 18.60 फीसदी और 5 साल में 17.00 फीसदी का रिटर्न दिया है।
अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?
ICRA एनालिटिक्स के अश्विनी कुमार के मुताबिक, आने वाले कुछ समय तक इन फंड्स में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसलिए:
जल्दबाजी न करें: अगर आप किसी थीमैटिक फंड में निवेश कर रहे हैं, तो लंबे समय का नज़रिया रखें।
चुनिंदा थीम्स पर फोकस: सरकारी नीतियों और मजबूत इकॉनमी से जुड़े सेक्टर्स में लंबी अवधि का आउटलुक अभी भी पॉजिटिव है।
डेटा के आधार पर फैसला: किसी के कहने पर या पिछले साल का ज्यादा रिटर्न देखकर पैसा न लगाएं। अपनी रिस्क लेने की क्षमता समझें और तभी निवेश करें।
अब वह समय आ गया है जब आपको अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए। ज्यादा जोखिम वाले एक ही सेक्टर के फंड के बजाय, डायवर्सिफाइड फंड्स आपके निवेश को ज्यादा सुरक्षा दे सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और निवेश की सलाह नहीं है। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश करने से पहले स्कीम इनफार्मेशन डॉक्यूमेंट (SID) ध्यान से पढ़ें और अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से जरूर सलाह लें।

