Mutual Funds: एक ही फंड में सुरक्षा और बंपर रिटर्न का फॉर्मूला! जानिए Large and Mid Cap Funds में निवेश का सही तरीका

MoneySutraHub Team

 Large and Mid Cap Funds क्या हैं और ये आपके पोर्टफोलियो के लिए क्यों जरूरी हैं? जानिए बड़ी कंपनियों की स्थिरता और छोटी कंपनियों की ग्रोथ का फायदा एक साथ कैसे उठाएं। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

Best Equity Mutual Funds
 

SIP Investment: निवेश की दुनिया में अक्सर एक आम निवेशक दोराहे पर खड़ा होता है। एक तरफ मन करता है कि पैसा ऐसी जगह लगाएं जहां सुरक्षा हो, यानी बड़ी और नामी कंपनियां। दूसरी तरफ लालच होता है कि रिटर्न थोड़ा ज्यादा मिले, जो अक्सर मिड साइज की तेजी से बढ़ती कंपनियों में मिलता है। अब सवाल यह है कि क्या कोई ऐसा रास्ता है जहां ‘सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे’? यानी सुरक्षा भी मिले और रिटर्न भी शानदार हो?


जवाब है- Large and Mid Cap Funds


आज की इस रिपोर्ट में हम आसान भाषा में समझेंगे कि आखिर यह कैटेगरी इतनी पॉपुलर क्यों हो रही है और आपको अपने पोर्टफोलियो में इसे जगह देने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।


आखिर क्या बला है यह लार्ज एंड मिड कैप फंड?


इसे समझने के लिए हमें थोड़ा सा पीछे जाना होगा। शेयर बाजार में कंपनियों को उनके साइज (Market Cap) के हिसाब से बांटा जाता है।


Large Cap: जो कंपनियां 1 से 100 रैंक पर आती हैं। ये बाजार के हाथी हैं—धीरे चलते हैं, लेकिन गिरते कम हैं।


Mid Cap: जो कंपनियां 101 से 250 रैंक के बीच होती हैं। ये वो घोड़े हैं जो तेज दौड़ते हैं, लेकिन ठोकर लगने पर गिर भी सकते हैं।


अब Large and Mid Cap Fund एक ऐसा ‘हाइब्रिड’ रास्ता है, जो इन दोनों को मिला देता है। यह एक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम है। आसान शब्दों में कहें तो इस फंड में आपका पैसा एक साथ दिग्गज कंपनियों की मजबूती और उभरती कंपनियों की रफ़्तार, दोनों में लगाया जाता है।


SEBI का 35:35 वाला नियम और फंड मैनेजर का जादू


मार्केट रेगुलेटर SEBI ने इस कैटेगरी के लिए नियम बिल्कुल साफ रखे हैं। इस फंड के मैनेजर को निवेशकों का कम से कम 35% पैसा लार्ज कैप शेयरों में और 35% पैसा मिड कैप शेयरों में लगाना अनिवार्य है।


अब आप सोचेंगे कि बाकी बचे 30% का क्या? यहीं पर असली खेल होता है।


बाकी बचा 30% हिस्सा फंड मैनेजर अपनी समझ और बाजार के माहौल के हिसाब से कहीं भी निवेश कर सकता है। इसे ऐसे समझिए:


अगर बाजार में डर का माहौल है और गिरावट का खतरा है, तो मैनेजर इस 30% को लार्ज कैप में डालकर पोर्टफोलियो को सुरक्षित कर लेगा।


अगर बाजार में तेजी है और कमाई का मौका दिख रहा है, तो वो मिड कैप का हिस्सा बढ़ाकर रिटर्न को बूस्ट कर सकता है।


यही लचीलापन (Flexibility) इस फंड को बाकी कैटेगरी से थोड़ा खास बनाता है।


निवेश करने से पहले अपना होमवर्क जरूर करें


किसी भी स्कीम में पैसा लगाने से पहले आंख मूंदकर भरोसा करना समझदारी नहीं है। अगर आप इस कैटेगरी में उतरने का मन बना रहे हैं, तो नीचे दी गई चेकलिस्ट पर एक नज़र जरूर डालें।


1. लंबी रेस का घोड़ा बनें


यह कोई रातों-रात अमीर बनाने वाली स्कीम नहीं है। लार्ज और मिड कैप फंड में पैसा तभी लगाएं जब आपके पास कम से कम 5 से 7 साल का वक्त हो। वेल्थ क्रिएशन (Wealth Creation) या रिटायरमेंट प्लानिंग जैसे लंबे लक्ष्यों के लिए यह फंड एक बेहतरीन हथियार साबित हो सकता है।


2. जोखिम को पहचानें (Risk Profile)


मिड कैप शेयरों में निवेश होने के कारण इसमें उतार-चढ़ाव (Volatility) रहेगा। जब बाजार गिरेगा, तो आपके पोर्टफोलियो की वैल्यू कम हो सकती है। लेकिन अच्छी बात यह है कि लार्ज कैप का हिस्सा उस गिरावट को काफी हद तक थामने की कोशिश करता है। अगर आप थोड़ी बहुत हलचल देखकर घबराते नहीं हैं, तो यह फंड आपके लिए है।


3. खर्चा कितना लगेगा? (Expense Ratio)


म्यूचुअल फंड हाउस आपके पैसे को मैनेज करने के लिए एक फीस लेता है, जिसे एक्सपेंस रेश्यो कहते हैं। सुनने में 1% या 1.5% छोटा लग सकता है, लेकिन लंबे समय में यह आपके मुनाफे पर बड़ा असर डालता है। हमेशा कोशिश करें कि Direct Plan के जरिए निवेश करें, क्योंकि वहां कमीशन नहीं होता और एक्सपेंस रेश्यो कम होता है।


4. तुलना करना न भूलें


फंड चुनने से पहले देखें कि उस फंड ने अपने बेंचमार्क इंडेक्स (जैसे Nifty LargeMidcap 250 TRI) के मुकाबले कैसा प्रदर्शन किया है। सिर्फ 1 साल का रिटर्न न देखें, बल्कि फंड मैनेजर का ट्रैक रिकॉर्ड और अलग-अलग सेक्टर में उसका एलोकेशन भी चेक करें।


क्या यह सही निवेश है? (Expert Verdict)


अगर आप एक ऐसे निवेशक हैं जो सिर्फ सुरक्षित खेल (FD या Pure Large Cap) से थोड़ा ऊपर उठकर बेहतर रिटर्न कमाना चाहते हैं, और इसके लिए थोड़ा जोखिम उठाने को तैयार हैं, तो Large and Mid Cap Fund आपके कोर पोर्टफोलियो का हिस्सा जरूर होना चाहिए।


बाजार के जानकारों की मानें तो एकमुश्त पैसा लगाने (Lumpsum) के बजाय SIP (Systematic Investment Plan) का रास्ता चुनना ज्यादा समझदारी है। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो जाता है और ‘रुपी कॉस्ट एवरेजिंग’ का फायदा मिलता है।


यह फंड उन लोगों के लिए है जो मिड कैप की ग्रोथ तो चाहते हैं, लेकिन लार्ज कैप की सुरक्षा का दामन भी नहीं छोड़ना चाहते। यह एक संतुलित खुराक की तरह है जो आपके फाइनेंशियल हेल्थ को फिट रख सकती है।


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Disclaimer: म्यूचुअल फंड्स निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन है। ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। MoneysutraHub.in अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।

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