January WPI Inflation: महंगाई का डबल अटैक! जनवरी में 10 महीने के शिखर पर पहुंची थोक महंगाई, सब हुआ महंगा

MoneySutraHub Team

January WPI Inflation:महंगाई ने फिर झटका दिया है। जनवरी में थोक महंगाई दर (WPI) 10 महीने के उच्चतम स्तर 1.81% पर पहुंच गई है। खाने-पीने की चीजों और सब्जियों के दाम तेजी से बढ़े हैं। जानें पूरी रिपोर्ट।

January WPI Inflation- महंगाई का डबल अटैक!

January WPI Inflation: आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार कम होने का नाम नहीं ले रही है। अगर आप सोच रहे थे कि महंगाई से राहत मिल गई है, तो नए सरकारी आंकड़े आपको निराश कर सकते हैं। साल 2024 की शुरुआत में ही महंगाई ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। जनवरी महीने में थोक महंगाई दर (Wholesale Price Index - WPI) ने लंबी छलांग लगाई है और यह पिछले 10 महीनों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।


दिसंबर में जो थोड़ी बहुत राहत दिख रही थी, वह जनवरी में गायब हो गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, थोक महंगाई दर दिसंबर के 0.83 फीसदी से बढ़कर जनवरी में सीधे 1.81 फीसदी पर जा पहुंची है। यह उछाल बताता है कि कारखानों और मंडियों में सामान महंगा हो रहा है, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में आपकी खुदरा खरीदारी पर भी दिख सकता है।


आइए, विस्तार से समझते हैं कि आखिर किन चीजों ने महंगाई के इस ग्राफ को ऊपर धकेला है और आम जनता के लिए इसके क्या मायने हैं।


खाने की थाली पर सबसे बड़ी चोट


महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण खाने-पीने की चीजों (Food Articles) के दामों में हुई बढ़ोतरी है। हर घर की रसोई का बजट बिगाड़ने में सब्जियों और नॉन-वेज आइटम ने बड़ी भूमिका निभाई है।


खाद्य महंगाई: आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी में खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई दर 0% से बढ़कर सीधे 1.41% हो गई है। इसका मतलब है कि अनाज, फल और सब्जियां थोक बाजार में महंगी हुई हैं।

सब्जियों के तेवर: सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा सब्जियों का है। दिसंबर में सब्जियों की महंगाई दर माइनस में थी (-3.50%), जो जनवरी में उछलकर 6.78% पर पहुंच गई। यानी सब्जियों के दाम बहुत तेजी से बढ़े हैं।

अंडा और मांस: प्रोटीन डाइट लेने वालों के लिए भी खबर अच्छी नहीं है। अंडे और मांस की थोक महंगाई दर जो पहले 1.14% थी, वह अब तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 3.66% हो गई है।


प्याज और आलू का क्या है हाल?


भारतीय रसोई में प्याज और आलू सबसे जरूरी सब्जियां मानी जाती हैं। इनके दामों में उतार-चढ़ाव हुआ है।

प्याज: हालांकि प्याज की महंगाई दर अभी भी माइनस (Deflation) में है, लेकिन चिंता की बात यह है कि यह रिकवर हो रही है। प्याज की थोक महंगाई -54.40% से बढ़कर -33.42% पर आ गई है। इसका मतलब यह है कि प्याज के दाम अभी भी कम हैं, लेकिन गिरावट की रफ्तार कम हुई है और कीमतें धीरे-धीरे ऊपर की तरफ खिसक रही हैं।

आलू: आलू के मामले में थोड़ी राहत बरकरार है। जनवरी में आलू की थोक महंगाई -38.21% से और घटकर -38.84% पर रही है।


रोजमर्रा की जरूरतें और मैन्युफैक्चरिंग

सिर्फ खाना ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली अन्य चीजों (Primary Articles) ने भी महंगाई को हवा दी है।

प्राइमरी आर्टिकल्स: रोजाना की जरूरत वाले सामानों की महंगाई दर में बड़ा उछाल आया है। यह 0.21 फीसदी से बढ़कर 2.21 फीसदी हो गई है। यह सीधा संकेत है कि कच्चा माल महंगा हो रहा है।

मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स: फैक्ट्रियों में बनने वाले सामान की लागत भी बढ़ी है। मैन्युफैक्चरिंग WPI 1.82% से बढ़कर 2.86% हो गई है। इसमें कपड़े, बेसिक मेटल्स और खाने-पीने की पैक्ड चीजों की मैन्युफैक्चरिंग लागत शामिल है।

इंडेक्स नंबर: सभी कमोडिटीज़ का इंडेक्स नंबर भी बढ़ा है। यह दिसंबर के 157.0 से बढ़कर जनवरी में 157.8 हो गया है। अगर महीने-दर-महीने (Month-on-Month) आधार पर देखें, तो डब्ल्यूपीआई में 0.51 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

ईंधन और बिजली से मिली थोड़ी राहत

जहां एक तरफ खाने-पीने की चीजें महंगी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ ईंधन और बिजली (Fuel and Power) के मोर्चे पर थोड़ी राहत की खबर है। जनवरी में फ्यूल एंड पावर की थोक महंगाई दर और नीचे गई है। यह -2.31% से घटकर -4.01% पर आ गई है। इसका मतलब है कि थोक बाजार में ईंधन की कीमतें कम हुई हैं, जिसने महंगाई के आंकड़े को और ज्यादा ऊपर जाने से कुछ हद तक रोका है।


अनाज के दामों में मामूली गिरावट


एक और राहत की खबर अनाज (Cereals) को लेकर है। अनाजों की थोक महंगाई में थोड़ी कमी आई है। यह -1.18% से घटकर -1.41% पर रही है। हालांकि, सब्जियों और प्रोसेस्ड फूड के दाम बढ़ने से इस मामूली राहत का असर कम ही दिखाई दे रहा है।


क्यों आई महंगाई में यह तेजी?


जानकारों और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में थोक कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह 'बेसिक मेटल्स' (Basic Metals), खाद्य पदार्थों, और कपड़ों के निर्माण (Textiles) में आई लागत की बढ़ोतरी है। जब फैक्ट्रियों में माल तैयार करना महंगा होता है, तो उसका सीधा असर होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) पर पड़ता है। ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की दिक्कतें भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकती हैं।


जनवरी के ये आंकड़े सरकार और आरबीआई (RBI) दोनों के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं। थोक महंगाई का 10 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचना यह बताता है कि महंगाई का दबाव दोबारा बन रहा है। आमतौर पर जब थोक महंगाई बढ़ती है, तो कुछ समय बाद इसका असर खुदरा महंगाई (Retail Inflation) पर भी देखने को मिलता है, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या फरवरी में सब्जियों और खाने-पीने की चीजों के दाम कम होते हैं या महंगाई की यह रफ्तार और तेज होती है।



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